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Kaithal News: पंजाब बॉर्डर पर बसे गांवाें में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं
Thu, 26 Sep 2024 04:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 26 Sep 2024 04:53 AM IST
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गुरमीत सीड़ा गुहला-चीका। गुहला-चीका में पंजाब बॉर्डर पर बसे गांवाें में स्वास्थ्य सुविधाएं न होना बड़ा मुद्दा है। सुविधाएं न होने के चलते घग्गर के उस पार बसे गांवाें को पंजाब का रुख करना पड़ता है।
चीका क्षेत्र के गांंवों की करीब 45 किलोमीटर सीमा पंजाब से सटी है। केवल चीका में ही उपमंडल स्तर पर 30 बेड का अस्पताल है। गुहला विधानसभा में आने वाले गांव असुविधा की भेंट चढ़े हैं। स्कूल, बस, अस्पताल के लिए पंजाब पर निर्भर, हरियाणा के नेता सिर्फ वोट मांगने आते हैं।
हरियाणा के गांव पंजाब पर निर्भर ः गुहला विधानसभा के गांवों में अमर उजाला की टीम पहुंची। जहां गुहला हलका में घग्गर नदी से पार करीब दो दर्जन गांव बसते हैं। लेकिन यहां के लोग हरियाणा से अपना नाता कटा हुआ मानते हैं। क्योंकि उनको अपनी छोटी-मोटी हर मूलभूत सुविधा के लिए पंजाब में जाना पड़ता है और पंजाब पर ही आश्रित है। हैरानी की बात ये है कि चुनाव के समय राजनीतिक नेता यहां जाते हैं और वोट करने की अपील करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गुहला के नेता यहां सिर्फ वोट मांगने आते हैं। कभी उनकी समस्या के बारे में बात नहीं करते और आश्वासन देकर चले जाते हैं।
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ये गांव बसे हैं पंजाब सीमा पर ः घग्गर नदी के पार बसे गांव बुडनपुर, भूंसला, सरकपूर, हरनौली, कमहेड़ी, बौपुर, कसौली, गगड़पुर, पपराला, छन्ना, जोधावा, शौगलपुर, लंडाहेड़ी सहित करीब 23 गांव है। जो पंजाब के बॉर्डर पर बसते हैं। इन गांव के लोगों को सरकारी सुविधाओं के लिए यहां से करीब 50 किलोमीटर से ज्यादा दूर कैथल शहर में जाते हैं। जबकि अन्य सभी छोटी-मोटे सुविधाओं के लिए वह पंजाब पर आश्रित हैं। गांव का माहौल हमेशा से ऐसा ही है। क्योंकि यहां पर चुनावी समय में ही नेता वोट मांगने के लिए आते हैं। उसके बाद पांच साल के लिए उनके गांव को वो भूल जाते हैं। संवाद
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
गांव में नहीं है कोई सरकारी स्कूल
गांव में पांचवीं तक का एक सरकारी स्कूल है। इसके बाद बच्चे आगे क्लास में पढ़ना चाहें तो उन्हें दूसरे गांव में शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाना पड़ता है। वहीं, उनके गांव से एक किलोमीटर दूर से ही पंजाब शुरू हो जाता है। ऐसे में उनके बच्चे ज्यादातर पंजाब में पढ़ने के लिए जाते हैं। सरकार बड़े-बड़े दावे करती है कि उनके बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन उनको शिक्षा भी पंजाब से लेनी पड़ रही है। -जगसीर सिंह शौगलपुर।
स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पंजाब पर निर्भर हैं ग्रामीण
छोटे-मोटे काम के लिए तो पंजाब जाना पड़ता है, लेकिन गांव के आसपास कोई अस्पताल की सुविधा भी नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उन्हें कैथल जाना पड़ता है या फिर अंबाला। जो कि गांव से काफी दूर पड़ते है और इमरजेंसी जैसी सेवाओं का तो इन लोगों को पता तक नहीं है। किसी भी तरह की बीमारी के इलाज के लिए उन्हें पंजाब में जाना पड़ता है। अपने राज्य की सरकार ग्रामीणों तक पहुंच नहीं पाती, जिसके चलते मजबूर होकर पंजाब से ही सारी मदद लेनी पड़ती है। -जरनैल सिंह, स्योंमाजरा।
किसानों को भी किया अनदेखा
असुविधाओं की मार तो यहां के किसानों को भी झेलनी पड़ रही है। हालांकि हरियाणा सरकार द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि पिछले साल गुहला क्षेत्र में बाढ़ के चलते जिन किसानों की फसल तबाह हुई है। उनको मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन यहां ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अपनी फसल तीन से चार बार लगाई है। क्योंकि वहां पर घग्गर नदी के कारण बाढ़ आ गई थी। सरकार उनकी भरपाई करना तो दूर उनको एक रुपया भी मुआवजा नहीं दे पाई। जहां नेता भी उनके गांव में नहीं पहुंचते वहां कर्मचारी अधिकारी भी उनके गांव में नहीं पहुंचे।
जरनैल सिंह जैली, आईटी सेल जिला प्रभारी, भारतीय किसान यूनियन।
गांव में 12वीं के बाद बहुत ही कम बेटियां आगे पढ़ पाती है। लेकिन भाजपा सरकार ने बेटियों की शिक्षा के लिए काफी काम किया है। इसलिए गांव में बेटियां 12वीं से आगे पढ़ने में समर्थ हैं। चीका में राजकीय कन्या कॉलेज का निर्माण हुआ है। इससे शहर सहित गांवों की बेटियों को शिक्षा में सुविधा मिल रही है।
-अशोक गर्ग, भाजपा नेता, चीका।
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चीका क्षेत्र के गांंवों की करीब 45 किलोमीटर सीमा पंजाब से सटी है। केवल चीका में ही उपमंडल स्तर पर 30 बेड का अस्पताल है। गुहला विधानसभा में आने वाले गांव असुविधा की भेंट चढ़े हैं। स्कूल, बस, अस्पताल के लिए पंजाब पर निर्भर, हरियाणा के नेता सिर्फ वोट मांगने आते हैं।
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हरियाणा के गांव पंजाब पर निर्भर ः गुहला विधानसभा के गांवों में अमर उजाला की टीम पहुंची। जहां गुहला हलका में घग्गर नदी से पार करीब दो दर्जन गांव बसते हैं। लेकिन यहां के लोग हरियाणा से अपना नाता कटा हुआ मानते हैं। क्योंकि उनको अपनी छोटी-मोटी हर मूलभूत सुविधा के लिए पंजाब में जाना पड़ता है और पंजाब पर ही आश्रित है। हैरानी की बात ये है कि चुनाव के समय राजनीतिक नेता यहां जाते हैं और वोट करने की अपील करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गुहला के नेता यहां सिर्फ वोट मांगने आते हैं। कभी उनकी समस्या के बारे में बात नहीं करते और आश्वासन देकर चले जाते हैं।
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ये गांव बसे हैं पंजाब सीमा पर ः घग्गर नदी के पार बसे गांव बुडनपुर, भूंसला, सरकपूर, हरनौली, कमहेड़ी, बौपुर, कसौली, गगड़पुर, पपराला, छन्ना, जोधावा, शौगलपुर, लंडाहेड़ी सहित करीब 23 गांव है। जो पंजाब के बॉर्डर पर बसते हैं। इन गांव के लोगों को सरकारी सुविधाओं के लिए यहां से करीब 50 किलोमीटर से ज्यादा दूर कैथल शहर में जाते हैं। जबकि अन्य सभी छोटी-मोटे सुविधाओं के लिए वह पंजाब पर आश्रित हैं। गांव का माहौल हमेशा से ऐसा ही है। क्योंकि यहां पर चुनावी समय में ही नेता वोट मांगने के लिए आते हैं। उसके बाद पांच साल के लिए उनके गांव को वो भूल जाते हैं। संवाद
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
गांव में नहीं है कोई सरकारी स्कूल
गांव में पांचवीं तक का एक सरकारी स्कूल है। इसके बाद बच्चे आगे क्लास में पढ़ना चाहें तो उन्हें दूसरे गांव में शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाना पड़ता है। वहीं, उनके गांव से एक किलोमीटर दूर से ही पंजाब शुरू हो जाता है। ऐसे में उनके बच्चे ज्यादातर पंजाब में पढ़ने के लिए जाते हैं। सरकार बड़े-बड़े दावे करती है कि उनके बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन उनको शिक्षा भी पंजाब से लेनी पड़ रही है। -जगसीर सिंह शौगलपुर।
स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पंजाब पर निर्भर हैं ग्रामीण
छोटे-मोटे काम के लिए तो पंजाब जाना पड़ता है, लेकिन गांव के आसपास कोई अस्पताल की सुविधा भी नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए उन्हें कैथल जाना पड़ता है या फिर अंबाला। जो कि गांव से काफी दूर पड़ते है और इमरजेंसी जैसी सेवाओं का तो इन लोगों को पता तक नहीं है। किसी भी तरह की बीमारी के इलाज के लिए उन्हें पंजाब में जाना पड़ता है। अपने राज्य की सरकार ग्रामीणों तक पहुंच नहीं पाती, जिसके चलते मजबूर होकर पंजाब से ही सारी मदद लेनी पड़ती है। -जरनैल सिंह, स्योंमाजरा।
किसानों को भी किया अनदेखा
असुविधाओं की मार तो यहां के किसानों को भी झेलनी पड़ रही है। हालांकि हरियाणा सरकार द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि पिछले साल गुहला क्षेत्र में बाढ़ के चलते जिन किसानों की फसल तबाह हुई है। उनको मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन यहां ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अपनी फसल तीन से चार बार लगाई है। क्योंकि वहां पर घग्गर नदी के कारण बाढ़ आ गई थी। सरकार उनकी भरपाई करना तो दूर उनको एक रुपया भी मुआवजा नहीं दे पाई। जहां नेता भी उनके गांव में नहीं पहुंचते वहां कर्मचारी अधिकारी भी उनके गांव में नहीं पहुंचे।
जरनैल सिंह जैली, आईटी सेल जिला प्रभारी, भारतीय किसान यूनियन।
गांव में 12वीं के बाद बहुत ही कम बेटियां आगे पढ़ पाती है। लेकिन भाजपा सरकार ने बेटियों की शिक्षा के लिए काफी काम किया है। इसलिए गांव में बेटियां 12वीं से आगे पढ़ने में समर्थ हैं। चीका में राजकीय कन्या कॉलेज का निर्माण हुआ है। इससे शहर सहित गांवों की बेटियों को शिक्षा में सुविधा मिल रही है।
-अशोक गर्ग, भाजपा नेता, चीका।