{"_id":"5fa837b78ebc3e9bbd5f5f2c","slug":"pollution-kaithal-news-knl50267095","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक सप्ताह में 358 से बढ़कर 436 हुआ औसतन एक्यूआई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक सप्ताह में 358 से बढ़कर 436 हुआ औसतन एक्यूआई
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जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। पिछले एक सप्ताह में एक्यूआई के अधिकतम 2.5 धूलकण 446 से बढ़कर 500 तक पहुंच गए हैं। वहीं एक्यूआई की औसत भी 358 से 436 हो गई है। ऐसे में जिले में स्मॉग का प्रकोप और ज्यादा विकराल रूप धारण कर रहा है। दिन में तो फिर भी लोगों को थोड़ी सी राहत है, लेकिन शाम होते-होते एक्यूआई 500 तक पहुंचने लगा है। समय से पहले स्मॉग के कारण सड़कोें पर अंधेरा छा जाता है। आंखों में जलन और सांस से संबंधित बीमारियों के लिए प्रदूषित वातावरण और भी नुकसानदायक साबित हो रहा है।
हर जगह ताक पर नियम :
हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नगर पालिकाओं और संबंधित विभागों को इस संबंध में नोटिस भी जारी किए गए हैं कि वे अपने अधिकार क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर निगरानी रखें। इसके बावजूद न तो कूड़े में और न ही फसल अवशेषों में आग लगाने का सिलसिला रुक रहा है। जो निर्माणाधीन मार्ग हैं, उन पर भी न तो बार बार मिट्टी पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही मैटीरियल को ढककर रखा जाता है। वहीं खेतों में भी मनाही के बावजूद फसल अवशेषों को धड़ल्ले से आग के हवाले किया जा रहा है।
रविवार शाम को 500 रहा जिले में अधिकतम एक्यूआई
रविवार को शाम के समय जिले में अधिकतम एक्यूआई 500 व न्यूनतम 286 रहा। वहीं इसकी औसत 436 रही। पिछले सप्ताह एक्यूआई अधिकतम 446 व न्यूनतम 125 दर्ज किया गया था। इसके बाद लगातार एक्यूआई में बढ़ोतरी हो रहा है।
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25 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई
जिले में खेतों में धान के अवशेष जलाने के अब तक 559 मामले सामने आ चुके हैं, जो वायुको प्रदूषित करने में बड़ा कारण साबित हो रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने फसल अवशेष जलाने वाले 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई है। वहीं अवशेष जलाने वालों से अब तक 14 लाख 49 हजार 500 रुपये जुर्माना वसूला जा चुका है। इसके बावजूद अवशेषों में आग लगाई जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ विकास हुड्डा ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए नगर पालिकाओं को निगरानी के लिए नोटिस दिए गए हैं। जल्द ही लोक निर्माण विभाग को भी इस बारे में पत्र लिखा जाएगा कि निर्माणाधीन सड़कों पर धूल को रोकने की दिशा में कदम उठाए जाएं। सड़कों पर पानी का छिड़काव करें व मैटीरियल को ढककर रखें।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने कहा कि विभाग द्वारा फसल अवशेष जलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान फसल अवशेष जलाने की बजाय उनका प्रबंधन करें। इसके जरिये किसान अतिरिक्त आमदनी भी कमा सकते हैं।
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हर जगह ताक पर नियम :
हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नगर पालिकाओं और संबंधित विभागों को इस संबंध में नोटिस भी जारी किए गए हैं कि वे अपने अधिकार क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर निगरानी रखें। इसके बावजूद न तो कूड़े में और न ही फसल अवशेषों में आग लगाने का सिलसिला रुक रहा है। जो निर्माणाधीन मार्ग हैं, उन पर भी न तो बार बार मिट्टी पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही मैटीरियल को ढककर रखा जाता है। वहीं खेतों में भी मनाही के बावजूद फसल अवशेषों को धड़ल्ले से आग के हवाले किया जा रहा है।
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रविवार शाम को 500 रहा जिले में अधिकतम एक्यूआई
रविवार को शाम के समय जिले में अधिकतम एक्यूआई 500 व न्यूनतम 286 रहा। वहीं इसकी औसत 436 रही। पिछले सप्ताह एक्यूआई अधिकतम 446 व न्यूनतम 125 दर्ज किया गया था। इसके बाद लगातार एक्यूआई में बढ़ोतरी हो रहा है।
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25 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई
जिले में खेतों में धान के अवशेष जलाने के अब तक 559 मामले सामने आ चुके हैं, जो वायुको प्रदूषित करने में बड़ा कारण साबित हो रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने फसल अवशेष जलाने वाले 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई है। वहीं अवशेष जलाने वालों से अब तक 14 लाख 49 हजार 500 रुपये जुर्माना वसूला जा चुका है। इसके बावजूद अवशेषों में आग लगाई जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ विकास हुड्डा ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए नगर पालिकाओं को निगरानी के लिए नोटिस दिए गए हैं। जल्द ही लोक निर्माण विभाग को भी इस बारे में पत्र लिखा जाएगा कि निर्माणाधीन सड़कों पर धूल को रोकने की दिशा में कदम उठाए जाएं। सड़कों पर पानी का छिड़काव करें व मैटीरियल को ढककर रखें।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने कहा कि विभाग द्वारा फसल अवशेष जलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान फसल अवशेष जलाने की बजाय उनका प्रबंधन करें। इसके जरिये किसान अतिरिक्त आमदनी भी कमा सकते हैं।