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जजपा विधायक ईश्वर सिंह से मांगा किसानों ने इस्तीफा
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resignation
- फोटो : Kaithal
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शुक्रवार को डीएवी कॉलेज चीका में आयोजित सुशासन दिवस कार्यक्रम में पहुंचे विधायक ईश्वर सिंह से किसानों ने इस्तीफे की मांग कर डाली। जिससे कार्यक्रम में हड़कंप मच गया। किसानों ने विधायक से तीन मिनट तक जमकर बहस की और एक नहीं सुनीं। किसान उनसे सरकार से समर्थन वापस लेने और इस्तीफा देने की बात पर अड़े रहे। विधायक को वहां से निकालने में पुलिस की किसानों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में किसानों ने विधायक की गाड़ी के आगे अड़ा रहने का भी प्रयास किया, लेकिन पुलिस की मदद से विधायक का चालक गाड़ी लेकर निकलने में सफल रहा।
सुशासन दिवस पर डीएवी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में उस समय हड़कंप मच गया जब किसान हाथों में काले झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर कॉलेज का गेट तोड़कर अंदर घुस आए। नारेबाजी कर किसान विधायक के इस्तीफे के साथ 3 कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे थे। किसानों के विरोध को देखते हुए पहली मंजिल पर आयोजित कार्यक्रम छोड़कर विधायक ईश्वर सिंह स्वयं किसानों के बीच में आ गए और उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर उनके साथ हूं। उन्होंने कहा कि वह सबसे पहले किसानों का समर्थन करने वाले विधायक हैं। लेकिन किसान अपनी बात पर अडिग रहे। उन्होंने उनसे मांग की कि वह तुरंत इस्तीफा देकर उनके साथ आ जाएं। विधायक ने समझाने की कोशिश की कि उनके अकेले के इस्तीफा देने से यह कानून रद्द होने वाले नहीं हैं। लेकिन किसान इस बात पर अड़े रहे कि विधायक इस्तीफा दें तभी हम मानेंगे कि वह किसानों के हितैषी हैं। बातों बातों में तकरार इतनी बढ़ गई कि किसान आक्रोशित हो गए। बात न बनते देख विधायक अपनी गाड़ी की तरफ चल दिए। स्थिति बिगड़ती इससे पहले डीएसपी गुहला किशोरी लाल व प्रशासन की सूझबूझ से विधायक भीड़ में से निकलने में कामयाब रहे। इसी बीच किसानों ने आरोप लगाया कि विधायक के ड्राइवर ने उन पर गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की। प्रदर्शन के बाद किसान नेता हरदीप सिंह बदसूई ने बताया कि विधायक ने कुछ ऐसी बातें कह दी जो कि आंदोलनरत किसानों के सामने नहीं कहनी चाहिए। इसलिए किसान आक्रोशित हुआ और पुलिस ने उनके एक साथी पर डंडे से प्रहार किया। जबकि पुलिस का कहना था भीड़ में कुछ लोगों ने पुलिस के साथ हाथापाई करने की भी कोशिश की। कुछ देर बाद किसान और पुलिस के बीच विवाद के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद आंदोलनरत किसान विधायक के निवास पर भी पहुंचे। वहां पहुंच कर उन्होंने विधायक के घर के बाहर लगे पोस्टरों को फाड़ दिया और जमकर नारेबाजी की।
वहीं विधायक ईश्वर सिंह का कहना है कि उन्होंने तो किसानों की पूरी बात सुनी है और यह भी कहा कि उन्होंने सबसे पहले किसानों का समर्थन किया है। लेकिन कृषि विधेयक बनाने वाले तो सांसद हैं, तो इस्तीफा तो सांसदों से मांगना चाहिए। विधायकों के इस्तीफा देने से क्या होगा।
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सुशासन दिवस पर डीएवी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में उस समय हड़कंप मच गया जब किसान हाथों में काले झंडे लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर कॉलेज का गेट तोड़कर अंदर घुस आए। नारेबाजी कर किसान विधायक के इस्तीफे के साथ 3 कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे थे। किसानों के विरोध को देखते हुए पहली मंजिल पर आयोजित कार्यक्रम छोड़कर विधायक ईश्वर सिंह स्वयं किसानों के बीच में आ गए और उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर उनके साथ हूं। उन्होंने कहा कि वह सबसे पहले किसानों का समर्थन करने वाले विधायक हैं। लेकिन किसान अपनी बात पर अडिग रहे। उन्होंने उनसे मांग की कि वह तुरंत इस्तीफा देकर उनके साथ आ जाएं। विधायक ने समझाने की कोशिश की कि उनके अकेले के इस्तीफा देने से यह कानून रद्द होने वाले नहीं हैं। लेकिन किसान इस बात पर अड़े रहे कि विधायक इस्तीफा दें तभी हम मानेंगे कि वह किसानों के हितैषी हैं। बातों बातों में तकरार इतनी बढ़ गई कि किसान आक्रोशित हो गए। बात न बनते देख विधायक अपनी गाड़ी की तरफ चल दिए। स्थिति बिगड़ती इससे पहले डीएसपी गुहला किशोरी लाल व प्रशासन की सूझबूझ से विधायक भीड़ में से निकलने में कामयाब रहे। इसी बीच किसानों ने आरोप लगाया कि विधायक के ड्राइवर ने उन पर गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की। प्रदर्शन के बाद किसान नेता हरदीप सिंह बदसूई ने बताया कि विधायक ने कुछ ऐसी बातें कह दी जो कि आंदोलनरत किसानों के सामने नहीं कहनी चाहिए। इसलिए किसान आक्रोशित हुआ और पुलिस ने उनके एक साथी पर डंडे से प्रहार किया। जबकि पुलिस का कहना था भीड़ में कुछ लोगों ने पुलिस के साथ हाथापाई करने की भी कोशिश की। कुछ देर बाद किसान और पुलिस के बीच विवाद के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद आंदोलनरत किसान विधायक के निवास पर भी पहुंचे। वहां पहुंच कर उन्होंने विधायक के घर के बाहर लगे पोस्टरों को फाड़ दिया और जमकर नारेबाजी की।
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वहीं विधायक ईश्वर सिंह का कहना है कि उन्होंने तो किसानों की पूरी बात सुनी है और यह भी कहा कि उन्होंने सबसे पहले किसानों का समर्थन किया है। लेकिन कृषि विधेयक बनाने वाले तो सांसद हैं, तो इस्तीफा तो सांसदों से मांगना चाहिए। विधायकों के इस्तीफा देने से क्या होगा।
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