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तिथि क्षय होने से 29 मार्च को पहला व दूसरा नवरात्र व्रत होंगे एक ही दिन
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Mon, 27 Mar 2017 11:30 PM IST
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सज गए हैं मंदिर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चैत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों के साथ ही हिंदु नवसंवत्सर शुरू हो जाता हैं। जिसकी शुरुआत 28 मार्च से होगी। चैत्र मास में आने वाले नवरात्र को वार्षिक नवरात्र भी कहा जाता हैं। प्रतिपदा तिथि का क्षय होने के कारण नवरात्र व्रत को लेकर संशय की स्थिति बनी है। मंगलवार 28 मार्च को सुबह 8 बज कर 26 मिनट पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के प्रारम्भ के साथ ही विक्रम संवत 2074 अर्थात भारतीय नववर्ष का प्रारंभ हो रहा है। परंतु साल 2017 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को लेकर पंचांगों में मतभेद हैं।
शुद्ध ज्योतिष गणित के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि मंगलवार 28 मार्च को सुबह 8 बज कर 26 मिनट पर प्रारंभ हो रहा है। सूर्योदय तिथि के मतभेदानतर के अनुसार कई विद्वान इसे बुधवार 29 मार्च को सुबह 6 बज कर 16 मिनट से आरंभ बता रहे हैं। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के पंचांग खंड अनुसार वर्ष के आरंभ दिन को ज्योतिष में राजा माना जाता है। पूरे देश में पूर्व से पश्चिम तक सूर्योदय में लगभग 70 मिनट से अधिक का अंतर होता है। इसी कारण पूरे देश में सूर्योदय में मतभेद होते है। तिथि भेद के अनुसार देश में कहीं मंगलवार 28 मार्च तो कहीं बुधवार 29 मार्च को प्रतिपदा मनाई जाएगी। पंडित वेद प्रकाश गौतम ने कहा कि मंगलवार 28 मार्च के अनुसार इस संवत्सर का नाम साधारण होगा व इसके राजा मंगल व मंत्री गुरु हैं। बुधवार 29 मार्च के अनुसार संवत्सर का नाम शुभ होगा इसके राजा बुध व मंत्री गुरु होने से यह मंगलकारी रहेगा। उन्होंने बताया कि चूंकि प्रतिपदा तिथि क्षय है इसलिए 28 मार्च को कलश स्थापना व जौ की बिजाई की जा सकती है। तिथि क्षय होने के कारण 29 मार्च को पहला व दूसरा नवरात्र इकट्ठे ही मनाया जाएगा।
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शुद्ध ज्योतिष गणित के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि मंगलवार 28 मार्च को सुबह 8 बज कर 26 मिनट पर प्रारंभ हो रहा है। सूर्योदय तिथि के मतभेदानतर के अनुसार कई विद्वान इसे बुधवार 29 मार्च को सुबह 6 बज कर 16 मिनट से आरंभ बता रहे हैं। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के पंचांग खंड अनुसार वर्ष के आरंभ दिन को ज्योतिष में राजा माना जाता है। पूरे देश में पूर्व से पश्चिम तक सूर्योदय में लगभग 70 मिनट से अधिक का अंतर होता है। इसी कारण पूरे देश में सूर्योदय में मतभेद होते है। तिथि भेद के अनुसार देश में कहीं मंगलवार 28 मार्च तो कहीं बुधवार 29 मार्च को प्रतिपदा मनाई जाएगी। पंडित वेद प्रकाश गौतम ने कहा कि मंगलवार 28 मार्च के अनुसार इस संवत्सर का नाम साधारण होगा व इसके राजा मंगल व मंत्री गुरु हैं। बुधवार 29 मार्च के अनुसार संवत्सर का नाम शुभ होगा इसके राजा बुध व मंत्री गुरु होने से यह मंगलकारी रहेगा। उन्होंने बताया कि चूंकि प्रतिपदा तिथि क्षय है इसलिए 28 मार्च को कलश स्थापना व जौ की बिजाई की जा सकती है। तिथि क्षय होने के कारण 29 मार्च को पहला व दूसरा नवरात्र इकट्ठे ही मनाया जाएगा।
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