फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Rice Millers agog

राइस मिलर्स में हड़कंप

Sun, 20 Dec 2015 12:28 AM IST
नसीब सैनी/कैथल
नसीब सैनी/कैथल Updated Sun, 20 Dec 2015 12:28 AM IST
विज्ञापन
 Rice Millers agog
हरियाणा सरकार द्वारा राइस मिलर्स को मिलिंग के लिए दिए गए 1509 के धान की बोली के फैसले से मिलर्स में हड़कंप मच गया है। मिलर्स का कहना है कि यदि धान की बोली हुई तो मिलिंग उद्योग बर्बाद हो जाएगा। सरकार को व्यापारियों के साथ ज्यादती नहीं करने दी जाएगी। मिलर्स को सीजन के समय दिए गए धान को वापस देना मुश्किल हो जाएगा। इसमें सूखने के कारण वजन घटने सहित कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं।
विज्ञापन


धान के सीजन में सरकार द्वारा 1509 को ग्रेड ए में शामिल कर मिलर्स को मिलिंग के लिए दिया था। शुरू में यह 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। लेकिन सरकार द्वारा लिए गए फैसले के बाद इसके लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 1450 रुपये प्रति क्विंटल दे दिया था। मंडियों में से धान को 1450 रुपये प्रति क्विंटल खरीदकर मिलर्स को चावल निकालने के लिए दे दिया। जिसमें से मिलर्स को 67 किलो प्रति क्विंटल के हिसाब से चावल निकालने के लिए कहा गया था।
विज्ञापन


इसी बीच किसानों की शिकायत थी कि व्यापारियों ने किसानों से 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल तक धान खरीद लिया। बाद मेें इसे 1450 रुपये प्रति क्विंटल में सरकार को दे दिया। इससे उन्हें कम कीमत मिली है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार पर लगे इन घोटाले के आरोपों पर सरकार ने मिलर्स को दिए गए 1509 धान की फिजिकल वेरिफिकेशन करवाकर जांच की। जिसमें फिलहाल सरकार द्वारा किसी प्रकार की गड़बड़ी न पाए जाने की बात कही जा रही है। इसी बीच सरकार ने फिजिकल वेरिफिकेशन में पाए गए 1509 के धान की खुली बोली करवाने का निर्णय लिया है। जिससे मिलर्स में हड़कंप मच गया है।

मिलर्स का कहना है कि सीजन के समय जिस धान में 24 प्रतिशत तक की नमी थी, वह सूखकर 14 प्रतिशत तक रह गई है। जिस कारण काफी धान घट गया है। वहीं, लोडिंग, सुखाने, भरने सहित कई तरह के मिलर्स के खर्चे हो चुके हैं। ऐसे में वे किस तरह इस धान को पूरा करेंगे। कई मिलर्स ने तो इसका चावल भी निकाल दिया है और सरकार को जमा करवा दिया है। सरकार ने मिलर्स को 1509 के चावल को ग्रेड ए के चावल के साथ ही देने के लिए पत्र भी जारी किया हुआ है।

74 मिलों में है 5 से 6 लाख क्विंटल धान
जिले में 112 में से 74 मिलों में 1509 का धान दिया गया था। जिसमें 5 से 6 लाख क्विंटल 1509 किस्म का धान हो सकता है। यदि मिलर्स से यह धान वापस ले लिया गया तो उनके लिए इसकी मात्रा पूरी करनी मुश्किल हो जाएगी। वहीं, कुछ मिलों में इस किस्म को लेकर गड़बड़ी भी पाई जा सकती है। क्योंकि 1509 की कीमत बाद में बढ़कर 1500 रुपये प्रति क्विंटल से भी अधिक हो गई थी। जिस कारण कुछ मिलर्स द्वारा इसे बाहर बेचे जाने की भी संभावनाएं हैं। ऐसे में देखना है कि सरकार के इस फैसले का मिलर्स किस तरह विरोध करते हैं।

यदि सरकार 1509 को बेचने जैसा कोई कदम उठाती है तो यह राइस मिल इंडस्ट्री को बर्बाद करने का फैसला होगा। यदि कोई इस तरह का फैसला लिया गया है। तो हम मामले की पूरी जानकारी हासिल करने के बाद अगला फैसला लेंगे।
मांगें राम खुरानिया, अध्यक्ष, राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन, कैथल।

यदि मिलर्स से धान वापस लिया गया तो यह इंडस्ट्री बर्बाद हो जाएगी। कई सालों से चावल उद्योग पहले से ही घाटे में चल रहा है। अब यदि सरकार दिए गए धान को वापिस ले लेती है तो निश्चित तौर पर कई मिलें बंद हो जाएंगी।
अश्विनी शोरेवाला, मिलर।

यदि सरकार बोली करवाती है तो मिलें बंद हो जाएंगी। सरकार से एग्रीमेंट चावल निकालने का हुआ था। धान को उठाने का नहीं हुआ था। मिलर्स ने सुखाने सहित कई तरह के खर्च किए हैं। इस फैसले से पूरी इंडस्ट्री में उथल-पुथल मच जाएगी। सरकार से मांग है कि सरकार इस धान को उठवाने की बजाए इसका चावल निकलवाए।

जगदीश अग्रवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन।

सरकार ने मिलर्स को चावल निकालने के लिए धान दिया था। अब फैसला लिया गया है कि 1509 की बोली करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ही बोली की तिथि सहित आगामी नीति का एलान करेंगे।
कर्णदेव कंबोज, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री, हरियाणा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed