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न लगती है हाजिरी, न लेते हैं तनख्वाह फिर भी रोज करते हैं ड्यूटी
ब्यूरो कैथल
Updated Mon, 19 Dec 2016 12:12 AM IST
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सफाई कर्मचारी अब भी कर रहा है मुफ्त ड्यूटी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हरियाणा रोडवेज में लगातार 38 साल की नौकरी के बाद रामदास बागड़ी जब रिटायर हुआ तो महकमे वालों ने इतना मान सम्मान दिया कि अगले दिन सुबह वह घर पर नहीं टिक पाया। यह साथियों के प्यार की डोर थी या बरसों की आदत कि वह रोज वाले टाइम पर ड्यूटी पर हाजिर हो गया। आते ही झाड़ू उठाया और बस अड्डे को बहारना शुरू कर दिया। टायलेट साफ किए और जमा हुआ कूड़ा ठिकाने लगाया। गले में हार पहनाकर नाचते गाते उसके घर छोड़कर आए साथियों ने जब रामदास के आने का कारण पूछा तो बोला कि जिस महकमे ने रोटी दी, जिसकी नौकरी के कारण ब्याह हुआ, जिसकी तनख्वाह से मकान बना उसे छोड़कर अब जाऊं कैसे। तब से आज तक राम दास रोजाना ठीक समय ड्यूटी पर आ जाता है।
छुट्टी के टाइम पर घर लौटता है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब किसी रजिस्टर में उसकी हाजिरी नहीं लगती। रही बात तनख्वाह की तो उसने खुद एक शपथ पत्र देकर महकमे से सेवा की इजाजत ली है कि उसे ताउम्र महकमे में सफाई आदि का काम करने दिया जाए। उसके बदले में वह कभी कोई तनख्वाह क्लेम नहीं करेगा।
कैथल के रहने वाले राम दास ने बताया कि जून 1974 में वह हरियाणा रोडवेज में डेली वेज पर सफाई की ड्यूटी पर लगा था। 1981 में उसकी सेवा डेली वेज से पक्की नौकरी में बदल गई और 2004 में वह कंफर्म भी हो गया।
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पेंशन से खूब कट रही है जिंदगी
रामदास बागड़ी ने बताया कि संतुष्टि हो तो चौथा दर्जा कर्मचारी की तनख्वाह भी कम नहीं होती। राम दास ने बताया कि अपनी इसी तनख्वाह से उसने तीन बेटियों और एक बेटे की शादी की। प्लाट खरीदा। मकान बनाया। अब पेंशन से पूरे परिवार का अच्छे से गुजारा हो जाता है इसलिए अतिरिक्त कमाई का कोई लालच नहीं उठता। गम बस इस बात का है कि इकलौता बेटा जो 2010 में एक रेल हादसे में अपनी दोनों टांगे गंवा बैठा था, अब घर में बिस्तर के हवाले है।
बस अड्डे की रूह संवार दी
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं चीका बस अड्डे पर तैनात कर्मचारी सतनाम सिंह ने बताया कि रामदास सिर्फ रोडवेज ही नहीं अन्य विभागों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। रिटायरमेंट के बाद कुछ महीने तक वह कैथल बस अड्डे पर ही काम करता रहा। फिर एक दिन उसे पता चला कि चीका बस अड्डे की हालत खराब है। अड्डे में सीवरेज का पानी भरा पड़ा है और पीछे के मैदान में झाड़ियों का जंगल पैदा हो गया है। जीएम से परमिशन लेकर वह तीन महीने पहले चीका आ गया और काट बीनकर पहले बस अड्डे से झाड़ियां काटी तथा मैदान को चकाचक बनाया। उसके बाद सीवरेज पाइपों को खुलवाकर अड्डे पर जमा गंदे पानी को साफ किया। सतनाम सिंह ने मजाक में कहा कि अब चीका बस अड्डे पर बसें बेशक आएं या ना आएं रामदास कैथल से रोज आ जाता है और सफाई करता है।
इसके सिवा जाना कहां
राम दास ने बताया कि जिस दिन वह रिटायर हुआ उसे विदाई देने चौथा दर्जा कर्मचारियों के साथ-साथ रोडवेज के ड्राइवर, कंडक्टर, चेकर, अड्डा इंचार्ज पहुंचे। यहां तक कि रोडवेज के जीएम, टीएम भी आए और उसे झप्पी देकर इतना प्यार दिया कि उसकी झोली लबालब भर गई। सारी रात उसे रोडवेज के ही सपने आते रहे। सुबह होते होते उसने फैसला कर लिया कि जब तक जिंदगी है रोडवेज की सेवा करनी है और बिना पैसे करनी है।
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छुट्टी के टाइम पर घर लौटता है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब किसी रजिस्टर में उसकी हाजिरी नहीं लगती। रही बात तनख्वाह की तो उसने खुद एक शपथ पत्र देकर महकमे से सेवा की इजाजत ली है कि उसे ताउम्र महकमे में सफाई आदि का काम करने दिया जाए। उसके बदले में वह कभी कोई तनख्वाह क्लेम नहीं करेगा।
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कैथल के रहने वाले राम दास ने बताया कि जून 1974 में वह हरियाणा रोडवेज में डेली वेज पर सफाई की ड्यूटी पर लगा था। 1981 में उसकी सेवा डेली वेज से पक्की नौकरी में बदल गई और 2004 में वह कंफर्म भी हो गया।
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पेंशन से खूब कट रही है जिंदगी
रामदास बागड़ी ने बताया कि संतुष्टि हो तो चौथा दर्जा कर्मचारी की तनख्वाह भी कम नहीं होती। राम दास ने बताया कि अपनी इसी तनख्वाह से उसने तीन बेटियों और एक बेटे की शादी की। प्लाट खरीदा। मकान बनाया। अब पेंशन से पूरे परिवार का अच्छे से गुजारा हो जाता है इसलिए अतिरिक्त कमाई का कोई लालच नहीं उठता। गम बस इस बात का है कि इकलौता बेटा जो 2010 में एक रेल हादसे में अपनी दोनों टांगे गंवा बैठा था, अब घर में बिस्तर के हवाले है।
बस अड्डे की रूह संवार दी
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं चीका बस अड्डे पर तैनात कर्मचारी सतनाम सिंह ने बताया कि रामदास सिर्फ रोडवेज ही नहीं अन्य विभागों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। रिटायरमेंट के बाद कुछ महीने तक वह कैथल बस अड्डे पर ही काम करता रहा। फिर एक दिन उसे पता चला कि चीका बस अड्डे की हालत खराब है। अड्डे में सीवरेज का पानी भरा पड़ा है और पीछे के मैदान में झाड़ियों का जंगल पैदा हो गया है। जीएम से परमिशन लेकर वह तीन महीने पहले चीका आ गया और काट बीनकर पहले बस अड्डे से झाड़ियां काटी तथा मैदान को चकाचक बनाया। उसके बाद सीवरेज पाइपों को खुलवाकर अड्डे पर जमा गंदे पानी को साफ किया। सतनाम सिंह ने मजाक में कहा कि अब चीका बस अड्डे पर बसें बेशक आएं या ना आएं रामदास कैथल से रोज आ जाता है और सफाई करता है।
इसके सिवा जाना कहां
राम दास ने बताया कि जिस दिन वह रिटायर हुआ उसे विदाई देने चौथा दर्जा कर्मचारियों के साथ-साथ रोडवेज के ड्राइवर, कंडक्टर, चेकर, अड्डा इंचार्ज पहुंचे। यहां तक कि रोडवेज के जीएम, टीएम भी आए और उसे झप्पी देकर इतना प्यार दिया कि उसकी झोली लबालब भर गई। सारी रात उसे रोडवेज के ही सपने आते रहे। सुबह होते होते उसने फैसला कर लिया कि जब तक जिंदगी है रोडवेज की सेवा करनी है और बिना पैसे करनी है।