{"_id":"99bc26e6eae15476cc513bb83557334c","slug":"panchyat-election-news-hindi-news-54","type":"story","status":"publish","title_hn":"संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर कायम रहा भाईचारा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर कायम रहा भाईचारा
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Mon, 25 Jan 2016 12:13 AM IST
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पंचायत चुनाव के तीसरे चरण के मतदान में कलायत खंड के 29 गांवों में शांति से मतदान हुआ। वोट डालने को लेकर कहीं-कहीं कहासुनी तो हुई पर हर गांव में मतदान के समय लोगों ने आपसी भाईचारे को कायम रखा। अति संवेदनशील घोषित गांव जुलानीखेड़ा, चौशाला, दुब्बल, कुराड़ व कलासर में मतदान के समय सभी प्रत्याशियों के समर्थक भाईचारे को बनाए हुए थे।
गांव कमालपुर में बुजुर्गों ने भाईचारे को बनाए रखने की कमान संभाली हुई थी। गांव के दर्जनों बुजुर्ग मतदान केंद्र के बाहर अलाव जलाकर हुक्का पंचायत किए हुए थे। स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहे थे। बुजुर्गों ने अंतिम समय पर अपना मतदान किया।
मतदान को लेकर जोश इतना था कि बेबस, अपंग, अति बुजुर्ग मतदाताओं को भी उनके समर्थक मतदान के लिए बूथों पर ला रहे थे। गांव जुलानी खेड़ा में लगभग 12 बजे तक 72 प्रतिशत मतदान हो चुका था। गांव चौशाला के बूथ नंबर-99 पर इवीएम खराब हो जाने के कारण करीब एक घंटे तक मतदान बाधित रहा।
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दलित वर्ग की महिला के आरक्षित सरपंच पद के लिए गांव बालू में घूंघट निकाल कर महिलाएं अपने प्रत्याशी के पक्ष में मतदान के लिए मतदान केंद्र के बाहर लाइनें बना कर खड़ी थीं। संवेदनशील गांव रामगढ़ पांडवा में मतदान बहुत ही शांति से संपन्न हुआ। अति संवेदनशील व संवेदनशील गांवों में मतदान को सौहार्दपूर्ण करवाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा अतिरिक्त व्यवस्था की हुई थी।
प्रशासन का दावा था कि ऐसे बूथों पर प्रत्याशियों के एजेंट मतदान केंद्र के बाहर ही बैठेंगे पर ऐसा कहीं नहीं हुआ। संवेदनशील बूथों पर पुलिस प्रशासन द्वारा वीडियो रिकार्डिंग भी करवाई जा रही थी।
106 वर्ष की चलती देवी ने किया मतदान
गांव चौशाला की 106 वर्षीय बुजुर्ग चलती देवी ने खुद मतदान किया। बुजुर्ग महिला का कहना था कि मतदान के समय किसी की भी मौजूदगी सहन नहीं करेंगी। गांव की सबसे बुजुर्ग महिला ने बताया कि वे कई दशक से मतदान कर रही हैं, पर इस बार के चुनाव में उन्हें सबसे अधिक जोश देखने को मिला है। गांव की ही 85 वर्षीय नन्ही देवी जिन्हें अधरंग की भी शिकायत है, ने मतदान केंद्र में आकर अपने मत का प्रयोग किया। इसी तरह से गांव मटौर की नेत्रहीन ओर अपंग 85 वर्षीय बीरो देवी ने अपना मतदान किया।
पहली बार डाले वोट
गांव जुलानी खेड़ा की सुमन ने पहली बार मतदान किया है। सुमन का कहना था कि मतदान को लेकर वह बहुत उत्साहित थी। इसी तरह से सुमन, नीरू शर्मा, सोमवीर ने भी पहली बार अपने मत का प्रयोग किया। पहली बार मत डाल रही सुरेश एमए, बीएड व दो विषयों में पीजी है। उनका कहना था कि उनका परिवार अशिक्षित होने के कारण उन्हें मतदान की अहमियत नहीं समझा सके। इस बार उन्होंने स्वयं अपना वोट बनवाया तथा प्रथम बार मतदान किया।
गांव रामगढ़ में ऋषिपाल ने 172 वोटों से जीत की दर्ज
कलायत। गांव रामगढ़ पांडवा में कांटे की टक्कर में संपन्न हुए चुनाव में नारियल पेड़ पर कांच का गिलास भारी पड़ गया। अंतिम समय तक खामोश रहे मतदाताओं का फैसला आखिर साढ़े चार बजे सामने आ गया। बूथ नंबर 42, 43 व 45 की गिनती में प्रत्याशी कविता रानी ऋषिपाल से 82 मतों से आगे चल रही थीं। बूथ नंबर 44 का पिटारा खुलते ही बाजी पलट गई तथा विजय श्री ऋषिपाल के खेमे में आ खड़ी हुई। बूथ नंबर 44 में अधिकांश वोट दलित समाज के ही थे।
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गांव कमालपुर में बुजुर्गों ने भाईचारे को बनाए रखने की कमान संभाली हुई थी। गांव के दर्जनों बुजुर्ग मतदान केंद्र के बाहर अलाव जलाकर हुक्का पंचायत किए हुए थे। स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहे थे। बुजुर्गों ने अंतिम समय पर अपना मतदान किया।
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मतदान को लेकर जोश इतना था कि बेबस, अपंग, अति बुजुर्ग मतदाताओं को भी उनके समर्थक मतदान के लिए बूथों पर ला रहे थे। गांव जुलानी खेड़ा में लगभग 12 बजे तक 72 प्रतिशत मतदान हो चुका था। गांव चौशाला के बूथ नंबर-99 पर इवीएम खराब हो जाने के कारण करीब एक घंटे तक मतदान बाधित रहा।
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दलित वर्ग की महिला के आरक्षित सरपंच पद के लिए गांव बालू में घूंघट निकाल कर महिलाएं अपने प्रत्याशी के पक्ष में मतदान के लिए मतदान केंद्र के बाहर लाइनें बना कर खड़ी थीं। संवेदनशील गांव रामगढ़ पांडवा में मतदान बहुत ही शांति से संपन्न हुआ। अति संवेदनशील व संवेदनशील गांवों में मतदान को सौहार्दपूर्ण करवाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा अतिरिक्त व्यवस्था की हुई थी।
प्रशासन का दावा था कि ऐसे बूथों पर प्रत्याशियों के एजेंट मतदान केंद्र के बाहर ही बैठेंगे पर ऐसा कहीं नहीं हुआ। संवेदनशील बूथों पर पुलिस प्रशासन द्वारा वीडियो रिकार्डिंग भी करवाई जा रही थी।
106 वर्ष की चलती देवी ने किया मतदान
गांव चौशाला की 106 वर्षीय बुजुर्ग चलती देवी ने खुद मतदान किया। बुजुर्ग महिला का कहना था कि मतदान के समय किसी की भी मौजूदगी सहन नहीं करेंगी। गांव की सबसे बुजुर्ग महिला ने बताया कि वे कई दशक से मतदान कर रही हैं, पर इस बार के चुनाव में उन्हें सबसे अधिक जोश देखने को मिला है। गांव की ही 85 वर्षीय नन्ही देवी जिन्हें अधरंग की भी शिकायत है, ने मतदान केंद्र में आकर अपने मत का प्रयोग किया। इसी तरह से गांव मटौर की नेत्रहीन ओर अपंग 85 वर्षीय बीरो देवी ने अपना मतदान किया।
पहली बार डाले वोट
गांव जुलानी खेड़ा की सुमन ने पहली बार मतदान किया है। सुमन का कहना था कि मतदान को लेकर वह बहुत उत्साहित थी। इसी तरह से सुमन, नीरू शर्मा, सोमवीर ने भी पहली बार अपने मत का प्रयोग किया। पहली बार मत डाल रही सुरेश एमए, बीएड व दो विषयों में पीजी है। उनका कहना था कि उनका परिवार अशिक्षित होने के कारण उन्हें मतदान की अहमियत नहीं समझा सके। इस बार उन्होंने स्वयं अपना वोट बनवाया तथा प्रथम बार मतदान किया।
गांव रामगढ़ में ऋषिपाल ने 172 वोटों से जीत की दर्ज
कलायत। गांव रामगढ़ पांडवा में कांटे की टक्कर में संपन्न हुए चुनाव में नारियल पेड़ पर कांच का गिलास भारी पड़ गया। अंतिम समय तक खामोश रहे मतदाताओं का फैसला आखिर साढ़े चार बजे सामने आ गया। बूथ नंबर 42, 43 व 45 की गिनती में प्रत्याशी कविता रानी ऋषिपाल से 82 मतों से आगे चल रही थीं। बूथ नंबर 44 का पिटारा खुलते ही बाजी पलट गई तथा विजय श्री ऋषिपाल के खेमे में आ खड़ी हुई। बूथ नंबर 44 में अधिकांश वोट दलित समाज के ही थे।