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Kaithal News: सफाई के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी
Thu, 12 Jun 2025 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 12 Jun 2025 01:35 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में डोर-टू-डोर सफाई का कार्य संभाल रही सुगम स्वच्छता एजेंसी अब पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। एजेंसी ने कचरे से जैविक खाद तैयार कर किसानों को रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से बचाने की पहल शुरू की है।
फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार के लिए जैविक विधि से खाद तैयार की जाती है। इस प्रक्रिया में कचरे से कांच, प्लास्टिक, लोहा और अन्य पदार्थ अलग किए जाते हैं। बचा हुआ जैविक हिस्सा उन्नत तकनीक से खाद में बदला जाता है, जिसमें किसी रसायन का प्रयोग नहीं होता। इससे मिट्टी की संरचना सुधरती है
और उसमें पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव सक्रिय रहते हैं।
करनाल प्लांट प्रबंधक विकास सांगवान ने बताया कि जैविक खाद पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वर्तमान कृषि संकटों के बीच यह टिकाऊ समाधान किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
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रासायनिक खादों के अधिक उपयोग से न केवल भूमि की उर्वरता घटती है, बल्कि जल स्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं। इससे खेती का खर्च बढ़ता है और लाभ घटता है।
नगरपालिका प्रतिनिधियों ने इसे हरियाणा के किसानों के लिए एक नई दिशा और हरित समाधान बताया है। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि खेतों को फिर से उर्वर और शुद्ध बनाने के लिए प्राकृतिक विकल्पों को अपनाया जाए। इससे पर्यावरण बेहतर बनेगा।
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कलायत। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में डोर-टू-डोर सफाई का कार्य संभाल रही सुगम स्वच्छता एजेंसी अब पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। एजेंसी ने कचरे से जैविक खाद तैयार कर किसानों को रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से बचाने की पहल शुरू की है।
फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार के लिए जैविक विधि से खाद तैयार की जाती है। इस प्रक्रिया में कचरे से कांच, प्लास्टिक, लोहा और अन्य पदार्थ अलग किए जाते हैं। बचा हुआ जैविक हिस्सा उन्नत तकनीक से खाद में बदला जाता है, जिसमें किसी रसायन का प्रयोग नहीं होता। इससे मिट्टी की संरचना सुधरती है
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और उसमें पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव सक्रिय रहते हैं।
करनाल प्लांट प्रबंधक विकास सांगवान ने बताया कि जैविक खाद पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वर्तमान कृषि संकटों के बीच यह टिकाऊ समाधान किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
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रासायनिक खादों के अधिक उपयोग से न केवल भूमि की उर्वरता घटती है, बल्कि जल स्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं। इससे खेती का खर्च बढ़ता है और लाभ घटता है।
नगरपालिका प्रतिनिधियों ने इसे हरियाणा के किसानों के लिए एक नई दिशा और हरित समाधान बताया है। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि खेतों को फिर से उर्वर और शुद्ध बनाने के लिए प्राकृतिक विकल्पों को अपनाया जाए। इससे पर्यावरण बेहतर बनेगा।