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अब जिले में ही हो सकेगा फंगस का स्क्रीन टेस्ट
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ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीजों को अब केवल संभावना के आधार पर जांच करवाने के लिए करनाल नहीं जाना पड़ेगा। संभावित मरीजों को बाहर भेजने से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में ही फंगस का स्क्रीन टेस्ट शुरू करने की योजना तैयार की है। एक सप्ताह में मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा। इसके लिए जिला नागरिक अस्पताल में सबसे पहले प्राइमरी स्क्रीन टेस्ट किया जाएगा। यह एक प्रकार से शुरुआती जांच होगी। अगर इस जांच में ही यह पता लग जाता है कि व्यक्ति किसी भी प्रकार के फंगस से ग्रस्त है तो उसे आगामी जांच के लिए करनाल भेजा जाएगा। वहां पर ये पता लगाया जाएगा कि व्यक्ति किस प्रकार से फंगस से पीड़ित है। स्क्रीन टेस्ट में जिस मरीज को फंगस नहीं पाया जाएगा, उसे करनाल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
नागरिक अस्पताल की जांच लैब में ही बढ़ाई जाएगी सुविधा
स्क्रीन टेस्ट के लिए जिला नागरिक अस्पताल की जांच लैब में ही सुविधा बढ़ाई जाएगी। इसी लैब में पता लग जाएगा कि व्यक्ति फंगस से पीड़ित है या नहीं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस सप्ताह स्क्रीन टेस्ट से जुड़े उपकरण लैब में जुटाए जाएंगे। जैसे ही संसाधन पूरे उपलब्ध होते हैं, टेस्ट की शुरुआत की जाएगी। जिले में इस प्रकार के टेस्ट की सुविधा पहली बार मरीजों को मिलेगी।
ये रहेगी टेस्ट की प्रक्रिया
पोटेशियम हाइड्रोक्साइड की एक बूंद संदिग्ध फंगस की ऊपरी सतह से उतारी गई पपड़ी में मिलाकर माइक्रोस्कोप के माध्यम से उसे देखा जाता है। यदि उसमें हाइफी और स्यूडो-हाइफी नामक पदार्थ मिले, तो स्क्रीन टेस्ट यह बताएगा कि संबंधित व्यक्ति को फंगस है। इसके बाद वह फंगस कौन सी है इसकी पुष्टि के लिए उसे कल्पना चावला मेडिकल करनाल भेजा जाएगा।
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ज्यादातर त्वचा से संबंधित हैं फंगस
चिकित्सकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ज्यादातर फंगस त्वचा से संबंधित पाए जाते हैं। जिस प्रकार अब ब्लैक फंगस और येलो फंगस ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। उसी प्रकार के कई फंगस त्वचा के लिए भी ज्यादा हानिकारक हैं, जो शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करते हैं। इनमें कैंडिडा, एल्बीकैंस, एक्टीनोमायसिटीज, एस्परजिलस, ब्लास्टोमाइकोसिस, राइजोपस, एबीसीडिया, सेक्सीनिया और म्यूकर शामिल हैं, जो त्वचा से जुड़े हैं।
सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि अस्पताल में स्क्रीन टेस्ट की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक सप्ताह तक सभी संसाधन जुटाए जाएंगे। इसके साथ ही टेस्ट शुरू कर दिया जाएगा। उसके बाद केवल उन्हीं मरीजों को करनाल भेजने की जरूरत पड़ेगी, जो स्क्रीन टेस्ट में फंगस से पीड़ित पाए जाते हैं। इससे मरीजों के धन और समय की भी बचत होगी।
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नागरिक अस्पताल की जांच लैब में ही बढ़ाई जाएगी सुविधा
स्क्रीन टेस्ट के लिए जिला नागरिक अस्पताल की जांच लैब में ही सुविधा बढ़ाई जाएगी। इसी लैब में पता लग जाएगा कि व्यक्ति फंगस से पीड़ित है या नहीं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस सप्ताह स्क्रीन टेस्ट से जुड़े उपकरण लैब में जुटाए जाएंगे। जैसे ही संसाधन पूरे उपलब्ध होते हैं, टेस्ट की शुरुआत की जाएगी। जिले में इस प्रकार के टेस्ट की सुविधा पहली बार मरीजों को मिलेगी।
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ये रहेगी टेस्ट की प्रक्रिया
पोटेशियम हाइड्रोक्साइड की एक बूंद संदिग्ध फंगस की ऊपरी सतह से उतारी गई पपड़ी में मिलाकर माइक्रोस्कोप के माध्यम से उसे देखा जाता है। यदि उसमें हाइफी और स्यूडो-हाइफी नामक पदार्थ मिले, तो स्क्रीन टेस्ट यह बताएगा कि संबंधित व्यक्ति को फंगस है। इसके बाद वह फंगस कौन सी है इसकी पुष्टि के लिए उसे कल्पना चावला मेडिकल करनाल भेजा जाएगा।
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ज्यादातर त्वचा से संबंधित हैं फंगस
चिकित्सकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ज्यादातर फंगस त्वचा से संबंधित पाए जाते हैं। जिस प्रकार अब ब्लैक फंगस और येलो फंगस ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। उसी प्रकार के कई फंगस त्वचा के लिए भी ज्यादा हानिकारक हैं, जो शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करते हैं। इनमें कैंडिडा, एल्बीकैंस, एक्टीनोमायसिटीज, एस्परजिलस, ब्लास्टोमाइकोसिस, राइजोपस, एबीसीडिया, सेक्सीनिया और म्यूकर शामिल हैं, जो त्वचा से जुड़े हैं।
सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि अस्पताल में स्क्रीन टेस्ट की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक सप्ताह तक सभी संसाधन जुटाए जाएंगे। इसके साथ ही टेस्ट शुरू कर दिया जाएगा। उसके बाद केवल उन्हीं मरीजों को करनाल भेजने की जरूरत पड़ेगी, जो स्क्रीन टेस्ट में फंगस से पीड़ित पाए जाते हैं। इससे मरीजों के धन और समय की भी बचत होगी।