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पराली से बदली तकदीर: 300 लोगों को दे रहे रोजगार, उधार लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉली और फिर खरीदी बेलर मशीन
Mon, 10 Oct 2022 03:55 AM IST
भूपेंद्र सिंह
सोनू थुआ, संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
सोनू थुआ, संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 10 Oct 2022 03:55 AM IST
सार
दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के लिए हर साल जिम्मेदार ठहराए जाने वाले किसानों में अब बदलाव हो रहा है। ये जागरूकता का असर ही है कि इस बार हरियाणा में खेतों में पराली जलाने के मामले कम सामने आ रहे हैं।
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प्लांट में पराली बेचने के लिए लेकर जाते रामकुमार।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पराली आफत नहीं, मुनाफे का सौदा है। यह कर दिखाया है हरियाणा के कैथल जिले के गुहला चीका के गांव रिवाड़ जागीर निवासी रामकुमार ने। उन्होंने पराली की गांठें बेचकर न सिर्फ अपनी तकदीर बदली, बल्कि 300 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया।
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रामकुमार ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वर्ष 2008 में उन्होंने लोन पर ट्रैक्टर व ट्रॉली ली। इसके बाद खेतों से पराली उठानी शुरू की लेकिन इससे पार नहीं पड़ी। जब वह पंजाब के एक प्लांट में पराली बेचने के लिए जा रहे थे तो झांल खेड़ी गांव में पराली से गांठ बनाने वाली मशीन देखी। 2012 में पुरानी बेलर मशीन खरीदकर लाए।
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शुरुआत में आमदनी अच्छी नहीं हुई, लेकिन हार नहीं मानी। फिर 2018 में कृषि विभाग से अनुदान पर सात मशीनें खरीदीं और काम को आगे बढ़ाया। आज 12 मशीनें हैं, जिससे फसल अवशेष प्रबंधन, लेबर और मशीनों का खर्च निकाल कर डेढ़ माह के सीजन में 50 लाख रुपये तक की बचत कर लेते हैं। आज कई महंगी गाडि़यां हैं नियमित आयकर रिटर्न भी भर रहे हैं।
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चंडीगढ़। दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के लिए हर साल जिम्मेदार ठहराए जाने वाले किसानों में अब बदलाव हो रहा है। ये जागरूकता का असर ही है कि इस बार हरियाणा में खेतों में पराली जलाने के मामले कम सामने आ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले अब तक तीन गुना कम केस सामने आए हैं। पिछले साल इस समय तक 250 से अधिक स्थानों पर पराली जलाई गई थी, लेकिन इस साल प्रदेश में कुल 80 स्थानों पर ही पराली जलने की रिपोर्ट आई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में हरियाणा में 15 सितंबर से 12 अक्टूबर तक 1213 स्थानों पर पराली जलाई गई थी। 2021 में इसी अवधि में 298 मामले रिपोर्ट किए गए। इस साल केवल 80 स्थानों पर ही जलाई गई है। हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) द्वारा पराली जलाने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है। हरसेक की रिपोर्ट के अनुसार कुल 80 केसों में सबसे अधिक मामले कुरुक्षेत्र 25 और करनाल में 25 आए हैं।
इसके अलावा अंबाला 10, जींद 8, कैथल 8, फतेहाबाद 3, पानीपत-सोनीपत 2-2, पलपल और यमुनानगर में 1-1 स्थान पर पराली जलाई गई है। शेष 12 जिलों में एक स्थान पर भी पराली जलाना रिपोर्ट नहीं हुआ है। सितंबर माह में प्रदेश में पराली जलाने का कोई केस सामने नहीं आया। अभी धान कटाई का सीजन जोरों पर है। अक्तूबर माह में ही पराली जलाने के 80 मामले सामने आए हैं। इनमें 5 अक्तूबर को 24 और 6 को 26 स्थानों पर पराली जलाई गई।
विशेष अभियान का असर है इस बार
हरियाणा सरकार द्वारा चलाए गए विशेष अभियान का असर है कि इस बार पराली जलाने के मामले कम सामने आ रहे हैं। खेत में पड़े पराली के बंडल इस बात के गवाह हैं कि किसानों ने पराली का प्रबंधन किया है। साथ ही पराली बेचकर अपनी आय बढ़ाई है। इससे पर्यावरण भी बचा है, दूसरा जमीन की उर्वरता भी बनी रही है। कृषि विभाग की तरफ से अपील है कि अपने आस पास के पड़ोसी किसानों को भी पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करें। -हरदीप सिंह, महानिदेशक, कृषि विभाग