फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Path to prosperity made by out-of-the-box farming

बाप-दादा की खेती से अलग राह पकड़ी तो आज 300 से ज्यादा लोगों को दे रहे हैं रोजगार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Apr 2022 01:00 AM IST
विज्ञापन
Path to prosperity made by out-of-the-box farming
कैथल। धान और गेहूं के फसल चक्र के बाप-दादाओं के कृषि के परंपरागत तरीके को छोड़कर गांव मलिकपुर के गुरदयाल ने 20 साल पहले एक एकड़ में सब्जी की खेती शुरू की थी। आज वह 100 एकड़ की खेती में से 65 एकड़ में सब्जी और फल पैदा करते हैं। इससे उन्होंने न केवल अलग राह बनाई, बल्कि पूरे गांव को सब्जी उत्पादन के लिए प्रेरित किया। आज गांव में 400 एकड़ से ज्यादा रकबे में सब्जी का उत्पादन किया जा रहा है। अकेले गुरदयाल ने 300 लोगों को प्रत्यक्ष तो हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया है। पेप्सी के साथ अनुबंध खेती में आलू की खेती से लेकर खरबूजे की अगेती फसल, तरबूज, घीया, खीरा, टींडा सहित ऐसी सब्जियों का उत्पादन कर रहा है, जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। हर साल वह अपनी जमीन से तीन फसलें उठाता है। उसका मानना है कि खेती में मेहनत नहीं करेंगे तो परिणाम नहीं आएगा।
विज्ञापन

अमर उजाला से बातचीत में गुरदयाल ने बताया कि उन्होंने एक एकड़ में गोभी और खीरे का उत्पादन शुरू किया था। इसके बाद कृषि विज्ञान केंद्र कैथल और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाते हुए सूक्ष्म सिंचाई, मलचिंग जैसी तकनीक के आधार पर खेती शुरू की, जिसमें एक बार खर्च जरूर आता है लेकिन कमाई कई गुना बढ़ जाती है। तकनीक का असर इतना रहता है कि मौसम की मार के बावजूद कई बार अच्छी पैदावार हो जाती है। इस समय वह 100 एकड़ में से 65 एकड़ में सब्जी का उत्पादन करते हैं, जिसमें पहले धान की फसल ली। फिर आलू, अब खीरा, टींडा, घीया, खरबूजा और तरबूज उगाया। यह फसल कटने के बाद फिर धान लगेगा। बताया कि उन्होंने 1016 किसानों के साथ मिलकर एफपीओ बनाया है। उनके एफपीओ को बागवानी विभाग से प्रोजेक्ट मिला है, जिसमें लगभग तीन करोड़ की लागत से यूनिट लगाई जा रही है। यहां किसान फसल बेच सकेंगे। उस फसल को यहीं से व्यापारियों को ग्रेडिंग और पैकिंग के बाद अच्छी कीमत पर बेचा जाएगा। इससे किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। उसके साथ इस काम में गांव में 40 से 50 परिवार तो सीधा जुड़े हुए हैं। गांव में अन्य किसानों को भी समय-समय पर जानकारी देते हैं। यही कारण है कि आज गांव में 400 एकड़ से ज्यादा में सब्जी का उत्पादन होता है।
विज्ञापन

पेप्सी के लिए करते हैं आलू का उत्पादन
गुरदयाल ने बताया कि वह पेप्सिको के साथ अनुबंध में आलू का उत्पादन करते हैं, जिसे कंपनी ही खरीदती है। एक निर्धारित कीमत पर अनुबंध हो जाता है। इसके बाद बाजार में कोई भी कीमत हो, अनुबंध वाली कीमत पर उसे कीमत मिलती है। गुरदयाल का कहना है कि धान और गेहूं के उत्पादन में ज्यादा मेहनत नहीं लगती। सब्जी और फलों के लिए हर समय खेत में रहना पड़ता है। वह सरकार की सारी योजनाओं का लाभ उठाने का प्रयास करता है। मेरी फसल मेरा ब्योरा, मेरी विरासत, मेरा पानी जैसी योजनाओं का भी उसने लाभ उठाया है। किसान मेहनत का रास्ता चुनें तो निश्चित तौर पर खेती घाटे का सौदा नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed