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Haryana Politics: रणदीप सुरजेवाला गांधी परिवार की नजदीकी का मिला इनाम, कांग्रेस में निभा चुके कई बड़ी जिम्मेदारियां
Sat, 11 Jun 2022 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
नसीब सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
नसीब सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jun 2022 01:40 AM IST
सार
सुरजेवाला के पिता शमशेर सिंह सोनिया गांधी को किसानों की समस्या पर नरवाना लेकर आए थे। तभी से रणदीप सुरजेवाला की गांधी परिवार के नजदीकियों में गिनती होने लगी थी। रणदीप सुरजेवाला कैथल में दो बार विधायक व मंत्री चुके हैं।
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रणदीप सुरजेवाला
- फोटो : एएनआई
विस्तार
तीन साल से किसी सरकारी पद से दूर रणदीप सुरजेवाला अब देश की सबसे बड़ी पंचायत के सदस्य बन गए हैं। सुरजेवाला के राज्यसभा सदस्य बनते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह सफलता उन्हें यूं ही नहीं मिली है, लंबे समय से गांधी परिवार के विश्वासपात्रों में शामिल सुरजेवाला को गांधी परिवार की नजदीकियों के कारण यह सफलता हासिल हो पाई है।
मूल रूप से हरियाणा के नरवाना निवासी रणदीप सुरजेवाला ने नरवाना से ही अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। राजनीति उन्हें विरासत में मिली। उनके पिता स्व. शमशेर सिंह सुरजेवाला बड़े कांग्रेसी नेता रहे हैं। एक समय ऐसा था जब पूरे प्रदेश में महज तीन कांग्रेस विधायक बने थे। इन तीन में शमशेर सिंह सुरजेवाला भी विधायक बने थे।
नरवाना में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को सीएम रहते हुए हराने वाले सुरजेवाला इसी कारण चर्चा में आए थे। जब उन्होंने वर्ष 2005 में तत्कालीन सीएम को पराजित कर दिया था। वे कांग्रेस पार्टी में न सिर्फ युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं, बल्कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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साल 1999 और 2005 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नरवाना से पूर्व केंद्रीय उपमंत्री जयप्रकाश व पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को पराजित किया। नए परिसीमन में नरवाना विधानसभा सुरक्षित होने के बाद उन्होंने 2009 में कैथल से विधानसभा का चुनाव जीता। वे 2005 से 2014 तक कांग्रेस सरकार में महत्वपूर्ण महकमों के साथ कैबिनेट मंत्री भी रहे। वर्ष 2019 में जींद उपचुनाव व इसी साल उन्हें कैथल विधानसभा चुनाव में हार का भी सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद कांग्रेस आलाकमान का सुरजेवाला में विश्वास कम नहीं हुआ। सुरजेवाला को कर्नाटक का प्रभारी बनाया गया। साथ ही राष्ट्रीय महासचिव सहित कई बड़ी जिम्मेदारी व संगठन में कई समितियों का सदस्य बनाया गया है। सुरजेवाला अब राजस्थान से कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्यसभा में पहुंच गए हैं।
सुरजेवाला के राज्यसभा सांसद बनने पर जहां उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। वहीं उनके विरोधियों का कहना है कि सुरजेवाला अब कैथल से मुश्किल ही चुनाव लड़ेंगे। इस संबंध में सुरजेवाला पिछले सप्ताह ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अब वे कैथल में ज्यादा सक्रिय रहकर जनसमस्याओं का समाधान करवाएंगे।
सशक्त तौर पर यहां की आवाज संसद में उठाएंगे। शनिवार को सुरजेवाला कैथल पहुंचेंगे। जहां नगर निकाय चुनाव में कार्यकर्ता उनका इंतजार कर रहे हैं। इस उपलब्धि पर सुरजेवाला के समर्थक जोरदार स्वागत की तैयारी में जुटे हैं।
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मूल रूप से हरियाणा के नरवाना निवासी रणदीप सुरजेवाला ने नरवाना से ही अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। राजनीति उन्हें विरासत में मिली। उनके पिता स्व. शमशेर सिंह सुरजेवाला बड़े कांग्रेसी नेता रहे हैं। एक समय ऐसा था जब पूरे प्रदेश में महज तीन कांग्रेस विधायक बने थे। इन तीन में शमशेर सिंह सुरजेवाला भी विधायक बने थे।
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नरवाना में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को सीएम रहते हुए हराने वाले सुरजेवाला इसी कारण चर्चा में आए थे। जब उन्होंने वर्ष 2005 में तत्कालीन सीएम को पराजित कर दिया था। वे कांग्रेस पार्टी में न सिर्फ युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं, बल्कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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साल 1999 और 2005 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नरवाना से पूर्व केंद्रीय उपमंत्री जयप्रकाश व पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को पराजित किया। नए परिसीमन में नरवाना विधानसभा सुरक्षित होने के बाद उन्होंने 2009 में कैथल से विधानसभा का चुनाव जीता। वे 2005 से 2014 तक कांग्रेस सरकार में महत्वपूर्ण महकमों के साथ कैबिनेट मंत्री भी रहे। वर्ष 2019 में जींद उपचुनाव व इसी साल उन्हें कैथल विधानसभा चुनाव में हार का भी सामना करना पड़ा।
इसके बावजूद कांग्रेस आलाकमान का सुरजेवाला में विश्वास कम नहीं हुआ। सुरजेवाला को कर्नाटक का प्रभारी बनाया गया। साथ ही राष्ट्रीय महासचिव सहित कई बड़ी जिम्मेदारी व संगठन में कई समितियों का सदस्य बनाया गया है। सुरजेवाला अब राजस्थान से कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्यसभा में पहुंच गए हैं।
सुरजेवाला के राज्यसभा सांसद बनने पर जहां उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। वहीं उनके विरोधियों का कहना है कि सुरजेवाला अब कैथल से मुश्किल ही चुनाव लड़ेंगे। इस संबंध में सुरजेवाला पिछले सप्ताह ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अब वे कैथल में ज्यादा सक्रिय रहकर जनसमस्याओं का समाधान करवाएंगे।
सशक्त तौर पर यहां की आवाज संसद में उठाएंगे। शनिवार को सुरजेवाला कैथल पहुंचेंगे। जहां नगर निकाय चुनाव में कार्यकर्ता उनका इंतजार कर रहे हैं। इस उपलब्धि पर सुरजेवाला के समर्थक जोरदार स्वागत की तैयारी में जुटे हैं।