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Kaithal News: अदालत आरसी न देने पर वाहन डीलर को 30 हजार रुपये लौटाने के दिए आदेश
Sun, 07 Jun 2026 06:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 07 Jun 2026 06:03 AM IST
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कैथल। जिला उपभोक्ता फोरम ने वाहन डीलर को आरसी न देने पर शिकायतकर्ता को 30 हजार रुपये लौटाने के आदेश दिए है। वाहन डीलर को 25 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च देना होगा। शिकायतकर्ता को डीलर को 45 दिनों के भीतर वाहन की मूल आरसी उपलब्ध करानी होगी। आदेश का पालन न करने पर राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा तथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है। शिकायतकर्ता संजीव ने शिकायत में बताया था कि 30 अप्रैल 2024 को टाटा योधा 1700 सीबीसी बीएसवीआई चेसिस वाहन लगभग 9.96 लाख रुपये में खरीदा था। वाहन खरीदते समय डीलर ने आरसी एवं अन्य शुल्कों के नाम पर 22 हजार रुपये भी वसूल किए थे और आश्वासन दिया था कि एक माह के भीतर वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र उसके घर भेज दिया जाएगा, लेकिन कई महीनों बाद भी आरसी उपलब्ध नहीं कराई गई।
डीलर ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता वाहन का उपयोग क्रेन के रूप में कर रहा है तथा इस बारे में जानकारी नहीं दी गई थी। साथ ही क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की ओर से अतिरिक्त शुल्क मांगे जाने की बात भी कही गई। हालांकि आयोग ने पाया कि डीलर की ओर से जारी अस्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र में वाहन का प्रकार पहले से ही क्रेन दर्ज था। इससे स्पष्ट हुआ कि वाहन के क्रेन होने की जानकारी डीलर को बिक्री के समय से ही थी।
आयोग ने यह भी कहा कि डीलर अतिरिक्त शुल्क की मांग संबंधी कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। वहीं रिकॉर्ड से यह साबित हुआ कि डीलर ने आरसी के लिए 22 हजार रुपये प्राप्त किए थे। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र आवश्यक दस्तावेज है। आरसी न मिलने के कारण शिकायतकर्ता वाहन का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं कर सका, जिससे उसे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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डीलर ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता वाहन का उपयोग क्रेन के रूप में कर रहा है तथा इस बारे में जानकारी नहीं दी गई थी। साथ ही क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की ओर से अतिरिक्त शुल्क मांगे जाने की बात भी कही गई। हालांकि आयोग ने पाया कि डीलर की ओर से जारी अस्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र में वाहन का प्रकार पहले से ही क्रेन दर्ज था। इससे स्पष्ट हुआ कि वाहन के क्रेन होने की जानकारी डीलर को बिक्री के समय से ही थी।
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आयोग ने यह भी कहा कि डीलर अतिरिक्त शुल्क की मांग संबंधी कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। वहीं रिकॉर्ड से यह साबित हुआ कि डीलर ने आरसी के लिए 22 हजार रुपये प्राप्त किए थे। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र आवश्यक दस्तावेज है। आरसी न मिलने के कारण शिकायतकर्ता वाहन का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं कर सका, जिससे उसे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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