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अब कैदी फोन के जरिये कर सकेंगे परिजनों से बात
कैथल
Updated Sat, 29 Mar 2014 12:00 AM IST
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पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं कैथल सत्र न्यायालय के प्रशासनिक जज एनके संघी ने जिला कारागार का बंदियों के रहन-सहन एवं भोजन व्यवस्था का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि जिला कारागार में बंदियों के लिए कार्यशाला स्थापित की जाएगी तथा गंभीर रूप से बीमारियों से पीड़ित बंदियों के स्वास्थ्य जांच के लिए विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम तैनात की जाएगी।
उन्होंने बताया कि एक महिला बंदी के चार वर्षीय बच्चे के लिए आधुनिक क्रेक खोला गया है, ताकि छोटे बच्चे का समुचित विकास हो सके। माननीय न्यायाधीश ने कहा कि कारागार में बंदियों से भी बातचीत की है, इस बातचीत के दौरान उन्हें पता लगा कि किसी भी बंदी को जेल प्रशासन से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने बताया कि न्यायालय के काम का भी निरीक्षण किया गया है।
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जिसमें न्यायालय और बार के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला। साथ ही पुराने लंबित मामले कम हैं, फिर भी कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए। उन्होंने बताया कि कारागार में बंदियों से उनके परिजनों से मिलने के पैट्रन को आधुनिक बनाया जाएगा। तिहाड़ जेल की तर्ज पर एक साथ 20 बंदी अपने परिजनों से मुलाकात कर सकेंगे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु टैगोर ने बताया कि कारागार की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए समय-समय पर न्यायिक अधिकारियों द्वारा कारागार का निरीक्षण किया जाता है।
कई बार अचानक दौरा करके बंदियों के लिए बनाया गया भोजन चेक करने के साथ-साथ उनके रहन-सहन का भी जायजा लिया जाता है। जेल अधीक्षक राज कुमार शर्मा ने बताया कि बंदियों से मुलाकात करने के लिए नई कार्य विधि अपनाई जाएगी, जिसके लिए दो बड़े कक्ष जेल की दीवार के साथ ही हरियाणा पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन द्वारा निर्मित किए जा रहे हैं।
इस मुलाकात के कक्षों के बीच एक पारदर्शी शीशा लगाकर दोनों तरफ परिजन व बंदियों को आमने सामने माइक की व्यवस्था के साथ बातचीत की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बंदी को अपने परिजनों से टेलीफोन पर बातचीत की सुविधा भी शुरू की जा रही है।
इसके लिए बंदी को अपने परिजनों के दो फोन पोस्टपेड नंबर जेल प्रशासन के पास पंजीकृत करवाने होंगे। इस अवसर पर जिला उपायुक्त एन.के. सोलंकी, पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह यादव सहित जेल व न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि जिला कारागार में बंदियों के लिए कार्यशाला स्थापित की जाएगी तथा गंभीर रूप से बीमारियों से पीड़ित बंदियों के स्वास्थ्य जांच के लिए विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम तैनात की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि एक महिला बंदी के चार वर्षीय बच्चे के लिए आधुनिक क्रेक खोला गया है, ताकि छोटे बच्चे का समुचित विकास हो सके। माननीय न्यायाधीश ने कहा कि कारागार में बंदियों से भी बातचीत की है, इस बातचीत के दौरान उन्हें पता लगा कि किसी भी बंदी को जेल प्रशासन से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने बताया कि न्यायालय के काम का भी निरीक्षण किया गया है।
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जिसमें न्यायालय और बार के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला। साथ ही पुराने लंबित मामले कम हैं, फिर भी कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए। उन्होंने बताया कि कारागार में बंदियों से उनके परिजनों से मिलने के पैट्रन को आधुनिक बनाया जाएगा। तिहाड़ जेल की तर्ज पर एक साथ 20 बंदी अपने परिजनों से मुलाकात कर सकेंगे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु टैगोर ने बताया कि कारागार की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए समय-समय पर न्यायिक अधिकारियों द्वारा कारागार का निरीक्षण किया जाता है।
कई बार अचानक दौरा करके बंदियों के लिए बनाया गया भोजन चेक करने के साथ-साथ उनके रहन-सहन का भी जायजा लिया जाता है। जेल अधीक्षक राज कुमार शर्मा ने बताया कि बंदियों से मुलाकात करने के लिए नई कार्य विधि अपनाई जाएगी, जिसके लिए दो बड़े कक्ष जेल की दीवार के साथ ही हरियाणा पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन द्वारा निर्मित किए जा रहे हैं।
इस मुलाकात के कक्षों के बीच एक पारदर्शी शीशा लगाकर दोनों तरफ परिजन व बंदियों को आमने सामने माइक की व्यवस्था के साथ बातचीत की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बंदी को अपने परिजनों से टेलीफोन पर बातचीत की सुविधा भी शुरू की जा रही है।
इसके लिए बंदी को अपने परिजनों के दो फोन पोस्टपेड नंबर जेल प्रशासन के पास पंजीकृत करवाने होंगे। इस अवसर पर जिला उपायुक्त एन.के. सोलंकी, पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह यादव सहित जेल व न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे।