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Kaithal News: आठ एकड़ के खेल स्टेडियम में मच्छरों से जूझ रहे खिलाड़ी
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क्योड़क के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में खस्ताहाल में खेल उपकरण। संवाद
कैथल। करीब 30 हजार की आबादी वाले गांव क्योड़क का राजीव गांधी खेल स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए वरदान बनने के बजाय समस्याओं का केंद्र बनता जा रहा है। लगभग 15 वर्ष पहले बने इस 8 एकड़ में फैले स्टेडियम में मूलभूत सुविधाओं की कमी से खिलाड़ी परेशान हैं। मैदान में उगी घास और मच्छरों का प्रकोप खिलाड़ियों के लिए नई मुसीबत बन गया है।
खेल स्टेडियम में अव्यवस्थाओं के युवाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मैदान की हालत देख कर युवा अभ्यास करने नहीं आते। वे सड़कों पर दौड़ लगाने को बाध्य हैं। खेल विभाग के साथ ही ग्राम पंचायत की तरफ से भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इतने बड़े गांव के मैदान में असुविधाओं का अभाव सिस्टम को आइना दिखाने के लिए काफी है। संदीप ने बताया कि हैंडबॉल मैदान में खिलाड़ियों ने स्वयं चंदा एकत्र कर स्ट्रीट लाइटें लगवाई हैं।
नहीं हो रही मैदान की नियमित देखरेख
साहब सिंह का कहना है कि मैदान की नियमित देखरेख नहीं होने से खेल का माहौल प्रभावित हो रहा है। खिलाड़ियों को खुद छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
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खिलाड़ियों को समय पर नहीं मिलती खेल सामग्री
राजेंद्र ने बताया कि स्टेडियम में खेल सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं करवाई जाती। कुश्ती के लिए स्थायी कोच की व्यवस्था होनी चाहिए। खिलाड़ियों और स्थानीय खेल प्रेमियों को कई व्यवस्थाएं अपने खर्च पर करनी पड़ रही हैं।
खेल उपकरणों की कमी से हो रही परेशानी
वीरभान शर्मा ने बताया कि खेल उपकरणों की कमी के कारण प्रशिक्षण प्रभावित होता है। युवाओं को अभ्यास के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं होते तो परेशानी होना लाजिमी है।
घास और मच्छरों के कारण अभ्यास करना मुश्किल
उत्तम ने बताया कि शाम के समय घास और मच्छरों के कारण अभ्यास करना मुश्किल हो जाता है। कई बार मच्छर काट लेते हैं और खिलाड़ियोंं का ध्यान खेल से भटक जाता है। सुविधाओं की तरफ ध्यान दिया जाना चाहिए।
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खेल स्टेडियम में अव्यवस्थाओं के युवाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मैदान की हालत देख कर युवा अभ्यास करने नहीं आते। वे सड़कों पर दौड़ लगाने को बाध्य हैं। खेल विभाग के साथ ही ग्राम पंचायत की तरफ से भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इतने बड़े गांव के मैदान में असुविधाओं का अभाव सिस्टम को आइना दिखाने के लिए काफी है। संदीप ने बताया कि हैंडबॉल मैदान में खिलाड़ियों ने स्वयं चंदा एकत्र कर स्ट्रीट लाइटें लगवाई हैं।
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नहीं हो रही मैदान की नियमित देखरेख
साहब सिंह का कहना है कि मैदान की नियमित देखरेख नहीं होने से खेल का माहौल प्रभावित हो रहा है। खिलाड़ियों को खुद छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
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खिलाड़ियों को समय पर नहीं मिलती खेल सामग्री
राजेंद्र ने बताया कि स्टेडियम में खेल सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं करवाई जाती। कुश्ती के लिए स्थायी कोच की व्यवस्था होनी चाहिए। खिलाड़ियों और स्थानीय खेल प्रेमियों को कई व्यवस्थाएं अपने खर्च पर करनी पड़ रही हैं।
खेल उपकरणों की कमी से हो रही परेशानी
वीरभान शर्मा ने बताया कि खेल उपकरणों की कमी के कारण प्रशिक्षण प्रभावित होता है। युवाओं को अभ्यास के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं होते तो परेशानी होना लाजिमी है।
घास और मच्छरों के कारण अभ्यास करना मुश्किल
उत्तम ने बताया कि शाम के समय घास और मच्छरों के कारण अभ्यास करना मुश्किल हो जाता है। कई बार मच्छर काट लेते हैं और खिलाड़ियोंं का ध्यान खेल से भटक जाता है। सुविधाओं की तरफ ध्यान दिया जाना चाहिए।

क्योड़क के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में खस्ताहाल में खेल उपकरण। संवाद

क्योड़क के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में खस्ताहाल में खेल उपकरण। संवाद

क्योड़क के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में खस्ताहाल में खेल उपकरण। संवाद

क्योड़क के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में खस्ताहाल में खेल उपकरण। संवाद

क्योड़क के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में खस्ताहाल में खेल उपकरण। संवाद

क्योड़क के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में खस्ताहाल में खेल उपकरण। संवाद