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मल्टी स्पशलिटी अस्पताल : बढ़ते मरीज, घटते डॉक्टर
कैथल
Updated Sat, 12 Apr 2014 11:37 PM IST
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कैथल। इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में सरकार द्वारा निशुल्क इलाज योजनाओं की शुरुआत के बाद मरीजों की संख्या तो लगातार बढ़ रही है। लेकिन डॉक्टरों की संख्या बढ़ने के बजाय दिन-ब-दिन घटती जा रही है। ऐसे में लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस समय अस्पताल में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। मरीजों को इलाज के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है।
पचास डॉक्टरों की जरूरत, मात्र 19 हैं
जिलास्तरीय अस्पताल में हर रोज करीब 900 से लेकर 1000 मरीजों की ओपीडी होती है। जिनके समुचित इलाज के लिए 50 डॉक्टरों की जरूरत है। यहां स्वीकृत 43 पद भी पूरे भरे हुए नहीं हैं। केवल 19 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें से भी कई डॉक्टरों की ड्यूटी कोर्ट, जेल एवं फील्ड में ट्रेनिंग में लगी रहती है। जिस कारण अस्पताल में काम प्रभावित होता है।
सारा दिन लग जाता है इंतजार में
अस्पताल में ईलाज के लिए आए मरीज राजकुमार, मोना देवी, भतहेरी देवी, शांति, ऊषा, कमला और सीमा का कहना है कि यहां घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार डॉक्टर अन्य कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं। जिस कारण उन्हें काफी इंतजार करना पड़ता है। जब डॉक्टर आ जाते हैं तो घंटों में लाइन में लगने के बाद उनकी बारी आती है। ऐसे में उन्हें सारा दिन लग जाता है।
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इतना ही नहीं मरीजों का कहना है कि यदि डॉक्टर ने अपनी जांच में कोई टेस्ट लिख दिया तो उन्हें अगले दिन फिर से इलाज के लिए आना पड़ता है। लैब में में सैंपल देने में ही लंबी लाइन से गुजरना पड़ता है। यदि नंबर आ भी जाए तो जांच रिपोर्ट लगभग दो बजे ही मिल पाती है। जब तक अस्पताल की छुट्टी हो जाती है। जिस कारण उन्हें अगले दिन ही इलाज के लिए आना पड़ता है।
अस्पताल में इन डॉक्टरों की है कमी
अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, फिजिशियन, महिला रोग विशषज्ञ, सर्जन सहित चार से पांच एमबीबीएस डॉक्टरों की बेहद आवश्यकता है। अस्पताल में जहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं किसी तरह से डॉक्टर्स का तबादला यहां होता है। लेकिन कई डॉक्टर ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद छोड़ जाते हैं। अभी मार्च माह में ही जेल में कार्यरत डॉक्टर अपना पद छोड़ गए। जिस कारण अस्पताल से दूसरे डॉक्टर की ड्यूटी जेल में लगानी पड़ रही है। इन सबका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।
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इस समय अस्पताल में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। मरीजों को इलाज के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है।
पचास डॉक्टरों की जरूरत, मात्र 19 हैं
जिलास्तरीय अस्पताल में हर रोज करीब 900 से लेकर 1000 मरीजों की ओपीडी होती है। जिनके समुचित इलाज के लिए 50 डॉक्टरों की जरूरत है। यहां स्वीकृत 43 पद भी पूरे भरे हुए नहीं हैं। केवल 19 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें से भी कई डॉक्टरों की ड्यूटी कोर्ट, जेल एवं फील्ड में ट्रेनिंग में लगी रहती है। जिस कारण अस्पताल में काम प्रभावित होता है।
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सारा दिन लग जाता है इंतजार में
अस्पताल में ईलाज के लिए आए मरीज राजकुमार, मोना देवी, भतहेरी देवी, शांति, ऊषा, कमला और सीमा का कहना है कि यहां घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार डॉक्टर अन्य कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं। जिस कारण उन्हें काफी इंतजार करना पड़ता है। जब डॉक्टर आ जाते हैं तो घंटों में लाइन में लगने के बाद उनकी बारी आती है। ऐसे में उन्हें सारा दिन लग जाता है।
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इतना ही नहीं मरीजों का कहना है कि यदि डॉक्टर ने अपनी जांच में कोई टेस्ट लिख दिया तो उन्हें अगले दिन फिर से इलाज के लिए आना पड़ता है। लैब में में सैंपल देने में ही लंबी लाइन से गुजरना पड़ता है। यदि नंबर आ भी जाए तो जांच रिपोर्ट लगभग दो बजे ही मिल पाती है। जब तक अस्पताल की छुट्टी हो जाती है। जिस कारण उन्हें अगले दिन ही इलाज के लिए आना पड़ता है।
अस्पताल में इन डॉक्टरों की है कमी
अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, फिजिशियन, महिला रोग विशषज्ञ, सर्जन सहित चार से पांच एमबीबीएस डॉक्टरों की बेहद आवश्यकता है। अस्पताल में जहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं किसी तरह से डॉक्टर्स का तबादला यहां होता है। लेकिन कई डॉक्टर ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद छोड़ जाते हैं। अभी मार्च माह में ही जेल में कार्यरत डॉक्टर अपना पद छोड़ गए। जिस कारण अस्पताल से दूसरे डॉक्टर की ड्यूटी जेल में लगानी पड़ रही है। इन सबका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।