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ऑनलाइन मोबाइल खरीद के माध्यम से चल रहा था फर्जीवाड़ा
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फर्जीवाड़ा कर ऑनलाइन मोबाइल खरीद करने वाले दो जालसाजों को गिरफ्तार कर पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपियों के पास से बिना आवश्यक कागजात के लगभग 86 लाख रुपये से अधिक के 872 मोबाइल और नकदी बरामद किए गये हैं। दोनों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। ये आरोपी भोले-भाले युवकों को सौ से दो सौ रुपये तक का लालच देकर उनकी आईडी से सैकड़ों मोबाइल फोन मंगवाकर बाद में दिल्ली की मार्केट में बेच देते थे। पुलिस को शक है कि इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन मंगवाने के लिए कहीं काले धन का प्रयोग तो नहीं किया गया।
एसपी लोकेंद्र सिंह ने अपने कार्यालय में मीडिया से बातचीत में बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग ऑनलाइन मोबाइल फोन खरीदने के लिए फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। ये व्यक्ति एक साथ हजारों की संख्या में मोबाइल फोन खरीदते हैं और उन्हें खरीदने के लिए फर्जी आईडी का प्रयोग कर रहे हैं। इस आईडी से खरीदे गए मोबाइल के बाद ये व्यक्ति इस मोबाइल फोन को दिल्ली की गफ्फार मार्केट में बेचते हैं। जहां वे फर्जी बिल काटते हैं। इस कार्य में उन्हें एक तो मोबाइल फोन ऑनलाइन सस्ता मिलता है और करोड़ों रुपये के गिफ्ट वाउचर या अन्य सुविधाएं मिलती हैं, उनके माध्यम से फर्जीवाड़ा करते हैं।
पुलिस को मिली सूचना के बाद टीम गठित कर जांच की गई, जिसमें पता चला कि आरोपी अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म की एप को थर्ड पार्टी क्लोनिंग एप से क्लोनिंग करके एक मोबाइल फोन में सैकड़ों एप बनाकर फर्जी नाम पतों पर अलग से एक कोड डालकर अवैध तरीके से बार-बार आर्डर लगाकर फोन मंगवाते हैं। साथ ही पता चला कि जीएसटी पोर्टल से जीएसटी नंबर चुराकर फर्जी अमेजन बिजनेस आईडी बनाकर फर्जी नाम पतों पर एक कोड के साथ डिलीवरी करवाई जाती है।
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इसके बाद रजत कुमार निवासी बैंक कालोनी कैथल तथा सुधीर नारंग निवासी अमरगढ़ गामडी कैथल व अन्य साथियों द्वारा उक्त सभी मोबाइल फोन अवैध तरीके से खरीद लिए जाते हैं। इसके बाद अज्ञात व्यक्तियों द्वारा मंगवाए गए अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल फोनों को बिना बिल के ही रजत और सुधीर नारंग व अन्य व्यक्तियों द्वारा दिल्ली गफ्फार मार्केट में अवैध तरीके से नकद रुपयों में बेचते हैं। साथ ही अमेजन गिफ्ट वाउचर खरीदकर बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से रुपये अर्जित करते हैं। पुलिस ने आरोपी रजत के घर से बैग में 15 लाख 15 हजार रुपये नकदी और प्लास्टिक कट्टों से विभिन्न कंपनियों के 872 मोबाइल फोन सहित करीब 71 लाख 41 हजार 439 रुपये मूल्य के कुल 872 मोबाइल फोन बरामद हुए।
पूछताछ में रजत इन मोबाइल फोन के कोई बिल व अन्य दस्तावेज नहीं दिखा पाया। पुलिस ने नकदी सहित कुल 86 लाख 56 हजार 439 रुपये मूल्य का सामान जब्त करके केस दर्ज कर लिया। मामले की आगामी जांच स्पेशल साइबर अपराध शाखा कैथल प्रभारी इंस्पेक्टर मुकेश कुमार द्वारा करते हुए आरोपी रजत कुमार तथा उसके साथी सुधीर नारंग को भादसं. तथा आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
एसपी ने कहा कि पुलिस तीन बिंदुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है कि एक तो हजारों की संख्या में एक साथ मोबाइल फोन खरीदने के लिए क्या कहीं काले धन का तो प्रयोग नहीं हो रहा? फर्जी आईडी लगाकर एक साथ इतनी बड़ी संख्या में ऑनलाइन मोबाइल कैसे खरीदे जाते हैं? साथ ही फर्जी बिलों से दिल्ली और अन्य जगहों पर ये मोबाइल फोन बेचकर कैसे सरकार को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
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एसपी लोकेंद्र सिंह ने अपने कार्यालय में मीडिया से बातचीत में बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग ऑनलाइन मोबाइल फोन खरीदने के लिए फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। ये व्यक्ति एक साथ हजारों की संख्या में मोबाइल फोन खरीदते हैं और उन्हें खरीदने के लिए फर्जी आईडी का प्रयोग कर रहे हैं। इस आईडी से खरीदे गए मोबाइल के बाद ये व्यक्ति इस मोबाइल फोन को दिल्ली की गफ्फार मार्केट में बेचते हैं। जहां वे फर्जी बिल काटते हैं। इस कार्य में उन्हें एक तो मोबाइल फोन ऑनलाइन सस्ता मिलता है और करोड़ों रुपये के गिफ्ट वाउचर या अन्य सुविधाएं मिलती हैं, उनके माध्यम से फर्जीवाड़ा करते हैं।
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पुलिस को मिली सूचना के बाद टीम गठित कर जांच की गई, जिसमें पता चला कि आरोपी अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म की एप को थर्ड पार्टी क्लोनिंग एप से क्लोनिंग करके एक मोबाइल फोन में सैकड़ों एप बनाकर फर्जी नाम पतों पर अलग से एक कोड डालकर अवैध तरीके से बार-बार आर्डर लगाकर फोन मंगवाते हैं। साथ ही पता चला कि जीएसटी पोर्टल से जीएसटी नंबर चुराकर फर्जी अमेजन बिजनेस आईडी बनाकर फर्जी नाम पतों पर एक कोड के साथ डिलीवरी करवाई जाती है।
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इसके बाद रजत कुमार निवासी बैंक कालोनी कैथल तथा सुधीर नारंग निवासी अमरगढ़ गामडी कैथल व अन्य साथियों द्वारा उक्त सभी मोबाइल फोन अवैध तरीके से खरीद लिए जाते हैं। इसके बाद अज्ञात व्यक्तियों द्वारा मंगवाए गए अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल फोनों को बिना बिल के ही रजत और सुधीर नारंग व अन्य व्यक्तियों द्वारा दिल्ली गफ्फार मार्केट में अवैध तरीके से नकद रुपयों में बेचते हैं। साथ ही अमेजन गिफ्ट वाउचर खरीदकर बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से रुपये अर्जित करते हैं। पुलिस ने आरोपी रजत के घर से बैग में 15 लाख 15 हजार रुपये नकदी और प्लास्टिक कट्टों से विभिन्न कंपनियों के 872 मोबाइल फोन सहित करीब 71 लाख 41 हजार 439 रुपये मूल्य के कुल 872 मोबाइल फोन बरामद हुए।
पूछताछ में रजत इन मोबाइल फोन के कोई बिल व अन्य दस्तावेज नहीं दिखा पाया। पुलिस ने नकदी सहित कुल 86 लाख 56 हजार 439 रुपये मूल्य का सामान जब्त करके केस दर्ज कर लिया। मामले की आगामी जांच स्पेशल साइबर अपराध शाखा कैथल प्रभारी इंस्पेक्टर मुकेश कुमार द्वारा करते हुए आरोपी रजत कुमार तथा उसके साथी सुधीर नारंग को भादसं. तथा आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
एसपी ने कहा कि पुलिस तीन बिंदुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है कि एक तो हजारों की संख्या में एक साथ मोबाइल फोन खरीदने के लिए क्या कहीं काले धन का तो प्रयोग नहीं हो रहा? फर्जी आईडी लगाकर एक साथ इतनी बड़ी संख्या में ऑनलाइन मोबाइल कैसे खरीदे जाते हैं? साथ ही फर्जी बिलों से दिल्ली और अन्य जगहों पर ये मोबाइल फोन बेचकर कैसे सरकार को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।