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जिले में 12 लाख की आबादी में से 20 प्रतिशत बच्चे
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कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों को संक्रमण का ज्यादा खतरा बताया जा रहा है। ऐसे में तीसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग को जिले में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी खलेगी। स्वास्थ्य विभाग के पास डॉक्टरों की कमी तो शुरुआत से ही रही है। मगर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों सहित कैथल में केवल एक ही बच्चों का डॉक्टर है और वो भी नागरिक अस्पताल में तैनात है। इस समय जिले की करीब 12 लाख आबादी में से पांच वर्ष तक आयु के 14 प्रतिशत और जन्म से लेकर 17 वर्ष तक मिलाकर 20 प्रतिशत यानी लगभग 2.40 लाख बच्चे और किशोर हैं। इसलिए यह चिंता का विषय है कि यदि इस कोविड काल में दूसरी लहर जैसी फिर कोई इमरजेंसी के हालात बने तो सरकारी अस्पताल का केवल एक बाल रोग विशेषज्ञ बच्चों की सेहत को कैसे सुरक्षित करेगा।
अभी केवल 22 बेड की व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग द्वारा केवल नागरिक अस्पताल में ही संभावित संक्रमण को देखते हुए बच्चों को आइसोलेट करने के लिए 22 बेडों की व्यवस्था की गई है। जानकारी के अनुसार संभावित तीसरी लहर के दौरान इन बेडों पर बच्चों को तभी आइसोलेट किया जाएगा, जब स्थिति घरों में बच्चों को रखने योग्य नहीं होगी। हालांकि अस्पताल में 12 बेड के आइसीयू के निर्माण से संबंधित प्रक्रिया अभी चल रही है। लेकिन आईसीयू को तैयार होने में भी अभी करीब तीन महीने का समय लगेगा।
सीएचसी केंद्रों में न बच्चों का डॉक्टर, न ही बेड बेड
जिला नागरिक अस्पताल के अलावा जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या सात है। जिले के इन केंद्रों में तो संभावित संक्रमित बच्चों को आइसोलेट करने के लिए अभी तक बेडों तक की संख्या निर्धारित भी नहीं की गई है। न ही इन स्थानों पर डॉक्टरों की कोई व्यवस्था है। स्थिति अगर दूसरी लहर की तरह ज्यादा खराब होती है, तो उससे निपटने में काफी मुश्किलों का सामना जिला वासियों और विभाग को करना पड़ेगा।
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बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए लिखा है
सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास 18 वेंटिलेटर इस समय हैं। जरूरत पड़ने पर बच्चों के लिए इनका प्रयोग किया जा सकता है। एंबुलेंस, ऑक्सीजन और बेडों की व्यवस्था जरूरत के अनुसार की गई है। अगर संख्या बढ़ाने की जरूरत पड़ी तो बढ़ाई जाएगी। बच्चों का डॉक्टर केवल एक ही है। बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के बारे में विभाग को पत्र लिखा गया है। विभाग की ओर से लगातार प्रबंध पुख्ता करने के प्रयास जारी हैं।
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अभी केवल 22 बेड की व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग द्वारा केवल नागरिक अस्पताल में ही संभावित संक्रमण को देखते हुए बच्चों को आइसोलेट करने के लिए 22 बेडों की व्यवस्था की गई है। जानकारी के अनुसार संभावित तीसरी लहर के दौरान इन बेडों पर बच्चों को तभी आइसोलेट किया जाएगा, जब स्थिति घरों में बच्चों को रखने योग्य नहीं होगी। हालांकि अस्पताल में 12 बेड के आइसीयू के निर्माण से संबंधित प्रक्रिया अभी चल रही है। लेकिन आईसीयू को तैयार होने में भी अभी करीब तीन महीने का समय लगेगा।
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सीएचसी केंद्रों में न बच्चों का डॉक्टर, न ही बेड बेड
जिला नागरिक अस्पताल के अलावा जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या सात है। जिले के इन केंद्रों में तो संभावित संक्रमित बच्चों को आइसोलेट करने के लिए अभी तक बेडों तक की संख्या निर्धारित भी नहीं की गई है। न ही इन स्थानों पर डॉक्टरों की कोई व्यवस्था है। स्थिति अगर दूसरी लहर की तरह ज्यादा खराब होती है, तो उससे निपटने में काफी मुश्किलों का सामना जिला वासियों और विभाग को करना पड़ेगा।
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बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए लिखा है
सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के पास 18 वेंटिलेटर इस समय हैं। जरूरत पड़ने पर बच्चों के लिए इनका प्रयोग किया जा सकता है। एंबुलेंस, ऑक्सीजन और बेडों की व्यवस्था जरूरत के अनुसार की गई है। अगर संख्या बढ़ाने की जरूरत पड़ी तो बढ़ाई जाएगी। बच्चों का डॉक्टर केवल एक ही है। बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के बारे में विभाग को पत्र लिखा गया है। विभाग की ओर से लगातार प्रबंध पुख्ता करने के प्रयास जारी हैं।