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Kaithal News: निजी बस संचालकों ने दिखाई मनमानी
Sat, 09 Aug 2025 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 09 Aug 2025 01:38 AM IST
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12 कैथल। बस स्टैंड का दृश्य। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में 36 घंटे के लिए शुरू की गई महिलाओं की निशुल्क बस यात्रा योजना के पहले दिन शुक्रवार को कैथल के नए बस स्टैंड पर निजी बस संचालकों की मनमानी खुलकर सामने आई।
सरकारी आदेशों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के बावजूद अधिकांश निजी बसों ने न तो बस स्टैंड के काउंटर पर सूचना दी, न ही निर्धारित व्यवस्था के तहत रूटों पर संचालन किया। नतीजतन, महिलाओं को घंटों इंतजार और असुविधा का सामना करना पड़ा।
जहां रोडवेज प्रबंधन ने पहले दिन 202 बसों का संचालन कर करीब 20 हजार महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी, वहीं निजी बसों में यह सुविधा सीमित रही। 110 में से महज 50 निजी बसों का ही संचालन हो सका।
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सरकार और प्रशासन से स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई निजी बसों ने महिलाओं से टिकट के पैसे वसूले। कई रूटों पर निर्धारित समय पर बसें नहीं पहुंचीं, जिससे यात्रियों को बस स्टैंड पर लंबा इंतजार करना पड़ा।
सभी रोडवेज कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर करीब 50 कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई थी, ताकि व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके। लेकिन निजी बस ऑपरेटरों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
शुरुआत में कुछ बसें रूट पर नहीं थीं, लेकिन बाद में सभी रूटों पर संचालन बहाल कर दिया गया था। अगर किसी तरह की शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। -विरेंद्र पाली स्वामी, कैथल डिपो के यातायात प्रभारी
महिला यात्रियों की परेशानी, उन्हीं की जुबानी
निजी बस संचालकों की मनमानी सबसे अधिक देखने को मिली। लगता है कि कैथल डिपो ने कोई विशेष योजना नहीं बनाई थी। -रामरती, महिला यात्री
जींद, चीका, अंसध, पूंडरी, कुरुक्षेत्र जैसे रूटों पर बसें बेहद कम चलीं। घंटों इंतजार के बाद खिड़की से झांकते हुए खड़े-खड़े सफर करना पड़ा। -सरोज देवी
हिसार-सिरसा रूट पर अधिक ध्यान दिया गया, लेकिन स्थानीय रूटों पर बसें कम दिखीं। कई निजी बसों ने महिलाओं से किराया भी वसूला। -सुदर्शन रानी
कर्मचारी संगठन का आरोप
जागृति मंच के डिपो प्रधान संदीप खटकड़ ने आरोप लगाया कि निजी बस संचालकों ने रोडवेज कर्मियों का कोई सहयोग नहीं किया, जबकि रोडवेज स्टाफ एक दिन पहले से ही तैयारियों में जुटा था।
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कैथल। रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में 36 घंटे के लिए शुरू की गई महिलाओं की निशुल्क बस यात्रा योजना के पहले दिन शुक्रवार को कैथल के नए बस स्टैंड पर निजी बस संचालकों की मनमानी खुलकर सामने आई।
सरकारी आदेशों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के बावजूद अधिकांश निजी बसों ने न तो बस स्टैंड के काउंटर पर सूचना दी, न ही निर्धारित व्यवस्था के तहत रूटों पर संचालन किया। नतीजतन, महिलाओं को घंटों इंतजार और असुविधा का सामना करना पड़ा।
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जहां रोडवेज प्रबंधन ने पहले दिन 202 बसों का संचालन कर करीब 20 हजार महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी, वहीं निजी बसों में यह सुविधा सीमित रही। 110 में से महज 50 निजी बसों का ही संचालन हो सका।
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सरकार और प्रशासन से स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई निजी बसों ने महिलाओं से टिकट के पैसे वसूले। कई रूटों पर निर्धारित समय पर बसें नहीं पहुंचीं, जिससे यात्रियों को बस स्टैंड पर लंबा इंतजार करना पड़ा।
सभी रोडवेज कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर करीब 50 कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई थी, ताकि व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके। लेकिन निजी बस ऑपरेटरों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
शुरुआत में कुछ बसें रूट पर नहीं थीं, लेकिन बाद में सभी रूटों पर संचालन बहाल कर दिया गया था। अगर किसी तरह की शिकायत मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। -विरेंद्र पाली स्वामी, कैथल डिपो के यातायात प्रभारी
महिला यात्रियों की परेशानी, उन्हीं की जुबानी
निजी बस संचालकों की मनमानी सबसे अधिक देखने को मिली। लगता है कि कैथल डिपो ने कोई विशेष योजना नहीं बनाई थी। -रामरती, महिला यात्री
जींद, चीका, अंसध, पूंडरी, कुरुक्षेत्र जैसे रूटों पर बसें बेहद कम चलीं। घंटों इंतजार के बाद खिड़की से झांकते हुए खड़े-खड़े सफर करना पड़ा। -सरोज देवी
हिसार-सिरसा रूट पर अधिक ध्यान दिया गया, लेकिन स्थानीय रूटों पर बसें कम दिखीं। कई निजी बसों ने महिलाओं से किराया भी वसूला। -सुदर्शन रानी
कर्मचारी संगठन का आरोप
जागृति मंच के डिपो प्रधान संदीप खटकड़ ने आरोप लगाया कि निजी बस संचालकों ने रोडवेज कर्मियों का कोई सहयोग नहीं किया, जबकि रोडवेज स्टाफ एक दिन पहले से ही तैयारियों में जुटा था।

12 कैथल। बस स्टैंड का दृश्य। संवाद

12 कैथल। बस स्टैंड का दृश्य। संवाद