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अब फल्गु तीर्थ पर करा सकेंगे ऑनलाइन पिंडदान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Apr 2021 12:46 AM IST
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Now online pindadan will be done at Phalgu Tirtha in Kaithal
गांव फरल स्थित महर्षि फल्गु का मंदिर। संवाद - फोटो : Kaithal
संवाद न्यूज एजेंसी
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पूंडरी। ऐतिहासिक एवं प्राचीन महर्षि फल्गु मंदिर फरल के प्रबंधन द्वारा समय की मांग के अनुरूप फल्गु तीर्थ फरल को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। फल्गु तीर्थ के लिए एक अधिकारिक वेबसाइट तैयार की जा रही है। जिसके माध्यम से श्रद्धालु फल्गु मंदिर और तीर्थ के बारे में विस्तृत जानकारी ले सकेंगे।
वेबसाइट से फल्गु तीर्थ पर ऑनलाइन या ऑफलाइन पितृकर्म श्राद्ध या किसी अन्य पितरों के लिए किए जाने वाले अनुष्ठानों की बुकिंग जैसी अनेक सुविधाएं भी मिल सकेंगी। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या के दिन का चुनाव किया गया है। सोमवती अमावस्या के दिन फल्गु मंदिर धर्मशाला के प्रांगण में फल्गु तीर्थ की वेबसाइट का लोकार्पण और आनलाइन पितृकर्म का शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके लिए फल्गु मंदिर प्रबंधन और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड मिलकर कार्य कर रहे हैं।
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कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सचिव मदन मोहन छाबडा ने बताया कि यह कदम भी फल्गु तीर्थ के वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार में मुख्य भूमिका निभायेगा। फल्गु मंदिर के पुजारी जयगोपाल शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लंदन से प्रसिद्ध रेडियो कलाकार रवि शर्मा ऑनलाइन शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सचिव मदन मोहन छाबड़ा करेंगे। ऑनलाइन पितृकर्म के लिए लुधियाना से अमित गोयल यजमान होंगे। पुरोहित के रूप में आचार्य विनायक को कैथल से विशेष आमंत्रित किया गया है। इस प्रयास में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड से उपेंद्र सिंघल का विशेष योगदान रहा है।
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यह है धार्मिक महत्व
धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की गणना सप्तक्षेत्र, बावन शक्तिपीठ, सप्त सरस्वती, इक्यावन सिद्ध क्षेत्र और चार मोक्षदायक साधनों में की जाती है। यह पावन भूमि 48 कोस की आयताकार परिधि में हरियाणा के कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, जींद एवं पानीपत जिलों में फैली है। वामन पुराण और महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र धरा पर सात वन थे और नौ नदियां प्रवाहित होती थीं। कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर तीन सौ से अधिक तीर्थ स्थान माने गए हैं। कुरुक्षेत्र के सात वनों में से एक फलकीवन महान पुण्य प्रदान करने वाला है, जो वर्तमान में फल्गु तीर्थ के नाम से सुशोभित एवं प्रसिद्ध है। कुरुक्षेत्र से 25 किलोमीटर दूर गांव फरल जिला कैथल में स्थित फल्गु तीर्थ से ही इस गांव का नाम फरल पड़ा। इस तीर्थ का वर्णन महाभारत, वामन पुराण में स्पष्ट रूप से मिलता है।
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