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मंडी में 1 लाख 26 हजार 298 मीट्रिक टन धान की हुई आवक
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डीसी सुजान सिंह ने कहा कि गत दिवस तक 1 लाख 26 हजार 298 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कुल आवक में से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा 58 हजार 977, हैफेड द्वारा 46 हजार 13, एफसीआई द्वारा 1455, हरियाणा वेयर हाउस द्वारा 19 हजार 853 तथा मीट्रिक टन की खरीद की गई है। उन्होंने बताया कि जिला में सभी मंडियों में धान खरीद का कार्य चल रहा है।
अब तक ढांड मंडी में 22 हजार 442, गुहला चीका में 40 हजार 776, कैथल में 27 हजार 127, कलायत में 1186, कौल में 3 हजार 300, पाई में 1 हजार 251, पूंडरी में 16 हजार 333, राजौंद में 1 हजार 217, रामथली में 6 हजार 554, सीवन में 5 हजार 212 तथा बाबालदाना 693 तथा गोहरां में 207 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। उन्होंने जिला के किसानों का आह्वान किया कि वे धान की फसल को पूरी तरह सुखाकर व साफ करके मंडियों में लाएं। किसान धान की फसल के अवशेषों को आग न लगाएं, बल्कि कस्टम हायरिंग सेंटरों व फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों की मदद से इन्हें मिट्टी में मिलाएं तथा इन फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करें, ताकि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके और भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बनी रहे।
किसानों को मंडियों में मुहैया करवाया जा रहा है भोजन- डीसी सुजान सिंह ने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए जहां मंडियों में शौचालय, पानी इत्यादि की समुचित व्यवस्था की गई है, वहीं अब मंडियों में किसानों को समाजसेवी संस्थाओं, आढ़तियों, मिलरों के सहयोग से खाने की व्यवस्था की गई है ताकि मंडियों में फसल बेचने आए किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो। अक्सर किसान मंडियों में अपने खाने का ध्यान नहीं रख पाता है। इसलिए मंडियों में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक खाने की व्यवस्था की गई है ताकि किसानों को और अधिक सुविधा मिले और अच्छा भोजन मिले।
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अब तक ढांड मंडी में 22 हजार 442, गुहला चीका में 40 हजार 776, कैथल में 27 हजार 127, कलायत में 1186, कौल में 3 हजार 300, पाई में 1 हजार 251, पूंडरी में 16 हजार 333, राजौंद में 1 हजार 217, रामथली में 6 हजार 554, सीवन में 5 हजार 212 तथा बाबालदाना 693 तथा गोहरां में 207 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। उन्होंने जिला के किसानों का आह्वान किया कि वे धान की फसल को पूरी तरह सुखाकर व साफ करके मंडियों में लाएं। किसान धान की फसल के अवशेषों को आग न लगाएं, बल्कि कस्टम हायरिंग सेंटरों व फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों की मदद से इन्हें मिट्टी में मिलाएं तथा इन फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करें, ताकि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके और भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बनी रहे।
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किसानों को मंडियों में मुहैया करवाया जा रहा है भोजन- डीसी सुजान सिंह ने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए जहां मंडियों में शौचालय, पानी इत्यादि की समुचित व्यवस्था की गई है, वहीं अब मंडियों में किसानों को समाजसेवी संस्थाओं, आढ़तियों, मिलरों के सहयोग से खाने की व्यवस्था की गई है ताकि मंडियों में फसल बेचने आए किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो। अक्सर किसान मंडियों में अपने खाने का ध्यान नहीं रख पाता है। इसलिए मंडियों में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक खाने की व्यवस्था की गई है ताकि किसानों को और अधिक सुविधा मिले और अच्छा भोजन मिले।
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