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घर जाने के लिए सरकारी सहायता की बाट जो रहे मजदूरों के सब्र का बांध टूटा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2020 10:24 PM IST
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Pravasi majdoor said tired but not loss
कैथल। विभिन्न प्रदेशों में अपने घर जाने के लिए सरकारी सहायता की बाट जो रहे मजदूरों के सब्र का बांध टूटने लगा है। जिले में विभिन्न स्थानों पर रह रहे प्रवासी मजदूरों को जब कई दिन इंतजार करने के बाद भी घर जाने के लिए किसी साधन की प्रबंध होता नहीं दिखा तो मजदूर पैदल कूच करने को तैयार हो गए। मंगलवार को दर्जनों की संख्या में मजदूर अपने घर पैदल जाने के लिए बस स्टैंड पर पहुंच गए। मजदूरों के पैदल जाने की पाकर जिला प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह, कानूनगो धर्मवीर सिंह, नगर परिषद के सीएसआई मोहन भारद्वाज और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मजदूरों को समझा-बुझाकर वापस उनके निवास स्थान पर भेजा। इससे मजदूर बस स्टैंड से फिर वापस आ गए।
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सैकड़ों किलोमीटर का सफर पैदल ही पूरा करेंगे
बस स्टैंड पर पहुंचे लुधियाना से आए मजदूरों ने कहा कि सैकड़ों किलोमीटर का सफर दो पैरों से ही पूरा करना है। साथ में पीठ पर लदे 20 किलो के बैग में कपड़े व बर्तन लिए निकले हैं। अब वापस शहर में नहीं आएंगे। अपने प्रदेश में ही काम-धाम कर गुजारा करेंगे। लुधियाना से बिहार जा रहे शिवराज, विजय, अजय, दलीप, व अखिलेश ने बताया कि वे करीब छह माह पहले ही उसके चाचा के साथ लुधियाना काम करने के लिए आए थे। लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गए। अब उनके पास किराए तक के पैसे नहीं हैं। न ही उन्हें तकनीक का ज्ञान है, जिससे ये लोग ऑनलाइन पंजीकरण कर सकें। पैदल चल रहे ये लोग अंदर से थके-हारे दिखाई दिए।
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दस दिन पहले कराया था रजिस्ट्रेशन
कैथल से बिहार और यूपी जाने के लिए बस स्टैंड पर पहुंचे मजदूरों ने बताया कि वे पिछले करीब एक साल से कैथल में लेबर का काम कर रहे हैं। लॉकडाउन होने से काम बंद हो गया है। जो पैसा पास में था वह महीने भर में खत्म हो गया। घर जाने के लिए करीब 10 दिन पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया थ, लेकिन अब तक उन्हें घर नहीं भेजा गया है। घर का सामान साथ न ले जा पाने के कारण उसे पड़ोसियों को बेच दिया है ताकि परिवार के लिए कुछ पैसा ले जा सकें। अब वे इसे खर्च नहीं करना चाहते, इसलिए पैदल सफर करने को तैयार हुए हैं। मजदूर मुलेशर, जयचंद, श्रीराम, राजीव, अनुराग, राहुल, अंकित, दलीप, नितीश, रामचंद्र, शिवकुमार, कृष्ण व मुकेश ने बताया कि अधिकारियों से लेकर सत्तापक्ष के नेताओं तक को गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं राहत के आसार नजर नहीं आए। ऐसे में उन्होंने पैदल जाने का मन बनाया है।
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मजदूरों के संपर्क नंबर लिये
नायब तहसीलदार ईश्वर सिंह व कानूनगो धर्मबीर ने कहा कि मजदूर कैथल में जहां पर रह रहे थे, वहां पर वापस चले जाएं। प्रशासन द्वारा उनका पूरा सहयोग किया जाएगा। उनके खाने पीने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से करवाई जाएगी। सभी मजदूरों को सोशल डिस्टेंस रखने व मास्क लगाने के लिए बताया गया। साथ ही नप के एसआई मोहन भारद्वाज ने सभी मजदूरों के संपर्क नंबर लिए ताकि उनको भोजन पहुंचाने में कोई समस्या न आए।

बस परिचालक ने बांटे केले
रोडवेज बस के परिचालक सुशील कुमार ने प्रवासी मजदूरों की दयनीय हालात देखकर उन्हें केले व अन्य फल वितरित किए। साथ ही उनको कैथल में ही रहने की हिदायत दी ताकि सामान्य हालात होने पर प्रशासन की सहायता से उन्हें उनके परिवार तक पहुंचाया जा सके।
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