कोको ले गई भाजपा की वोट: राकेश टिकैत ने समझाया कोको का मतलब, बोले- बुजुर्ग कोको का नाम लेकर डराते थे
पांच राज्यों के चुनाव में किसी पार्टी की मदद के सवाल पर उन्होंने कहा कि 13 माह के आंदोलन के बाद लोग खुद फैसला लेंगे, लेकिन यह जरूर है कि अपना वोट खराब न करें।
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विस्तार
हरियाणा के कैथल में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि यूपी में भाजपा की वोट कोको ले गई। चुनाव के समय भाजपा को पता चल जाएगा। वहां सरकार का पहले चरण में काम निपटा दिया है। कोको के बारे में बताते हुए कहा कि बुजुर्ग कोको का नाम लेकर डराते थे। अब वहीं कोको भाजपा की वोट ले गई। उन्होंने कहा कि कोको भाजपा की मौसी है। चुनाव में भाजपा को इस बारे में पता चल जाएगा। कैथल में शनिवार को तितरम मोड पर तितरम व आस-पास के गांवों के लोगों द्वारा शुरू की गई किसान-मजदूर कैंटीन का शुभारंभ करने के बाद मीडिया से बातचीत में राकेश टिकैत ने ये बातें कहीं।
टिकैत कैथल में पहुंचे थे, जहां उन्होंने किसान कैंटीन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यहां कैंटीन शुरू करने के लिए सभी किसान-मजदूरों का स्वागत। यह आंदोलन से निकले विचार व गुरुद्वारे की तर्ज पर शुरू किया गया प्रयास है। यहां पहुंचने पर कुमार मुकेश सहित अन्य लोगों ने टिकैत का स्वागत किया। इसके बाद मीडिया से बातचीत में राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली में 13 माह चले आंदोलन में कुछ बातों पर समझौता हुआ था। यह समझौता कागजों पर हुआ। सरकार नहीं मिली। उसे ढूंढने यूपी में गए। लेकिन वहां भी नहीं मिली। देश में सरकारें तो चाहिए, लेकिन तानाशाही सरकारें नहीं चाहिए।
उन्होंने कहा कि एसकेएम की लंबित मांगों को लेकर पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा। पूरे देश में लोगों को बताया जाएगा कि किसान, युवा, आदिवासी सभी की जरूरतें क्या हैं? एसकेएम विपक्ष की भूमिका नहीं निभाएगा। एसकेएम के चुनाव लड़ रहे लोगों की मदद के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि वे लोग खुद ही 4 माह की छुट्टी पर गए हैं। एसकेएम ऐसे लोगों की मदद नहीं करेगा। एसकेएम के लिए सभी राजनीतिक लोग बराबर हैं। एसकेएम केवल संगठन मजबूती पर ध्यान देगा। पूरे देश में किसान, मजदूर, नौजवन, बेरोजगार आदिवासी सभी की लड़ाई लड़ेगा।
कैथल में हुक्का दुकान मालिक ने किसान कैंटीन में उपहार में दिया हुक्का, कहा- बीस हजार रुपये आई है लागत
किसान मजदूर कैंटीन के शुभारंभ अवसर पर राकेश टिकैत ने तीन चिल्म वाले हुक्के का शुभारंभ किया। जो मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। यह हुक्का कैथल में एक हुक्का की दुकान चलाने वाले दुकानदार ने उपहार में दिया। इस दुकानदार राजेश दलाल ने बताया कि हर व्यक्ति किसान आंदोलन में सहयोग कर रहा है। उसने भी सोचा कि वह भी सहयोग करे।
इस किसान कैंटीन में यह हुक्का इसीलिए दिया है कि किसान यहां बैठकर चर्चा कर सकें। हुक्का पंच परमेश्वर के बीच पंचायत में अहम भूमिका निभाता था। इसमें आग भी होती है और पानी भी। पंच परमेश्वर इसी आग व जल के समक्ष बड़े से बड़े विवादों का फैसला करते थे। इसी बात से प्रेरित होकर उसने यह हुक्का भिवानी से विशेष रूप से बनवाया है।
इसमें ऊपर तीन चिल्म लगी हुई हैं। ये तीनों चिल्म एक साथ भी चल सकती हैं और एक-एक करके भी चल सकती हैं। इसमें नीचे का लौटा बड़ा है। इसीलिए इसमें पानी भी ज्यादा आता है। इसमें पानी डालने के लिए खोला नहीं जाता, ऊपर की नली से ही पानी डाला जाता है। उसने यह हुक्का यहां निशुल्क रूप से दिया है।
किसान मोर्चे से गए चुनाव लड़ रहे लोगों को नहीं है एसकेएम का समर्थन
राकेश टिकैत ने कहा कि किसान मोर्चा विभिन्न राज्यों में चुनाव लड़ रहे किसान मोर्चा के सदस्यों का समर्थन नहीं करता न ही राजनीति से कोई हल निकलेगा। हल केवल आंदोलन से निकलेगा। आंदोलन के लिए वे स्वयं पूरे देश का दौरा करेंगे। युवा, आदिवासी से लेकर हर वर्ग के हक के लिए लड़ा जाएगा। देश को सरकार तो चाहिए लेकिन तानाशाही सरकार नहीं। 13 माह के आंदोलन में सरकार केवल 22 जनवरी 2021 को मिली थी। इसके बाद सरकार नहीं मिली। आंदोलन वापसी के समय केवल कागजों का आदान-प्रदान हुआ। जिन लोगों के साथ यह कागजों का आदान-प्रदान हुआ उनके फोन अब बंद आ रहे हैं।
गुरनाम चढ़ूनी द्वारा गैर राजनीतिक किसान नेताओं से लखीमपुरी खीरी में मंत्री के बेटे को मिली जमानत के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि एसकेएम के वकीलों को नेट में दिक्कत के कारण कोर्ट सुन नहीं पाई। अपर कोर्ट में अपील की जाएगी। कोर्ट के फैसले पर बाहर सवाल नहीं उठ सकते। उन्होंने एक तरह से किसान नेता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे सभी का सम्मान करते हैं। जो ड्यूटी पर है, उसका भी, रिटायरमेंट के बाद वाले का भी और राज्यसभा सदस्यों का भी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसकेएम किसी का विरोध नहीं करेगा। बल्कि यह जरूर बताया जा रहा है कि यह सरकार उद्योगपतियों की है, बेरोजगारी है। जनता जहां चाहे वहां वोट दे। सरकार की ओर से केवल एक बात है कि वोट कैसे मिले?
डेरा प्रमुख को जमानत के सवाल पर उन्होंने कहा कि जनता देख रही है। वे क्यों किसी का विरोध करें। राकेश टिकैत ने कहा कि पहले चरण में यूपी में सरकार का केस निपटा दिया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यूपी के पहले चरण में भाजपा की वोट कोको ले गई। लोग गलत फहमी में न रहें कि राजनीति से विकल्प निकलेगा, विकल्प केवल आंदोलन से निकलेगा। जो एसकेएम के लोग चुनाव लड़ रहे हैं, उनकी भी गलतफहमी चुनाव में निकल जाएगी।
राकेश टिकैत ने कहा कि यूपी में जिस ट्रेक्टर पर किसान का झंडा है, उसका टोल फ्री है। उनकी मुख्य मांगों में एमएसपी पर कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू किए जाने, दस साल पुराने बंद किए गए ईंजन सहित सभी उपकरणों को चालू करने की हैं। एसकेएम में फूट के सवाल पर कहा कि कोई फूट नहीं हैं। किसान एक हैं। हरियाणा में बुजुर्गों की पैंशन काटने पर कहा कि बुजुर्गों को किसी के आगे हाथ फैलाने के लिए सरकार मजबूर न करे।
मजदूर कॉलोनी बनाना चाहती है सरकार
बेरोजगारी के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि पूरे देश को सरकार मजदूर कॉलोनी बनाना चाहती है। बिहार में किसान को अपनी खेती छोडक़र नौकरी करनी पड़ रही है। पूरे देश में यही हालत है। जिसके विरोध में आंदोलन किया जाएगा।
कैथल में हुक्का दुकान मालिक ने किसान कैंटीन में उपहार में दिया हुक्का, कहा- बीस हजार रुपये आई है लागत
किसान मजदूर कैंटीन के शुभारंभ अवसर पर राकेश टिकैत ने तीन चिल्म वाले हुक्के का शुभारंभ किया। जो मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। यह हुक्का कैथल में एक हुक्का की दुकान चलाने वाले दुकानदार ने उपहार में दिया। इस दुकानदार राजेश दलाल ने बताया कि हर व्यक्ति किसान आंदोलन में सहयोग कर रहा है। उसने भी सोचा कि वह भी सहयोग करे। इस किसान कैंटीन में यह हुक्का इसीलिए दिया है कि किसान यहां बैठकर चर्चा कर सकें। हुक्का पंच परमेश्वर के बीच पंचायत में अहम भूमिका निभाता था। इसमें आग भी होती है और पानी भी।
पंच परमेश्वर इसी आग व जल के समक्ष बड़े से बड़े विवादों का फैसला करते थे। इसी बात से प्रेरित होकर उसने यह हुक्का भिवानी से विशेष रूप से बनवाया है। इसमें ऊपर तीन चिल्म लगी हुई हैं। ये तीनों चिल्म एक साथ भी चल सकती हैं और एक-एक करके भी चल सकती हैं। इसमें नीचे का लौटा बड़ा है। इसीलिए इसमें पानी भी ज्यादा आता है। इसमें पानी डालने के लिए खोला नहीं जाता, ऊपर की नली से ही पानी डाला जाता है। उसने यह हुक्का यहां निशुल्क रूप से दिया है।
गुरनाम चढ़ूनी द्वारा गैर राजनीतिक किसान नेताओं से लखीमपुरी खीरी में मंत्री के बेटे को मिली जमानत के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि एसकेएम के वकीलों को नेट में दिक्कत के कारण कोर्ट सुन नहीं पाई। अपर कोर्ट में अपील की जाएगी। कोर्ट के फैसले पर बाहर सवाल नहीं उठ सकते। उन्होंने एक तरह से किसान नेता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे सभी का सम्मान करते हैं। जो ड्यूटी पर है, उसका भी, रिटायरमेंट के बाद वाले का भी और राज्यसभा सदस्यों का भी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसकेएम किसी का विरोध नहीं करेगा। बल्कि यह जरूर बताया जा रहा है कि यह सरकार उद्योगपतियों की है, बेरोजगारी है। जनता जहां चाहे वहां वोट दे। सरकार की ओर से केवल एक बात है कि वोट कैसे मिले?
डेरा प्रमुख को जमानत के सवाल पर उन्होंने कहा कि जनता देख रही है। वे क्यों किसी का विरोध करें। राकेश टिकैत ने कहा कि पहले चरण में यूपी में सरकार का केस निपटा दिया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यूपी के पहले चरण में भाजपा की वोट कोको ले गई।
लोग गलत फहमी में न रहें कि राजनीति से विकल्प निकलेगा, विकल्प केवल आंदोलन से निकलेगा। जो एसकेएम के लोग चुनाव लड़ रहे हैं, उनकी भी गलतफहमी चुनाव में निकल जाएगी। राकेश टिकैत ने कहा कि यूपी में जिस ट्रेक्टर पर किसान का झंडा है, उसका टोल फ्री है।
उनकी मुख्य मांगों में एमएसपी पर कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू किए जाने, दस साल पुराने बंद किए गए ईंजन सहित सभी उपकरणों को चालू करने की हैं। एसकेएम में फूट के सवाल पर कहा कि कोई फूट नहीं हैं। किसान एक हैं। हरियाणा में बुजुर्गों की पैंशन काटने पर कहा कि बुजुर्गों को किसी के आगे हाथ फैलाने के लिए सरकार मजबूर न करे।
मजदूर कॉलोनी बनाना चाहती है सरकार
बेरोजगारी के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि पूरे देश को सरकार मजदूर कॉलोनी बनाना चाहती है। बिहार में किसान को अपनी खेती छोडक़र नौकरी करनी पड़ रही है। पूरे देश में यही हालत है। जिसके विरोध में आंदोलन किया जाएगा।