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Kaithal News: बस हादसे के बाद भी सबक नहीं ले रहे निजी स्कूल

Tue, 23 Apr 2024 04:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 23 Apr 2024 04:50 AM IST
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Private schools are not taking lessons even after the bus accident
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। निजी स्कूल बसों के हादसे के बाद भी संबंधित विभाग सबक नहीं ले रहा है। लोगों का कहना है कि हर बार हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटती है, फिर चंद दिनों तक सख्ती और कार्रवाई का दिखावा कर मामले में लीपापोती कर दी जाती है। ऐसा ही हादसा दो माह पहले कैथल के गांव नरड़ में हुआ था। जिसमें एक दो साल की बेटी बस के नीचे आने से मारी गई थी। उसके कुछ दिनों बाद बसों की पासिंग की गई, इसके बाद मामला शांत हो गया और संबंधित विभाग ने भी चुपी साध ली थी।

इसके बाद इस माह में महेंद्रगढ़ के कनीना में हुई स्कूल बस दुर्घटना में छह बच्चों की मौत हो गई और लगभग 15 बच्चे घायल हो गए थे। अब फिर विभाग सख्ती के साथ स्कूल बसों की जांच कर रहा। अब तक लगभग 110 बसों की चेकिंग हुई है, इनमें से लगभग 30 बसों में खामियां पाई गई है। यह प्रक्रिया 27 व 28 अप्रैल तक जारी रहेगी।
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इसके बाद विभाग कुछ बसों को फेल करेगा और उन पर कार्रवाई दिखाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगा। यदि सभी बसों की समय समय पर जांच होती रहे तो ऐसे हादसों से बचाव हो सकता है। लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी कार्रवाई का दिखावा कर मामले में लीपापोती कर देते हैं।
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प्राइवेट स्कूलों ने बनाए खुद के नियम ः प्राइवेट स्कूलों ने सरकार द्वारा बनाए गए ज्यादातर नियमों को अनदेखा ही किया जाता है। एनसीईआरटी की पुस्तकें लगवाने से लेकर सुरक्षित वाहन पॉलिसी अपनाने तक कदम-कदम पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती है।

यहां तक कि ज्यादातर स्कूल सरकारी अवकाश के दिन भी बच्चों को स्कूल बुलाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बने स्कूलों ने सबसे ज्यादा अवहेलना की। कनीना में हुआ स्कूल बस का हादसा भी छुट्टी के दिन स्कूल खोले जाने का प्रमाण है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल बसों पर दिए हैं ये निर्देश
बस का रंग पीला होना चाहिए, आगे और पीछे स्कूल बस अवश्य लिखा होना चाहिए। यदि किराए की बस है तो ऑन स्कूल ड्यूटी स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। बस में फस्र्ट-एड-बॉक्स अवश्य होना चाहिए। बस की खिड़कियों में क्षैतिज ग्रिल लगी होनी चाहिए। बस में अग्निशमन यंत्र अवश्य होना चाहिए। बस पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर अवश्य लिखा होना चाहिए। बस के दरवाजों पर विश्वसनीय लॉक लगे होने चाहिए। स्कूल बैग को सुरक्षित रखने के लिए सीटों के नीचे जगह होनी चाहिए। बस में स्कूल का एक अटेंडेंट होना चाहिए। कोई भी माता-पिता/अभिभावक या शिक्षक भी इन सुरक्षा मानदंडों को सुनिश्चित करने के लिए यात्रा कर सकता है। स्कूली बस के ड्राइवर के पास वाहन चलाने का हैवी लाइसेंस होना चाहिए। ड्राइवर एवं कंडक्टर की वर्दी में हों, जिन पर नाम प्लेट लगी हो एवं ड्राइविंग लाइसेंस नंबर लिखा हो।


27 व 28 अप्रैल को आरटीए कार्यालय में पासिंग करवाने के लिए सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई स्कूल बसों की पासिंग नहीं कराएगा और जिन बसों को खामियां पाई जाएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -शीशपाल, सचिव आरटीए।
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