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बारिश में भीगा मंडी में पड़ा धान
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Paddy lying in the mandi drenched in rain
- फोटो : Kaithal
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फ क्षेत्र में हुई बारिश के कारण मंडी में पड़ी धान की फसल भीग गई। किसानों की छह महीने की कमाई पल भर की बरसात में खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है।
किसान ईश्वर सिंह, जयमल, नरेंद्र कुमार, परमजीत सिंह, सुखदेव, निर्मल सिंह, बलवान, सुशील, राजकुमार, सुरेंद्र व गुरजीत सिंह ने बताया कि पिछले काफी दिनों से धान को मंडी में लिए हुए बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं किए जाने से बरसात के पानी में भीग गई है। किसानों का कहना है कि मंडी में बरसात का पानी दिनभर जमा रहा, लेकिन मार्केट कमेटी का कोई भी अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा।
किसान अपने स्तर पर मंडी से पानी निकालते रहे। जबकि मंडी में पानी निकासी की उचित व्यवस्था करना मार्केट कमेटी का दायित्व बनता है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते सरकार उनकी धान की खरीद कर लेती तो उनकी 6 महीने की कमाई पानी में नहीं भीगती। किसानों ने मंडियों में खराब हुई धान की ढेरियों के लिए मुआवजे की मांग की है।
सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा जो धान 3 अक्तूबर को नाममात्र खरीदी गई थी। उसके उठान की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। अगर खरीदी गई धान के उठान की व्यवस्था हो जाती तो वह धान बरसात में भीगने से बच जाती।
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किसान ईश्वर सिंह, जयमल, नरेंद्र कुमार, परमजीत सिंह, सुखदेव, निर्मल सिंह, बलवान, सुशील, राजकुमार, सुरेंद्र व गुरजीत सिंह ने बताया कि पिछले काफी दिनों से धान को मंडी में लिए हुए बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं किए जाने से बरसात के पानी में भीग गई है। किसानों का कहना है कि मंडी में बरसात का पानी दिनभर जमा रहा, लेकिन मार्केट कमेटी का कोई भी अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा।
किसान अपने स्तर पर मंडी से पानी निकालते रहे। जबकि मंडी में पानी निकासी की उचित व्यवस्था करना मार्केट कमेटी का दायित्व बनता है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते सरकार उनकी धान की खरीद कर लेती तो उनकी 6 महीने की कमाई पानी में नहीं भीगती। किसानों ने मंडियों में खराब हुई धान की ढेरियों के लिए मुआवजे की मांग की है।
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सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा जो धान 3 अक्तूबर को नाममात्र खरीदी गई थी। उसके उठान की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। अगर खरीदी गई धान के उठान की व्यवस्था हो जाती तो वह धान बरसात में भीगने से बच जाती।
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