{"_id":"8909c885b84df957a5d2e217e1912795","slug":"no-science-in-two-school-in-kaithal","type":"story","status":"publish","title_hn":"साइंस अध्यापक नहीं होने पर बच्चों ने छोड़ा स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साइंस अध्यापक नहीं होने पर बच्चों ने छोड़ा स्कूल
अमर उजाला कैथ्ाल
Updated Tue, 01 Apr 2014 01:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथल। जिला मुख्यालय पर स्थित दो बड़े स्कूलों में अब तक विज्ञान विषय के प्राध्यापक न होने के कारण बच्चों ने स्कूल छोड़ना शुरू कर दिया है। पिछले शिक्षा सत्र में पूरा साल साइंस के प्राध्यापक न होने पर भी विद्यार्थी साल भर जैसे-तैसे पढ़े, लेकिन अब दूसरे स्कूलों की ओर रूख करना शुरू कर दिया है। वहीं कुछ ऐसे विद्यार्थी भी हैं, जो प्राइवेट स्कूलों में दाखिला नहीं ले सकते, मजबूरन वे आर्ट विषयों में दाखिला ले रहे हैं। इसके अलावा शहर के ही जाखौली अड्डा स्थित राजकीय कन्या विद्यालय में साइंस संकाय शुरू किया जा रहा है। जहां बच्चों के दाखिले तो कर दिए जाएंगे, लेकिन बच्चे साल भर साइंस विषय के प्राध्यापक के लिए तरसते रहेंगे।
दोनों स्कूलों के मुखियाओं ने बताया राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली अड्डा पर कई विषयों के अध्यापकों की आवश्यकता है। वे विद्यार्थियों को एक वर्ष से झूठा आश्वासन देकर थक चुके है। विद्यार्थी दाखिला लेने से पहले प्राध्यापक के आने के बारे में जानकारी ले रहे है। स्कूल मुखिया विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ होता न देख उनको स्कूल में अध्यापक आने के बारे में कोई ठोस जवाब नहीं दे रहे है। विद्यालय में सबसे अधिक परेशानी नॉन मेडिकल में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को आ रही है। दो स्कूल पहले ही अध्यापकों के तंगी से जूझ रहे है ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जखौली अड्डा पर भी नॉन मेडिकल की पढ़ाई शुरू करने का फैसला लिया है। बिना अध्यापकों के नॉन मेडिकल की पढ़ाई कैसे संभव होगी?
बाक्स
इन-इन विषय के अध्यापकों की आवश्यकता है-
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय- गणित 2, कामर्श-2, फिजिक्स-2, कैमिस्ट्री-2 अध्यापकों की आवश्यकता है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय- कैमिस्ट्री-5, फिजिक्स-4, गणित-1, इंगलिश-1, राजनीतिक विज्ञान-2, पंजाबी-1 अध्यापक की आवश्यकता है।
बाक्स
राजकीय कन्या स्कूल जाखौली अड्डा-कॉमर्श, अर्थशास्त्र, गणित, हिन्दी, अकांउट विषय का अध्यापकों की आवश्यकता है।
अध्यापक न आने से छात्राओं ने स्कूल छोड़ा- राजकीय कन्या स्कूल में फिजिक्स, कैमिस्ट्री व मैथ के टीचर न होने कारण छात्राओं ने स्कूल छोड़ने का निर्णय लिया है। छात्रा मोनिका, अनीता, काजल, सोनिया, सपना ने बताया कि कक्षा ग्याहरवीं में एक दिन भी कैमिस्ट्री, फिजिक्स व गणित का अध्यापक नहीं है। जिसके कारण उनको काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि पूरा-पूरा दिन कक्षा में खाली बैठकर वापस घर लौट जाती थी। जिस कारण इस वर्ष स्कूल बदलने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
छात्रा बारहवीं की छात्रा ईशु
शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। कक्षा ग्यारहवीं में पूरा वर्ष तक फिजिक्स, गणित, केमिस्ट्री की कोई कक्षा नहीं लगी है।
हिना-कक्षा में बहुत सी छात्राएं पढ़ाई में काफी अच्छी है, उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह निजी स्कूलों पैसा नहीं खर्च कर सकती है। जिस कारण उन्होंने नॉन मेडिकल छोड़ कर आटर्स में दाखिला लिया है।
छात्रा गीता ने बताया ट्यूशन पर हजारों रुपये खर्च करके फिजिक्स, गणित व कैमिस्ट्री विषय की तैयारी की है। परेशान होकर स्कूल छोड़कर किसी निजी स्कूल में दाखिला लेने का फैसला लिया है।
छात्रा सविता- शिक्षा विभाग गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। अच्छी शिक्षा तभी संभव है तब विद्यालय में अध्यापक होगा।
जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी मजबूर
इस संदर्भ में उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि शहर के स्कूलों के अध्यापकों की भारी कमी है। लेकिन जिला शिक्षा विभाग पॉलिसी के अनुसार अध्यापक को अन्य स्कूलों से डेपूटेशन पर नहीं लेकर आ सकता है। विभाग के आलाधिकारी पॉलिसी में बदलाव कर अध्यापक उपलब्ध करवा सकते है।
वहीं शिक्षा विभाग के डायरेक्टर चंद्रशेखर का कहना है आचार संहिता के चलते भर्तियों के परिणाम रुके हुए हैं। वे पता लगाएंगे कि कौन से स्कूल में दिक्कत है। विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाया जाएगा।
विज्ञापन
दोनों स्कूलों के मुखियाओं ने बताया राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली अड्डा पर कई विषयों के अध्यापकों की आवश्यकता है। वे विद्यार्थियों को एक वर्ष से झूठा आश्वासन देकर थक चुके है। विद्यार्थी दाखिला लेने से पहले प्राध्यापक के आने के बारे में जानकारी ले रहे है। स्कूल मुखिया विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ होता न देख उनको स्कूल में अध्यापक आने के बारे में कोई ठोस जवाब नहीं दे रहे है। विद्यालय में सबसे अधिक परेशानी नॉन मेडिकल में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को आ रही है। दो स्कूल पहले ही अध्यापकों के तंगी से जूझ रहे है ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जखौली अड्डा पर भी नॉन मेडिकल की पढ़ाई शुरू करने का फैसला लिया है। बिना अध्यापकों के नॉन मेडिकल की पढ़ाई कैसे संभव होगी?
विज्ञापन
बाक्स
इन-इन विषय के अध्यापकों की आवश्यकता है-
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय- गणित 2, कामर्श-2, फिजिक्स-2, कैमिस्ट्री-2 अध्यापकों की आवश्यकता है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय- कैमिस्ट्री-5, फिजिक्स-4, गणित-1, इंगलिश-1, राजनीतिक विज्ञान-2, पंजाबी-1 अध्यापक की आवश्यकता है।
बाक्स
राजकीय कन्या स्कूल जाखौली अड्डा-कॉमर्श, अर्थशास्त्र, गणित, हिन्दी, अकांउट विषय का अध्यापकों की आवश्यकता है।
अध्यापक न आने से छात्राओं ने स्कूल छोड़ा- राजकीय कन्या स्कूल में फिजिक्स, कैमिस्ट्री व मैथ के टीचर न होने कारण छात्राओं ने स्कूल छोड़ने का निर्णय लिया है। छात्रा मोनिका, अनीता, काजल, सोनिया, सपना ने बताया कि कक्षा ग्याहरवीं में एक दिन भी कैमिस्ट्री, फिजिक्स व गणित का अध्यापक नहीं है। जिसके कारण उनको काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि पूरा-पूरा दिन कक्षा में खाली बैठकर वापस घर लौट जाती थी। जिस कारण इस वर्ष स्कूल बदलने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
छात्रा बारहवीं की छात्रा ईशु
शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। कक्षा ग्यारहवीं में पूरा वर्ष तक फिजिक्स, गणित, केमिस्ट्री की कोई कक्षा नहीं लगी है।
हिना-कक्षा में बहुत सी छात्राएं पढ़ाई में काफी अच्छी है, उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह निजी स्कूलों पैसा नहीं खर्च कर सकती है। जिस कारण उन्होंने नॉन मेडिकल छोड़ कर आटर्स में दाखिला लिया है।
छात्रा गीता ने बताया ट्यूशन पर हजारों रुपये खर्च करके फिजिक्स, गणित व कैमिस्ट्री विषय की तैयारी की है। परेशान होकर स्कूल छोड़कर किसी निजी स्कूल में दाखिला लेने का फैसला लिया है।
छात्रा सविता- शिक्षा विभाग गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। अच्छी शिक्षा तभी संभव है तब विद्यालय में अध्यापक होगा।
जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी मजबूर
इस संदर्भ में उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि शहर के स्कूलों के अध्यापकों की भारी कमी है। लेकिन जिला शिक्षा विभाग पॉलिसी के अनुसार अध्यापक को अन्य स्कूलों से डेपूटेशन पर नहीं लेकर आ सकता है। विभाग के आलाधिकारी पॉलिसी में बदलाव कर अध्यापक उपलब्ध करवा सकते है।
वहीं शिक्षा विभाग के डायरेक्टर चंद्रशेखर का कहना है आचार संहिता के चलते भर्तियों के परिणाम रुके हुए हैं। वे पता लगाएंगे कि कौन से स्कूल में दिक्कत है। विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाया जाएगा।