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महज ऋण लेने वाले किसानों के भरोसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
ब्यूरो कैथल
Updated Tue, 10 Jan 2017 12:10 AM IST
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डीडीए कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को महज ऋण लेने वाले किसानों के भरोसे जबरदस्ती सफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। योजना की जिले में स्थिति यह है कि बिना ऋण लेने वाले महज 5 किसानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया है। जबकि मंगलवार को इस योजना के तहत बीमा करवाने की अंतिम तिथि है। जिससे स्पष्ट होता है कि किसान इस योजना में कितनी रुचि ले रहे हैं। वहीं बीमा करने वाली कंपनी का कोई कार्यालय नहीं है। जिस कारण किसानों को योजना की पूरी जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। बता दें कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सरकार द्वारा किसानों की फसल का किसी भी आपदा के समय नुकसान की भरपाई के लिए बीमा किया जा रहा है।
डीडीए व एसडीओ कार्यालय का दिया जा रहा है पता
अमर उजाला ने सोमवार सुबह किसान द्वारा फसल बीमा किए जाने की जानकारी लेनी चाही। सबसे पहले डीडीए कार्यालय में जाकर पता किया तो वहां से जानकारी मिली कि यहां बीमा करने वाली कंपनी का अधिकारी नहीं बैठता। वह एसडीओ कार्यालय में बैठता है। डीडीए कार्यालय से एक नंबर मिला। उस टेलीफोन नंबर पर संपर्क करने पर युवक ने कहा कि वह एसडीओ कार्यालय में है। जहां पहुंच कर युवक ने खुद का नाम नरेंद्र बताया और कहा कि जमीन की फर्द, आधार कार्ड, पहचान पत्र व बैंक खाते की प्रति लेकर आइए। इसके बाद आपको फॉर्म दिया जाएगा। जिसे भरकर बैंक में संबंधित फसल के लिए नकदी का डीडी बनवाकर बैंक में जमा करवाना होगा। बैंक से ही आपके कागज ले लिए जाएंगे। पूछने पर युवक ने कहा कि डीडीए कार्यालय में जगह नहीं है, वे यहां एसडीओ कार्यालय में बैठते हैं। कंपनी का अपना कोई कार्यालय नहीं है।
इतनी लंबी प्रक्रिया, भटकने के बाद कौन करवाएगा बीमा?
ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार हर व्यक्ति को ऑनलाइन सेवाओं की ओर ला रही है तो कितने किसान इतनी लंबी प्रक्रिया से गुजरकर कैसे अपनी फसल का बीमा करवाएंगे। वहीं कंपनी द्वारा कोई कार्यालय नहीं खोला गया। यदि किसानों को एक ही जगह पर बीमा संबंधी सारी सुविधाएं मिले तो शायद कुछ ज्यादा किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
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ऋण लेने वाले किसानों के खाते से काटी जा रही है बीमा प्रीमियम की राशि
योजना के तहत सरकार ने ऋण लेने वाले बैंकों के लिए बीमा किश्त जमा करवाना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए किसान को कुछ नहीं करना। किसान के खाते से निर्धारित राशि कटकर सीधी बीमा करने वाली कंपनी के कार्यालय में चली जाएगी। इस तरह से जिले में करीब 45 हजार ऋण लेने वाले किसानों की फसल का बीमा हो रहा है।
बिना ऋण लेने वाले महज 5 किसानों ने करवाया बीमा
सरकार द्वारा लागू की गई योजना का धरातल पर कितना असर है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा रहा है कि अपनी इच्छा से अभी तक महज 5 ऐसे किसानों ने फसल बीमा करवाया है, जिन्होंने किसी बैंक से ऋण नहीं लिया है। वहीं बीमा करने वाली कंपनी के कर्मचारी नरेंद्र ने कहा कि जो किसान बैंकों में आवेदन करते हैं, वे उनके बैंकों से फॉर्म ले आते हैं। वे एसडीओ कार्यालय में बैठते हैं। अभी तक बिना ऋण लेने वाले 5 किसानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया है।
उधर, एलडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 45 हजार से अधिक किसान हैं, जिन्होंने विभिन्न बैंकों से ऋण लिया हुआ है। इन किसानों की फसल का बीमा अनिवार्य किया गया है। बैंक उनके खातों से प्रीमियम की राशि काटकर संबंधित कंपनी को भेज देगी। बीमा के लिए 10 जनवरी अंतिम तारीख है।
सरकार ने बीमा करवाने के लिए निर्देश जारी किए हैं कि कंपनी कर्मचारी को जगह उपलब्ध करवानी है। उसे एसडीओ कार्यालय में जगह दी गई है। इसके अलावा सभी ब्लॉकों में जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को योजना का लाभ उठाने का आह्वान किया गया है। जिस भी किसान को बीमा करवाना है, वह जानकारी लेकर 10 जनवरी को बीमा करवा सकता है।
डा. महावीर सिंह, उप-निदेशक, कृषि एवं कल्याण विभाग, कैथल।
ये है बीमा योजना के तहत प्रीमियम की राशि
गेहूं की फसल के लिए किसान को 275.99 रुपये प्रति एकड़
जौ के लिए 151.75 रुपये
सरसों के लिए 166.93 रुपये
चना के लिए 151.75
शेष प्रीमियम की राशि सरकार द्वारा दी जाएगी।
इस तरह होगी नुकसान की भरपाई
गेहूं के लिए प्रति एकड़ 22 हजार
जौ के लिए प्रति एकड़ 10 हजार
सरसों के प्रति एकड़ 11 हजार रुपये
चना की फसल का प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की बीमा राशि दी जाएगी।
इन स्थितियों में दिया जाएगा बीमा
जल भराव, ओलावृष्टि व भूस्खलन के कारण नुकसान होने पर खेत स्तर पर मुआवजा दिया जाएगा। कटाई के 14 दिनों तक चक्रवात एवं चक्रवाती वर्षा तथा बे-मौसमी वर्षा से हुए नुकसान का भी खेत स्तर पर मुआवजा प्रदान किया जाएगा। कम वर्षा अथवा विपरीत मौसम के कारण फसल न बोई जाने पर भी मुआवजा राशि दी जाएगी।
इस बात का भी ख्याल रखें
अगर किसी किसान के द्वारा कोई दूसरी फसल बोई जाती है या भूमि का रकबा भिन्न है, तो उसकी सूचना तुरंत बैंक को दें, ताकि सही फसल अथवा भूमि का प्रीमियम लिया जा सके। गैर ऋणी किसान फसल बीमा करवाने के लिए बैंक शाखा अथवा रिलायंस जनरल बीमा कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधि से संपर्क कर सकते हैं। जिले में कंपनी के प्रतिनिधि बलविंद्र के मोबाइल नंबर 85578-92800 और नरेंद्र अहलावत के नंबर 94676-85687 पर संपर्क किया जा सकता है। बीमा कंपनी द्वारा जिले में फसल बीमा के लिए स्थानीय जिला परिषद कार्यालय में स्थित उपमंडल कृषि अधिकारी कार्यालय में नरेंद्र अहलावत को कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर तैनात किया गया है।
किसान को और कर्जदार बनाया जा रहा
किसान यूनियन के नेता जिया लाल ने कहा कि फसल बीमा योजना किसानों से कंपनी के लिए करोड़ों रुपये एकत्रित करने के सिवाए कुछ नहीं है। जिन किसानों को पहले ही कर्ज देना है। उन्हें और कर्जदार किया जा रहा है। किसी किसान ने अपनी फसल का अपने आप बीमा नहीं करवाया। यह पॉलिसी ही गलत है। कंपनी ने कोई कार्यालय खोल रखा। किसानों को कोई जानकारी नहीं दी जाती कि किस तरह से उन्हें बीमा मिलेगा। कंपनियों को मालामाल किया जा रहा है। सरकार को चाहिए कि खुद प्रीमियम राशि जमा करवाए।
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डीडीए व एसडीओ कार्यालय का दिया जा रहा है पता
अमर उजाला ने सोमवार सुबह किसान द्वारा फसल बीमा किए जाने की जानकारी लेनी चाही। सबसे पहले डीडीए कार्यालय में जाकर पता किया तो वहां से जानकारी मिली कि यहां बीमा करने वाली कंपनी का अधिकारी नहीं बैठता। वह एसडीओ कार्यालय में बैठता है। डीडीए कार्यालय से एक नंबर मिला। उस टेलीफोन नंबर पर संपर्क करने पर युवक ने कहा कि वह एसडीओ कार्यालय में है। जहां पहुंच कर युवक ने खुद का नाम नरेंद्र बताया और कहा कि जमीन की फर्द, आधार कार्ड, पहचान पत्र व बैंक खाते की प्रति लेकर आइए। इसके बाद आपको फॉर्म दिया जाएगा। जिसे भरकर बैंक में संबंधित फसल के लिए नकदी का डीडी बनवाकर बैंक में जमा करवाना होगा। बैंक से ही आपके कागज ले लिए जाएंगे। पूछने पर युवक ने कहा कि डीडीए कार्यालय में जगह नहीं है, वे यहां एसडीओ कार्यालय में बैठते हैं। कंपनी का अपना कोई कार्यालय नहीं है।
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इतनी लंबी प्रक्रिया, भटकने के बाद कौन करवाएगा बीमा?
ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार हर व्यक्ति को ऑनलाइन सेवाओं की ओर ला रही है तो कितने किसान इतनी लंबी प्रक्रिया से गुजरकर कैसे अपनी फसल का बीमा करवाएंगे। वहीं कंपनी द्वारा कोई कार्यालय नहीं खोला गया। यदि किसानों को एक ही जगह पर बीमा संबंधी सारी सुविधाएं मिले तो शायद कुछ ज्यादा किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
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ऋण लेने वाले किसानों के खाते से काटी जा रही है बीमा प्रीमियम की राशि
योजना के तहत सरकार ने ऋण लेने वाले बैंकों के लिए बीमा किश्त जमा करवाना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए किसान को कुछ नहीं करना। किसान के खाते से निर्धारित राशि कटकर सीधी बीमा करने वाली कंपनी के कार्यालय में चली जाएगी। इस तरह से जिले में करीब 45 हजार ऋण लेने वाले किसानों की फसल का बीमा हो रहा है।
बिना ऋण लेने वाले महज 5 किसानों ने करवाया बीमा
सरकार द्वारा लागू की गई योजना का धरातल पर कितना असर है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा रहा है कि अपनी इच्छा से अभी तक महज 5 ऐसे किसानों ने फसल बीमा करवाया है, जिन्होंने किसी बैंक से ऋण नहीं लिया है। वहीं बीमा करने वाली कंपनी के कर्मचारी नरेंद्र ने कहा कि जो किसान बैंकों में आवेदन करते हैं, वे उनके बैंकों से फॉर्म ले आते हैं। वे एसडीओ कार्यालय में बैठते हैं। अभी तक बिना ऋण लेने वाले 5 किसानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया है।
उधर, एलडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 45 हजार से अधिक किसान हैं, जिन्होंने विभिन्न बैंकों से ऋण लिया हुआ है। इन किसानों की फसल का बीमा अनिवार्य किया गया है। बैंक उनके खातों से प्रीमियम की राशि काटकर संबंधित कंपनी को भेज देगी। बीमा के लिए 10 जनवरी अंतिम तारीख है।
सरकार ने बीमा करवाने के लिए निर्देश जारी किए हैं कि कंपनी कर्मचारी को जगह उपलब्ध करवानी है। उसे एसडीओ कार्यालय में जगह दी गई है। इसके अलावा सभी ब्लॉकों में जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को योजना का लाभ उठाने का आह्वान किया गया है। जिस भी किसान को बीमा करवाना है, वह जानकारी लेकर 10 जनवरी को बीमा करवा सकता है।
डा. महावीर सिंह, उप-निदेशक, कृषि एवं कल्याण विभाग, कैथल।
ये है बीमा योजना के तहत प्रीमियम की राशि
गेहूं की फसल के लिए किसान को 275.99 रुपये प्रति एकड़
जौ के लिए 151.75 रुपये
सरसों के लिए 166.93 रुपये
चना के लिए 151.75
शेष प्रीमियम की राशि सरकार द्वारा दी जाएगी।
इस तरह होगी नुकसान की भरपाई
गेहूं के लिए प्रति एकड़ 22 हजार
जौ के लिए प्रति एकड़ 10 हजार
सरसों के प्रति एकड़ 11 हजार रुपये
चना की फसल का प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की बीमा राशि दी जाएगी।
इन स्थितियों में दिया जाएगा बीमा
जल भराव, ओलावृष्टि व भूस्खलन के कारण नुकसान होने पर खेत स्तर पर मुआवजा दिया जाएगा। कटाई के 14 दिनों तक चक्रवात एवं चक्रवाती वर्षा तथा बे-मौसमी वर्षा से हुए नुकसान का भी खेत स्तर पर मुआवजा प्रदान किया जाएगा। कम वर्षा अथवा विपरीत मौसम के कारण फसल न बोई जाने पर भी मुआवजा राशि दी जाएगी।
इस बात का भी ख्याल रखें
अगर किसी किसान के द्वारा कोई दूसरी फसल बोई जाती है या भूमि का रकबा भिन्न है, तो उसकी सूचना तुरंत बैंक को दें, ताकि सही फसल अथवा भूमि का प्रीमियम लिया जा सके। गैर ऋणी किसान फसल बीमा करवाने के लिए बैंक शाखा अथवा रिलायंस जनरल बीमा कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधि से संपर्क कर सकते हैं। जिले में कंपनी के प्रतिनिधि बलविंद्र के मोबाइल नंबर 85578-92800 और नरेंद्र अहलावत के नंबर 94676-85687 पर संपर्क किया जा सकता है। बीमा कंपनी द्वारा जिले में फसल बीमा के लिए स्थानीय जिला परिषद कार्यालय में स्थित उपमंडल कृषि अधिकारी कार्यालय में नरेंद्र अहलावत को कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर तैनात किया गया है।
किसान को और कर्जदार बनाया जा रहा
किसान यूनियन के नेता जिया लाल ने कहा कि फसल बीमा योजना किसानों से कंपनी के लिए करोड़ों रुपये एकत्रित करने के सिवाए कुछ नहीं है। जिन किसानों को पहले ही कर्ज देना है। उन्हें और कर्जदार किया जा रहा है। किसी किसान ने अपनी फसल का अपने आप बीमा नहीं करवाया। यह पॉलिसी ही गलत है। कंपनी ने कोई कार्यालय खोल रखा। किसानों को कोई जानकारी नहीं दी जाती कि किस तरह से उन्हें बीमा मिलेगा। कंपनियों को मालामाल किया जा रहा है। सरकार को चाहिए कि खुद प्रीमियम राशि जमा करवाए।