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Kaithal News: जिम्मेदारियों के बीच नौकरी करते-करते की तैयारी
Sun, 20 Oct 2024 03:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 20 Oct 2024 03:51 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के गांव बालू में मूलरूप से रहने वाले कुरुक्षेत्र निवासी दीपक जागलान पर उनके पिता रामफल जागलान की मृत्यु के बाद परिवार के लिए जिम्मेदारी बढ़ गई। इसके बाद भी जज्बा कम नहीं हुआ और नौकरी करते करते ही हरियाणा न्यायिक सेवा के लिए तैयारी शुरू कर दी। इसके बाद अब अब हरियाणा न्यायिक सेवा में सफलता हासिल कर ली है।
सफलता हासिल करने के बाद दीपक जागलान ने बताया कि उन्हें वर्ष 2020 में चंडीगढ़ में केंद्र सरकार के ऑडिट कार्यालय में ऑडिटर के पद पर नौकरी मिली। इसके बाद उनकी हरियाणा न्यायिक सेवा की परीक्षा के लिए तैयारी का सिलसिला शुरू हुआ। बताया कि उन्होंने इस दौरान किसी भी प्रकार की कोई कोचिंग नहीं ली।
लंच टाइम और ड्यूटी के समय खाली समय में करते थे तैयारी ः दीपक जागलान ने बताया कि वह ड्यूटी के दौरान ही समय मिलने पर अपनी तैयारी शुरू कर देते थे। बताया कि लंच टाइम के तहत करीब आधे घंटे तक का समय खाना खाने के लिए मिलता था। इस दौरान वह महज 10 मिनट में खाना खाते और तैयारी में जुट जाते थे। बताया कि उनकी तैयारी के तहत समाचार पत्रों और यूट्यूब पर परीक्षा की तैयारी के लिए पठन सामग्री से उन्हें काफी फायदा मिला है।
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उन्होंने कहा कि वैसे तो उन्होंने वर्ष 1991 में ही गांव बालू को छोड़ दिया था, लेकिन अभी भी उनके परिवार से उनके चाचा और ताऊ गांव में रहते हैं। इसलिए उनका गांव में अभी आना-जाना जरूर रहता है। कहा कि उनके पिता का गांव से काफी लगाव था। इसलिए वे गांव में होने वाले सामाजिक कार्यक्रमों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे।
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कैथल। जिले के गांव बालू में मूलरूप से रहने वाले कुरुक्षेत्र निवासी दीपक जागलान पर उनके पिता रामफल जागलान की मृत्यु के बाद परिवार के लिए जिम्मेदारी बढ़ गई। इसके बाद भी जज्बा कम नहीं हुआ और नौकरी करते करते ही हरियाणा न्यायिक सेवा के लिए तैयारी शुरू कर दी। इसके बाद अब अब हरियाणा न्यायिक सेवा में सफलता हासिल कर ली है।
सफलता हासिल करने के बाद दीपक जागलान ने बताया कि उन्हें वर्ष 2020 में चंडीगढ़ में केंद्र सरकार के ऑडिट कार्यालय में ऑडिटर के पद पर नौकरी मिली। इसके बाद उनकी हरियाणा न्यायिक सेवा की परीक्षा के लिए तैयारी का सिलसिला शुरू हुआ। बताया कि उन्होंने इस दौरान किसी भी प्रकार की कोई कोचिंग नहीं ली।
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लंच टाइम और ड्यूटी के समय खाली समय में करते थे तैयारी ः दीपक जागलान ने बताया कि वह ड्यूटी के दौरान ही समय मिलने पर अपनी तैयारी शुरू कर देते थे। बताया कि लंच टाइम के तहत करीब आधे घंटे तक का समय खाना खाने के लिए मिलता था। इस दौरान वह महज 10 मिनट में खाना खाते और तैयारी में जुट जाते थे। बताया कि उनकी तैयारी के तहत समाचार पत्रों और यूट्यूब पर परीक्षा की तैयारी के लिए पठन सामग्री से उन्हें काफी फायदा मिला है।
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उन्होंने कहा कि वैसे तो उन्होंने वर्ष 1991 में ही गांव बालू को छोड़ दिया था, लेकिन अभी भी उनके परिवार से उनके चाचा और ताऊ गांव में रहते हैं। इसलिए उनका गांव में अभी आना-जाना जरूर रहता है। कहा कि उनके पिता का गांव से काफी लगाव था। इसलिए वे गांव में होने वाले सामाजिक कार्यक्रमों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे।