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Kaithal News: भगवान शिव की भक्ति के रंग में रंगीं

Sun, 13 Jul 2025 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 13 Jul 2025 12:39 AM IST
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Painted in the color of devotion to Lord Shiva
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। सावन के महीने में लोगों में शिव भक्ति का रंग चढ़ने लगा है। यह महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है।

इस अवसर पर महिलाओं और कुंवारी कन्याओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। शिवलिंग की पूजा, व्रत, अभिषेक और पारंपरिक श्रृंगार के माध्यम से श्रद्धालु पूरे माह शिव को प्रसन्न करने का प्रयास कर रही हैं।

शिव आराधना से जुड़े अनुभव साझा करते हुए महिलाओं ने बताया कि श्रावण मास में पूजा करते समय विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।

धार्मिक मान्यता है कि यदि विधिवत पूजा न की जाए तो शिवजी अप्रसन्न हो सकते हैं। महिलाओं ने बताए अपने अनुभव ः-
भगवान शिव और प्रकृति के बीच है संबंध

हमारे घर में सावन माह आते ही हरियाली और भक्ति दोनों का वातावरण बन जाता है। इसी माह में तीज का पर्व भी आता है। हमने बचपन से देखा है कि इस महीने में हरी चूड़ियां और हरी साड़ी पहनकर शिवजी की पूजा करना पारंपरिक मान्यता है। हमारे बुजुर्गों से सुना है कि भगवान शिव प्रकृति के सबसे निकट देवता हैं। वे हिमालय में वास करते हैं और उन्हें बेलपत्र, धतूरा, भांग जैसी प्राकृतिक चीजें प्रिय हैं, जो हरे रंग की होती हैं। इसलिए मैं भी शिव-गौरी की आराधना में हरे रंग को प्राथमिकता देती हूं।
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मोनिका शर्मा

घर में की जाती है शिवलिंग की स्थापना

सावन शुरू होते ही हमारा पूरा परिवार शिव भक्ति में लीन हो जाता है। घर में शिवलिंग की स्थापना की जाती है और सदस्य पूजा करते हैं। रोज स्नान के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है और 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं। सोमवार को विशेष अभिषेक होता है—पहले सोमवार को दूध व काले तिल, दूसरे पर गन्ने का रस, तीसरे पर सरसों का तेल और चौथे सोमवार को शहद से। महिलाएं लाल या हरी बिंदी लगाकर हरे चूड़ियां पहनती हैं और मेहंदी भी अवश्य लगाती हैं।
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ज्योति शांडिल्य

दूध से नहीं, केवल जल से करती हूं अभिषेक

सावन का महीना शुरू होते ही मन पूरी तरह भोलेनाथ में रम जाता है। वर्षों से नियम है कि सुबह जल्दी उठकर स्नान कर मंदिर जाती हूं। हमारी पारिवारिक परंपरा के अनुसार, मैं सावन में दूध से अभिषेक नहीं करती, केवल जल से ही शिवलिंग का अभिषेक करती हूं। हर सोमवार को गन्ने के रस से शिवजी का अभिषेक कर बेलपत्र, भस्म और धतूरा अर्पित करती हूं। मुझे लगता है, सादगी और श्रद्धा से की गई पूजा ही सच्ची पूजा होती है। भगवान भोलेनाथ सरल है जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।


रचना धीमान

पूरे सावन व्रत करने

का लिया संकल्प

पहले मैं सावन के सोमवार का ही व्रत रखती थी, लेकिन इस बार संकल्प लिया है कि पूरा सावन व्रत करूंगी। गुरु मां के मार्गदर्शन से मैं सुबह उठकर स्नान करती हूं, पीले वस्त्र पहनती हूं और विधिवत शिवलिंग की पूजा करने के बाद ही कुछ लेती हूं। शाम को महाकाल और मां पार्वती की आरती करती हूं और एक समय ही व्रत का भोजन करती हूं। गुरु मां ने कहा है कि अगर पूरे सावन माह शिव-पार्वती की पूजा करूंगी तो भगवान मुझे अच्छा वर देंगे। एक बार भोजन लेती हूं।

कुमारी पूनम
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