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Kaithal News: चीका नगरपलिका उपाध्यक्ष पूजा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित
Fri, 04 Jul 2025 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 04 Jul 2025 01:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका/कैथल। नगर पालिका चीका की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। उपाध्यक्ष पूजा शर्मा के खिलाफ वीरवार को पार्षदों की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। बैठक में कुल 12 पार्षद शामिल हुए और सभी ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। अध्यक्ष रेखा रानी, उपाध्यक्ष पूजा शर्मा व उनके समर्थक पार्षद बैठक से अनुपस्थित रहे।
अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर ने इसे विकास की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अगला कदम अध्यक्ष रेखा रानी को हटाने का होगा। बाजीगर ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में नगर पालिका में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और अब हर घोटाले की जांच कराई जाएगी।
महज एक वोट से बदल सकती थी तस्वीर ः विशेष बात यह रही कि अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए कम से कम 12 पार्षदों का समर्थन जरूरी था। यदि जितेंद्र कुमार का निलंबन प्रभावी रहता तो विपक्ष के पास केवल 11 वोट ही रह जाते और प्रस्ताव विफल हो जाता। ऐसे में उनके निलंबन पर लगी रोक ने पूरी बाजी पलट दी।
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गुप्त मतदान से हुआ फैसला ः बैठक की अध्यक्षता कर रहे जिला म्युनिसिपल कमिश्नर सुशील कुमार ने दोपहर 12 बजे तक सभी पार्षदों की प्रतीक्षा की। निर्धारित समय के बाद कार्रवाई प्रारंभ हुई। उपस्थित 12 पार्षदों को एक-एक बैलेट पेपर दिया गया, जिसमें पक्ष और विपक्ष के विकल्प थे। सभी ने गुप्त मतदान कर प्रस्ताव के पक्ष में मत डाले।
जश्न का माहौल, अब अगला निशाना रेखा रानी ः अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर ने समर्थकों के साथ जश्न मनाया। ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते वे अपने निवास पहुंचे, जहां लड्डू बांटे गए और पार्षदों का सम्मान किया गया। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि अब चेयरपर्सन रेखा रानी को हटाने की तैयारी की जाएगी।
गौरतलब है कि अध्यक्ष रेखा रानी पूर्व विधायक ईश्वर सिंह की पुत्रवधू हैं और कुलवंत बाजीगर लंबे समय से उन्हें पद से हटाने के प्रयास कर रहे हैं।
अध्यक्ष को हटाने के लिए कुल 14 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है, जबकि अभी विपक्ष के पास 12 वोट ही हैं। इसी कारण पहले उपाध्यक्ष को हटाने की रणनीति बनाई गई।
विरोध में रहे ये पार्षद
बैठक में वार्ड नंबर 1 से सुखबीर सिंह, वार्ड 2 से दलबीर सिंह, वार्ड 3 से अमनदीप कौर, वार्ड 5 से पुष्पा देवी, वार्ड 7 से शालू गोयल, वार्ड 8 से रेखा रानी (जो अनुपस्थित रहीं), वार्ड 9 से राजेश कुमार, वार्ड 10 से पूनम रानी, वार्ड 12 से हरीश बब्बू, वार्ड 13 से हरदीप सिंह, वार्ड 14 से जितेंद्र कुमार और वार्ड 16 से तरसेम गोयल शामिल हुए और सभी ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई 8 को
पूजा शर्मा और उनके पति भाजपा नेता राजीव शर्मा ने फोन पर जानकारी दी कि इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के स्थानीय निकाय विभाग को नोटिस जारी कर 8 जुलाई को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है।
राजीव शर्मा ने बताया कि वार्ड नंबर 14 के पार्षद जितेंद्र कुमार के खिलाफ वोट के बदले नोट मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो, अंबाला ने 20 जून को केस दर्ज किया था। इसी आधार पर 1 जुलाई को लोकल बॉडीज विभाग के निदेशक पंकज कुमार ने जितेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया था, जिससे वे मतदान के अयोग्य हो गए थे। हालांकि 2 जुलाई को हरियाणा सरकार के सचिव एवं कमिश्नर विकास गुप्ता ने उनके निलंबन पर आगामी आदेशों तक रोक लगा दी, जिससे वे मतदान में शामिल हो सके। राजीव शर्मा ने इस त्वरित निर्णय पर सवाल खड़े करते हुए इसे संदेहास्पद बताया और इसी आधार पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
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गुहला-चीका/कैथल। नगर पालिका चीका की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। उपाध्यक्ष पूजा शर्मा के खिलाफ वीरवार को पार्षदों की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। बैठक में कुल 12 पार्षद शामिल हुए और सभी ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। अध्यक्ष रेखा रानी, उपाध्यक्ष पूजा शर्मा व उनके समर्थक पार्षद बैठक से अनुपस्थित रहे।
अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर ने इसे विकास की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अगला कदम अध्यक्ष रेखा रानी को हटाने का होगा। बाजीगर ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में नगर पालिका में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और अब हर घोटाले की जांच कराई जाएगी।
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महज एक वोट से बदल सकती थी तस्वीर ः विशेष बात यह रही कि अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए कम से कम 12 पार्षदों का समर्थन जरूरी था। यदि जितेंद्र कुमार का निलंबन प्रभावी रहता तो विपक्ष के पास केवल 11 वोट ही रह जाते और प्रस्ताव विफल हो जाता। ऐसे में उनके निलंबन पर लगी रोक ने पूरी बाजी पलट दी।
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गुप्त मतदान से हुआ फैसला ः बैठक की अध्यक्षता कर रहे जिला म्युनिसिपल कमिश्नर सुशील कुमार ने दोपहर 12 बजे तक सभी पार्षदों की प्रतीक्षा की। निर्धारित समय के बाद कार्रवाई प्रारंभ हुई। उपस्थित 12 पार्षदों को एक-एक बैलेट पेपर दिया गया, जिसमें पक्ष और विपक्ष के विकल्प थे। सभी ने गुप्त मतदान कर प्रस्ताव के पक्ष में मत डाले।
जश्न का माहौल, अब अगला निशाना रेखा रानी ः अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर ने समर्थकों के साथ जश्न मनाया। ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते वे अपने निवास पहुंचे, जहां लड्डू बांटे गए और पार्षदों का सम्मान किया गया। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि अब चेयरपर्सन रेखा रानी को हटाने की तैयारी की जाएगी।
गौरतलब है कि अध्यक्ष रेखा रानी पूर्व विधायक ईश्वर सिंह की पुत्रवधू हैं और कुलवंत बाजीगर लंबे समय से उन्हें पद से हटाने के प्रयास कर रहे हैं।
अध्यक्ष को हटाने के लिए कुल 14 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है, जबकि अभी विपक्ष के पास 12 वोट ही हैं। इसी कारण पहले उपाध्यक्ष को हटाने की रणनीति बनाई गई।
विरोध में रहे ये पार्षद
बैठक में वार्ड नंबर 1 से सुखबीर सिंह, वार्ड 2 से दलबीर सिंह, वार्ड 3 से अमनदीप कौर, वार्ड 5 से पुष्पा देवी, वार्ड 7 से शालू गोयल, वार्ड 8 से रेखा रानी (जो अनुपस्थित रहीं), वार्ड 9 से राजेश कुमार, वार्ड 10 से पूनम रानी, वार्ड 12 से हरीश बब्बू, वार्ड 13 से हरदीप सिंह, वार्ड 14 से जितेंद्र कुमार और वार्ड 16 से तरसेम गोयल शामिल हुए और सभी ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई 8 को
पूजा शर्मा और उनके पति भाजपा नेता राजीव शर्मा ने फोन पर जानकारी दी कि इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के स्थानीय निकाय विभाग को नोटिस जारी कर 8 जुलाई को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है।
राजीव शर्मा ने बताया कि वार्ड नंबर 14 के पार्षद जितेंद्र कुमार के खिलाफ वोट के बदले नोट मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो, अंबाला ने 20 जून को केस दर्ज किया था। इसी आधार पर 1 जुलाई को लोकल बॉडीज विभाग के निदेशक पंकज कुमार ने जितेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया था, जिससे वे मतदान के अयोग्य हो गए थे। हालांकि 2 जुलाई को हरियाणा सरकार के सचिव एवं कमिश्नर विकास गुप्ता ने उनके निलंबन पर आगामी आदेशों तक रोक लगा दी, जिससे वे मतदान में शामिल हो सके। राजीव शर्मा ने इस त्वरित निर्णय पर सवाल खड़े करते हुए इसे संदेहास्पद बताया और इसी आधार पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।