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जब तक मिलर्स की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक नहीं करवाएंगे रजिस्ट्रेशन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 12:27 AM IST
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rice milar
हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन की बैठक बुधवार को ग्रेस होटल में हुई। जिसमें मिलर्स व डीलर्स की समस्याओं पर विचार-विमर्श कर एलान किया गया कि जब तक सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती, तब तक मिलर्स रस्ट्रिेशन नहीं करवाएंगे। सभी समस्याओं का समाधान होने के बाद ही काम होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए 10 सितंबर तक का समय था। अब तक 1338 मिलों में से सात-आठ ने ही रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दिया है।
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चेयरमैन व कार्यवाहक अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि दो दिन पूर्व कुरुक्षेत्र में हुई मिलर्स की प्रदेशस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया था कि सरकार ने मिलरों व डीलरों के लिए जो सख्त पॉलिसी बनाई है, वे उनके अनुसार सही नहीं हैं। उनकी आठ सितंबर को हरियाणा के एसीएस से भी इस बारे में बैठक हुई थी, उस दौरान 700 मिलरों को धान देने के बारे में बातचीत हुई थी। सरकार से मांग की कि इस वर्ष 2019-20 के सीएमआर के रुके बिल तुरंत प्रभाव से जारी किए जाएं। पिछले वर्ष 2019-20 में एफसीआई में स्पेस ना होने के कारण व 21 मार्च से कोरोना महामारी से लंबे समय तक लाकडाउन होने के कारण मिलों से लेबर पलायन कर गई। ऐसे में मिलों में मजदूरों की कमी के कारण धान का लदान और उठान का कार्य प्रभावित हुआ।
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मलिर राजेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार जितनी धान मिलरों को दे रही है, उसके बदले में उतनी ही प्रॉपर्टी गिरवी रखवाने का कार्य कर रही है। धान के बदले कोई प्रॉपर्टी गिरवी नहीं दी जाएगी। मिलर्स ने कहा कि पिछली बार सरकार ने 22 प्रतिशत तक नमी वाली धान को खरीदने का निर्णय लिया। खरीद के बाद धान मिलों में तो पहुंचा दी, लेकिन बाद में नुकसान मिलरों को उठाना पड़ा। इस बार अगर सरकार चाहती है तो 17 प्रतिशत नमी की धान मंडी से खरीद कर मिलों तक पहुंचाए।
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जिले के राइस मिलर प्रधान रमेश चंद्र ने कहा कि सरकार की पहले पॉलिसी थी कि मिलर्स से बारदाना 50 प्रतिशत लिया जाता था। अब बारदाना भी पूरा ही मिलरों द्वारा दिए जाने की बात कह रही है। धान का मंडियों से सैंपल लेकर कस, टुकड़ा, डैमेज व डिस्कलर की मात्रा 5-5 प्रतिशत निर्धारित की जाए। धान में से 62-63 प्रतिशत ही चावल और 30-35 प्रतिशत टुकड़ा बनता है। जबकि सरकार 67 प्रतिशत पूरा चावल की बात करती है।

मिलर्स सचिन मितल, प्रवीण बंसल, अमरजीत चीका, सतीश कंसल व सुशील गुप्ता ने कहा कि पूरे हरियाणा में होल्डिंग व इंटरेस्ट चार्ज की एक ही पॉलिसी बनाई जाए। जबकि इसमें एजेंसियों की मनमानी होती है। जब एक बार धान खरीद के बाद दिसंबर में सभी मिलर्स की पीवी हो जाती है। ऐसे में उन्हें बार बार तंग न किया जाए। बैठक में बार्डर पर पड़ने वाली मंडियों के बारे में भी विचार किया गया। मिलरों ने सरकार के सामने मांग रखी कि बॉर्डर पर पड़ने वाली मंडियों में पोर्टल खोले जाएं ताकि प्रदेश की धान दूसरे प्रदेशों में न जाए और एफसीआई द्वारा चावल की चेकिंग भी मशीनों द्वारा करवाई जाए। इस अवसर पर मिलर्स महिंद्र गर्ग, ओम प्रकाश जैन, अंकित मिगलानी, रमेश सिंधवानी, जय भगवान, महावीर सिंगला, तरसेम गर्ग, नरेश होडल, प्रवीण बटार खिजराबाद व अशोक कालड़ा नारायणगढ़ भी मौजूद थे।
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