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घर जाने की आस में बीता आधा महीना, नहीं हो रहा मजदूरों को घर भेजने का प्रबंध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2020 11:30 PM IST
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Pravasi mazdoor said eye seing dream for going to home
कैथल। प्रवासी मजदूरों की आंखें आधे महीने से घर जाने का सपना देख रही है, पर प्रशासन है कि उन्हें घर भेजने की कोई व्यवस्था नहीं कर रहा है। जिले में रह रहे प्रवासी मजदूरों को रजिस्ट्रेशन करवाए 15 दिन से ज्यादा हो गए हैं। वे अब भी अपने घर जाने के लिए सरकारी आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि मजदूरों ने दो दिन पहले पैदल अपने प्रदेशों में जाने का भी मन बनाया था, लेकिन प्रशासन द्वारा हर प्रकार की सहायता का आश्वासन देकर उन्हें रोक लिया गया। मजदूरों को वापस जिले में उन्हीं स्थानों पर भेज दिया गया, जहां वे रह रहे हैं।
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अपने घर जाने के लिए प्रशासन से अनुमति लेने हेतु लघु सचिवालय पहुंचे मजदूर झारखंड निवासी मजदूर अशोक, रामेश्वर, परमानंद व बिहार से पहुंचे मजदूर कृष्णा, नंदन, कालेराम, रामकिशन, बृजेश व साब्बी ने बताया कि वे हुडा के विभिन्न सेक्टरों में रह रहे हैं। यहां रहना उनके लिए हर दिन मुश्किल हो रहा है। परिवार से मिले भी कई-कई महीने बीत चुके हैं। उन्होंने अपने घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन भी करवाया है, लेकिन अब तक उन्हें भेजने की व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने मांग की कि या तो प्रशासन उन्हें भेजने की व्यवस्था करे, नहीं तो मजबूर उन्हें पैदल ही रवाना होना पड़ेगा।
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एसडीएम कमलप्रीत कौर ने कहा कि बिहार के मजदूरों को भेजने के संबंध में विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को हर संभव सहायता के लिए भी प्रशासन लगातार प्रयासरत है।
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मजदूर बोले- स्थिति सामान्य हुई तो वापस आने बारे करेंगे विचार
सीवन। प्रवासी मजदूरों को काम मिलने के बाद भी उनका अपने घरों को लौटने का सिलसिला जारी है। तुर्की सराय मुजफरापुर बिहार के सिकेंद्र कुमार व सरोज कुमार ने बताया कि वे यहां मजदूरी करते है। लॉक डाउन में लंबे समय से फंसे होने के कारण अब वे घर जाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वे बिहार मोटरसाइकिल पर जाएंगे। अगर सब ठीक हो जाता है तो काम के लिए वापस आ सकते हैं। फिलहाल वे अपने परिवार के पास अपने गांव में जाना चाहते हैं।
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