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बरसात के इंतजार में पथराई आंखें
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Thu, 10 Jul 2014 11:30 PM IST
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कैथल। जून और जुलाई में मानसून की बेरुखी ने किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं। यदि कुछ दिन और बरसात न हुई तो किसान दूसरी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं और इसका असर धान के रकबे पर पड़ सकता है।
पिछले दस साल में इस बार अब तक जून एवं जुलाई में सबसे कम बरसात हुई है। पूर्व में यदि जून में कम बरसात होती थी तो जुलाई में इसकी भरपाई हो जाती थी, या फिर जून में अच्छी बरसात के कारण जुलाई में बरसात की कमी महसूस नहीं होती थी। लेकिन इस बार पूरा जून माह बीत जाने के बाद जुलाई माह के पहले 10 दिन में बादलों के इंतजार में आंखें पथरा गई हैं।
साल 2005 से अब तक बरसात की स्थिति
वर्ष जून जुलाई (सेंटीमीटर )
2005 273 717
2006 41 311
2007 183 259
2008 813 93
2009 2 349
2010 140 544
2011 344 167
2012 7 109
2013 350 185
2014 96 46
प्रभावित हो सकता है धान का रकबा
जिले में इस बार एक लाख 60 हजार हेक्टेयरके आसपास धान की रोपाई का अनुमान लगाया गया था। लेकिन अभी तक केवल 90 हजार हेक्टेयर में ही रोपाई हो पाई है। जुलाई माह के पहले 10 दिन में बरसात की उम्मीद थी, लेकिन इन दस दिनों में छिटपुट बरसात होने के कारण इस समय धान की रोपाई का काम लगभग रुक गया है। किसानों के लिए शुरू में रोपी गई धान को बचाने में ही एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। इस समय नहरों में भी पानी नहीं है। केवल खेतों को मिलने वाली आठ घंटे बिजली से चल रहे ट्यूबवेलों से काम चलाना असंभव नजर आ रहा है। किसान राजेश कुमार, सतनारायण, रामकुमार, संजय और बलविंद्र कुमार का कहना है कि कुछ ओर दिन बरसात नहीं हुई तो सीमित साधनों वाले किसानाें को धान की रोपाई को लेकर दोबारा से सोचना पड़ सकता है।
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कलायत और राजौंद में 10 प्रतिशत रोपाई
जिले में कलायत व राजौंद ब्लॉक में किसान बेसब्री से बरसात का इंतजार कर रहे हैं। यहां अभी तक केवल 10 प्रतिशत तक ही धान की बिजाई हो पाई है। इन क्षेत्रों में बरसात पर ज्यादातर किसान निर्भर हैं। अब क्योंकि बारिश नहीं हो रही है तो किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
पहले से रोपित धान को बचाएं किसान : वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा का कहना है कि 12 जुलाई के बाद बरसात हो सकती है। इसीलिए किसान पहले से रोपित की गई धान को बचाने का काम करें। साथ ही पनीरी को बचाने के लिए भी विशेषज्ञों से परामर्श करते रहें। बरसात नहीं होती है तो धान का रकबा प्रभावित होगा।
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पिछले दस साल में इस बार अब तक जून एवं जुलाई में सबसे कम बरसात हुई है। पूर्व में यदि जून में कम बरसात होती थी तो जुलाई में इसकी भरपाई हो जाती थी, या फिर जून में अच्छी बरसात के कारण जुलाई में बरसात की कमी महसूस नहीं होती थी। लेकिन इस बार पूरा जून माह बीत जाने के बाद जुलाई माह के पहले 10 दिन में बादलों के इंतजार में आंखें पथरा गई हैं।
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साल 2005 से अब तक बरसात की स्थिति
वर्ष जून जुलाई (सेंटीमीटर )
2005 273 717
2006 41 311
2007 183 259
2008 813 93
2009 2 349
2010 140 544
2011 344 167
2012 7 109
2013 350 185
2014 96 46
प्रभावित हो सकता है धान का रकबा
जिले में इस बार एक लाख 60 हजार हेक्टेयरके आसपास धान की रोपाई का अनुमान लगाया गया था। लेकिन अभी तक केवल 90 हजार हेक्टेयर में ही रोपाई हो पाई है। जुलाई माह के पहले 10 दिन में बरसात की उम्मीद थी, लेकिन इन दस दिनों में छिटपुट बरसात होने के कारण इस समय धान की रोपाई का काम लगभग रुक गया है। किसानों के लिए शुरू में रोपी गई धान को बचाने में ही एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। इस समय नहरों में भी पानी नहीं है। केवल खेतों को मिलने वाली आठ घंटे बिजली से चल रहे ट्यूबवेलों से काम चलाना असंभव नजर आ रहा है। किसान राजेश कुमार, सतनारायण, रामकुमार, संजय और बलविंद्र कुमार का कहना है कि कुछ ओर दिन बरसात नहीं हुई तो सीमित साधनों वाले किसानाें को धान की रोपाई को लेकर दोबारा से सोचना पड़ सकता है।
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कलायत और राजौंद में 10 प्रतिशत रोपाई
जिले में कलायत व राजौंद ब्लॉक में किसान बेसब्री से बरसात का इंतजार कर रहे हैं। यहां अभी तक केवल 10 प्रतिशत तक ही धान की बिजाई हो पाई है। इन क्षेत्रों में बरसात पर ज्यादातर किसान निर्भर हैं। अब क्योंकि बारिश नहीं हो रही है तो किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
पहले से रोपित धान को बचाएं किसान : वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा का कहना है कि 12 जुलाई के बाद बरसात हो सकती है। इसीलिए किसान पहले से रोपित की गई धान को बचाने का काम करें। साथ ही पनीरी को बचाने के लिए भी विशेषज्ञों से परामर्श करते रहें। बरसात नहीं होती है तो धान का रकबा प्रभावित होगा।