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पीआर धान की खरीद को लेकर किसानों ने किया प्रदर्शन
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अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद न किए जाने से किसानों ने खरीद एजेंसी के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। भाकियू प्रदेश कोषाध्यक्ष सतपाल दिल्लोंवाली व जिला कैथल के प्रधान महेंद्र सिंह ने खरीद एजेंसी के अधिकारियों से बात की।
सतपाल दिल्लोंवाली ने कहा कि त्योहारों के समय में किसान अपनी फसल बेचने के लिए कई कई दिनों तक मंडियों में पड़े हैं । उनकी फसल की खरीद नहीं हो रही। उन्होंने बताया कि कभी नमी तो कभी सफाई की कमी बता कर उनकी ढेरियों को छोड़ दिया जाता है। हैरानी की बात तो यह है कि फसल में नमी को मापने के लिए खरीद एजेंसियों द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भेजा जाता है जबकि यह कार्य मैनेजर या समकक्ष अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाकियू के पदाधिकारियों ने सायं चार बजे मंडी में खरीद एजेंसी से बात कर खरीद को शुरू करवाया।
दिल्लोंवाली ने कहा कि कपास की पल्ली के तौल में भी किसान को प्रति पल्ली 20 रुपये का चूना लगाया जा रहा है। जिस पल्ली का 900 ग्राम वजन काटा जा रहा है उसका वजन भाकियू पदाधिकारियों ने अपने सामने करवाया तो वह केवल 650 ग्राम पाया गया। इस बारे में जब खरीद एजेंसी अधिकारी सुखदीप लोहान ने बताया कि अनाज मंडी के सीजन समाप्त होने को है। शुरू सीजन से ही इस मंडी की सबसे बड़ी समस्या झरना न लगाने की है। बिना सफाई के खरीदे गए धान को मिलर स्वीकार नहीं कर रहे। उसके बावजूद भी हैफेड लगातार किसानों की धान की फसल नियमित तौर पर खरीद रहा है।
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सतपाल दिल्लोंवाली ने कहा कि त्योहारों के समय में किसान अपनी फसल बेचने के लिए कई कई दिनों तक मंडियों में पड़े हैं । उनकी फसल की खरीद नहीं हो रही। उन्होंने बताया कि कभी नमी तो कभी सफाई की कमी बता कर उनकी ढेरियों को छोड़ दिया जाता है। हैरानी की बात तो यह है कि फसल में नमी को मापने के लिए खरीद एजेंसियों द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भेजा जाता है जबकि यह कार्य मैनेजर या समकक्ष अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाकियू के पदाधिकारियों ने सायं चार बजे मंडी में खरीद एजेंसी से बात कर खरीद को शुरू करवाया।
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दिल्लोंवाली ने कहा कि कपास की पल्ली के तौल में भी किसान को प्रति पल्ली 20 रुपये का चूना लगाया जा रहा है। जिस पल्ली का 900 ग्राम वजन काटा जा रहा है उसका वजन भाकियू पदाधिकारियों ने अपने सामने करवाया तो वह केवल 650 ग्राम पाया गया। इस बारे में जब खरीद एजेंसी अधिकारी सुखदीप लोहान ने बताया कि अनाज मंडी के सीजन समाप्त होने को है। शुरू सीजन से ही इस मंडी की सबसे बड़ी समस्या झरना न लगाने की है। बिना सफाई के खरीदे गए धान को मिलर स्वीकार नहीं कर रहे। उसके बावजूद भी हैफेड लगातार किसानों की धान की फसल नियमित तौर पर खरीद रहा है।
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