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Kaithal News: डिपो में बीएस-6 की महज 76 बसें, लंबे रूटों पर यात्री परेशान
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बसों के इंतजार में खड़े यात्री। संवाद
- फोटो : Archive
कैथल। कैथल रोडवेज डिपो में नई बसों की कमी यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। डिपो में इस समय बीएस-6 मानक की महज 76 बसें हैं। ऐसे में हिसार, दिल्ली, गुरुग्राम, हरिद्वार और चंडीगढ़ सहित लंबे रूटों पर बसें यात्रियों की संख्या अनुसार कम हैं।
पुरानी बसों के एनसीआर में प्रवेश पर पाबंदी होने के कारण यह दिक्कत आ रही है। कई बार घंटों तक रूटों पर यात्रियों को बसों के लिए इंतजार करना पड़ता है। डिपो को व्यवस्था सुधारने के लिए करीब 50 नई बसों की जरूरत है।
कैथल डिपो में निर्धारित जरूरत के अनुसार 250 बसों का बेड़ा होना चाहिए लेकिन वर्तमान में महज 148 बसें उपलब्ध हैं। इस हिसाब से डिपो में 102 बसों की कमी बनी हुई है। इनमें भी बड़ी संख्या में आठ से 10 साल पुरानी 72 बसें शामिल हैं। इन बसों में आए दिन तकनीकी खराबी आने से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार बसें बीच रास्ते बंद हो जाती हैं।
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यात्री राजेश, रणदीप, मनोज व सुनील कुमार का कहना है कि इन बसों में क्लच प्लेट, गियर बॉक्स और टायर सहित अन्य उपकरणों में खराबी आने की समस्या बनी रहती है। लंबी दूरी के रूटों पर बस खराब होने से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। कैथल डिपो की वर्तमान में प्रतिदिन करीब 14 से 18 लाख रुपये की आमदनी है। नई बसों की कमी के कारण परिवहन सेवाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है। यदि डिपो को जरूरत के अनुसार नई बसें मिलती हैं तो लंबे रूटों पर फेरे बढ़ाए जा सकते हैं।
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पुरानी बसों के एनसीआर में प्रवेश पर पाबंदी होने के कारण यह दिक्कत आ रही है। कई बार घंटों तक रूटों पर यात्रियों को बसों के लिए इंतजार करना पड़ता है। डिपो को व्यवस्था सुधारने के लिए करीब 50 नई बसों की जरूरत है।
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कैथल डिपो में निर्धारित जरूरत के अनुसार 250 बसों का बेड़ा होना चाहिए लेकिन वर्तमान में महज 148 बसें उपलब्ध हैं। इस हिसाब से डिपो में 102 बसों की कमी बनी हुई है। इनमें भी बड़ी संख्या में आठ से 10 साल पुरानी 72 बसें शामिल हैं। इन बसों में आए दिन तकनीकी खराबी आने से यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार बसें बीच रास्ते बंद हो जाती हैं।
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यात्री राजेश, रणदीप, मनोज व सुनील कुमार का कहना है कि इन बसों में क्लच प्लेट, गियर बॉक्स और टायर सहित अन्य उपकरणों में खराबी आने की समस्या बनी रहती है। लंबी दूरी के रूटों पर बस खराब होने से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। कैथल डिपो की वर्तमान में प्रतिदिन करीब 14 से 18 लाख रुपये की आमदनी है। नई बसों की कमी के कारण परिवहन सेवाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है। यदि डिपो को जरूरत के अनुसार नई बसें मिलती हैं तो लंबे रूटों पर फेरे बढ़ाए जा सकते हैं।

बसों के इंतजार में खड़े यात्री। संवाद- फोटो : Archive