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Kaithal News: वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम आयोजित
Sat, 08 Nov 2025 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 08 Nov 2025 01:58 AM IST
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वंदे मातरम् कार्यक्रम में उपिस्थत विद्यार्थी व स्टाफ सदस्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। डीएवी कॉलेज के प्रांगण में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रभक्ति, एकता और सांस्कृतिक गौरव से सराबोर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कॉलेज के कार्यकारी प्राचार्य मेजर डॉ. राजेश तुरान मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी। इसी उपलक्ष्य में आज देशभर के 150 ऐतिहासिक स्थलों दिल्ली के नेशनल वॉर मेमोरियल से लेकर अंडमान-निकोबार की सेल्यूलर जेल तक सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह गीत केवल संगीत की रचना नहीं, बल्कि भारत की पहचान, गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सभी क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम् को अपने संघर्ष का मूल मंत्र माना और राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। यह दिवस हमारे लिए भी संकल्प का दिन है, जिसमें हमें अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाने का प्रण लेना चाहिए, तभी हम इस गीत के मूल भाव को आत्मसात कर सकेंगे। मंच संचालन इतिहास विभाग के प्राध्यापक दीपक राणा ने किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व और उसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार एवं सारगर्भित चर्चा की।
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पूंडरी। डीएवी कॉलेज के प्रांगण में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रभक्ति, एकता और सांस्कृतिक गौरव से सराबोर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कॉलेज के कार्यकारी प्राचार्य मेजर डॉ. राजेश तुरान मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी। इसी उपलक्ष्य में आज देशभर के 150 ऐतिहासिक स्थलों दिल्ली के नेशनल वॉर मेमोरियल से लेकर अंडमान-निकोबार की सेल्यूलर जेल तक सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह गीत केवल संगीत की रचना नहीं, बल्कि भारत की पहचान, गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सभी क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम् को अपने संघर्ष का मूल मंत्र माना और राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। यह दिवस हमारे लिए भी संकल्प का दिन है, जिसमें हमें अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाने का प्रण लेना चाहिए, तभी हम इस गीत के मूल भाव को आत्मसात कर सकेंगे। मंच संचालन इतिहास विभाग के प्राध्यापक दीपक राणा ने किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व और उसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार एवं सारगर्भित चर्चा की।
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