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सरपंचों के आश्वासन पर बदला चुनाव बहिष्कार का फैसला

Wed, 09 Apr 2014 11:46 PM IST
कैथल
कैथल Updated Wed, 09 Apr 2014 11:46 PM IST
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People decided not to bycottt Loksabha Poll
पाई।  गांव काकौत और सौंगल वासियों ने कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के लिए आज होने वाली वोटिंग का बहिष्कार करने का फैसला किया है। जहां गांव सौंगल के वासी स्कूली बच्चों के खातों में जमा होने स्टाइपेंड में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं। वहीं गांव काकौत के लोग उन्हें कलायत तहसील में डालने का विरोध कर रहे हैं। इसी वजह से दोनों के  गांवों के लोगों ने चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया था, लेकिन सरपंचों के आश्वासन के बाद लोगों ने अपना फैसला वापस ले लिया है।
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ये है गांव सौंगल का मामला
सौंगल गांव में खुले स्कूल में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति और  बीपीएल परिवारों का आरोप है उनके बच्चों के खातमों में बीते तीन साल से स्टाइपेंड की राशि जमा नहीं करवाई गई है। इसलिए नाराज परिवारों ने चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों के पैसे स्कूल के अध्यापकों व बैंक के कर्मचारियों द्वारा हड़प लिए हैं और जब तक पैसे नहीं मिलते वे चुनाव नहीं होने देंगे और बूथ को भी खुलने नहीं देंगे। वोट डलवाने के लिए आए कर्मचारियों को भगा दिया जाएगा।
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इस पर सरपंच कृष्ण बांगड इन ग्रामीणों के बीच में आए और ग्रामीणों को समझाया कि चुनाव से इस फंड का कुछ लेना देना नहीं है। स्कूल के अध्यापक व बैंक के कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगी हुई है चुनाव के बाद वे जिला प्रशासन को इस सारे मामले की छानबीन कराने के बारे में अवगत करवाएंगे ।
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ये है गांव काकौत का मामला
काकौत गांव में भी ग्रामीणों ने भी लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया था, परन्तु गांव की सरपंच अनीता गुर्जर ने यहां भी ग्रामीणों को समझा बुझा कर मना लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके गांव की तहसील कलायत पड़ती है, जो उनसे बहुत अधिक दूर है।

ग्रामीणों ने बताया कि उनकी तहसील पहले पूंडरी व कैथल हुआ करती थी, परंतु जब से परिसीमन आयोग द्वारा पाई विधानसभा क्षेत्र को खत्म किया और कलायत को तहसील का दर्जा दिया गय था, उसी दौरान उनके गांव को उसमें शामिल कर लिया गया। इससे उन्हें दिक्कत आती है। तहसील में कार्य करवाने के लिए ग्रामीणों को पहले कैथल जाना पड़ता है और फिर कलायत जाना पड़ता है। इस पर सरपंच अनीता गुर्जर ने कहा कि चुनाव के बाद वे इस बारे में जिला प्रशासन से आग्रह करेंगी।

उधर, थाना तितरम प्रभारी महावीर ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई सूचना नहीं है। अगर ऐसी कोई सूचना आती है तो लोगों को कानून अपने हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा। चुनाव समय पर अवश्य करवाएं जाएंगे।
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