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कुछ भी बनाकर बेच लो, यहां पकड़ने वाला कोई नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Thu, 11 Jun 2015 12:14 AM IST
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कैथल। प्रदेश में कुछ भी खाद्य पदार्थ बनाकर बेच लो, कोई पूछने वाला नहीं है। क्योंकि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए बना फूड सेफ्टी विभाग खुद ही अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है। यहां आवश्यक स्टॉफ न होने के कारण अधिकारी एवं कर्मचारी कागजों में ही कार्रवाई की खानापूर्ति कर रहे हैं। यदि सही ढंग से खाद्य पदार्थों की जांच की जाए तो मैगी जैसे कई विवादास्पद खाद्य पदार्थ सामने आ सकते हैं।
वर्ष 2011 में बना था फूड एंड ड्रग सेफ्टी विभाग
पहले स्वास्थ्य विभाग के तहत फूड एवं ड्रग इंस्पेक्टर के तौर पर काम करने वाले इन विभागीय विंगों को जोड़कर वर्ष 2011 में सरकार ने फूड एंड ड्रग सेफ्टी विभाग बनाया था। फूड इंस्पेक्टरों को जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर बना दिया गया। जिला एवं राज्य स्तर पर स्टॉफ स्वीकृत करवाने के लिए फाइल सरकार को भेज दी गई। लेकिन आज तक सरकार ने गौर नहीं किया। पहले से ही कार्यरत फूड इंस्पेक्टरों का पद नाम बदलकर केवल फूड ऑफिसर हो गया है। बाकी विभाग में कोई परिवर्तन नहीं आया है। राज्य एवं जिलास्तर पर स्टॉफ न होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं।
21 में से 10 जिलों में फूड सेफ्टी ऑफिसर नहीं
प्रदेश मेें 21 में से 10 जिलों में फूड सेफ्टी ऑफिसर नहीं हैं। इनमें कैथल, पंचकूला, यमुनानगर, भिवानी, नारनौल, रोहतक, झज्जर, मेवात, पलवल एवं सोनीपत जिले शामिल हैं। एक-एक फूड इंस्पेक्टर को साथ लगते जिलों के प्रभार दिए गए हैं। जिलास्तर पर आवश्यक क्लर्क, सहायक एवं ड्राईवर सहित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद खाली हैं। कैथल में केवल एक क्लर्क, एक सहायक के सहारे काम चल रहा है। कुरुक्षेत्र के फूड सेफ्टी ऑफिसर के पास कैथल का अतिरिक्त कार्यभार है। अन्य कार्यों के लिए सभी जिलों में सिविल सर्जन को इस विभाग का जिलास्तर पर प्रमुख अधिकारी बनाया गया है।
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छापा मारने के लिए सीएमओ से मांगनी पड़ती है गाड़ी
बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए विभाग के पास आवश्यक संसाधन नहीं हैं। जब भी छापेमार कार्रवाई करनी हो तो इसके लिए सीएमओ से गाड़ी मांगनी पड़ती है। कई बार तो गाड़ी न मिलने के कारण विभाग रेड नहीं कर पाता है। इसके अलावा कई जिलों के लिए अतिरिक्त प्रभार के कारण आवश्यक छापेमार कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। सरकार के आदेश के बावजूद कैथल में एक दिन छापा मार कर मैगी के 10 सैंपल लिए जा सके हैं।
स्टॉफ की कमी की बात ध्यान में आई है। अधिकारियों से आवश्यक जानकारी मांगी गई है। शीघ्र ही आला अधिकारियों के साथ मीटिंग करके इस मसले को उठाया जाएगा। विभाग में स्टॉफ स्वीकृत करवाकर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी, ताकि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाकर रखी जा सके।
-एस नारायणन, कमिश्नर, फूड एंड ड्रग सेफ्टी डिपार्टमेंट, चंडीगढ़।
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वर्ष 2011 में बना था फूड एंड ड्रग सेफ्टी विभाग
पहले स्वास्थ्य विभाग के तहत फूड एवं ड्रग इंस्पेक्टर के तौर पर काम करने वाले इन विभागीय विंगों को जोड़कर वर्ष 2011 में सरकार ने फूड एंड ड्रग सेफ्टी विभाग बनाया था। फूड इंस्पेक्टरों को जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर बना दिया गया। जिला एवं राज्य स्तर पर स्टॉफ स्वीकृत करवाने के लिए फाइल सरकार को भेज दी गई। लेकिन आज तक सरकार ने गौर नहीं किया। पहले से ही कार्यरत फूड इंस्पेक्टरों का पद नाम बदलकर केवल फूड ऑफिसर हो गया है। बाकी विभाग में कोई परिवर्तन नहीं आया है। राज्य एवं जिलास्तर पर स्टॉफ न होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं।
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21 में से 10 जिलों में फूड सेफ्टी ऑफिसर नहीं
प्रदेश मेें 21 में से 10 जिलों में फूड सेफ्टी ऑफिसर नहीं हैं। इनमें कैथल, पंचकूला, यमुनानगर, भिवानी, नारनौल, रोहतक, झज्जर, मेवात, पलवल एवं सोनीपत जिले शामिल हैं। एक-एक फूड इंस्पेक्टर को साथ लगते जिलों के प्रभार दिए गए हैं। जिलास्तर पर आवश्यक क्लर्क, सहायक एवं ड्राईवर सहित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद खाली हैं। कैथल में केवल एक क्लर्क, एक सहायक के सहारे काम चल रहा है। कुरुक्षेत्र के फूड सेफ्टी ऑफिसर के पास कैथल का अतिरिक्त कार्यभार है। अन्य कार्यों के लिए सभी जिलों में सिविल सर्जन को इस विभाग का जिलास्तर पर प्रमुख अधिकारी बनाया गया है।
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छापा मारने के लिए सीएमओ से मांगनी पड़ती है गाड़ी
बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए विभाग के पास आवश्यक संसाधन नहीं हैं। जब भी छापेमार कार्रवाई करनी हो तो इसके लिए सीएमओ से गाड़ी मांगनी पड़ती है। कई बार तो गाड़ी न मिलने के कारण विभाग रेड नहीं कर पाता है। इसके अलावा कई जिलों के लिए अतिरिक्त प्रभार के कारण आवश्यक छापेमार कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। सरकार के आदेश के बावजूद कैथल में एक दिन छापा मार कर मैगी के 10 सैंपल लिए जा सके हैं।
स्टॉफ की कमी की बात ध्यान में आई है। अधिकारियों से आवश्यक जानकारी मांगी गई है। शीघ्र ही आला अधिकारियों के साथ मीटिंग करके इस मसले को उठाया जाएगा। विभाग में स्टॉफ स्वीकृत करवाकर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी, ताकि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाकर रखी जा सके।
-एस नारायणन, कमिश्नर, फूड एंड ड्रग सेफ्टी डिपार्टमेंट, चंडीगढ़।