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कुत्तों द्वारा बचाई गई नवजात बच्ची पीजीआई से ठीक होकर जिला अस्पताल पहुंची

Sat, 27 Jul 2019 10:57 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2019 10:57 PM IST
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Newborn baby rescued by dogs recovered from PGI and reached the district hospital
कैथल। पिछले सप्ताह डोगरा गेट पर एक महिला द्वारा नाले में फेंकने के बाद कुत्तों द्वारा बचाई गई बच्ची को पीजीआई से जिला अस्पताल लाया गया है। अब उसकी हालत में पहले से सुधार है। लेकिन पूरी तरह से ठीक होने तक उसे अस्पताल में ही रखा जाएगा। वहीं दूसरी ओर ढांड रोड पर स्थित शिव मंदिर के निकट आयोजित किए जा रहे कांवड़ियों की सेवा के लिए एक शिविर में दस साल का बच्चा मिला है। जो तीन दिन से शिविर में ही रह रहा था। उसे बाल संरक्षण समिति को सौंप दिया गया है। समिति ने बच्चे की पूरी जानकारी जुटाने के बाद उसे बाला आश्रम भेजने का फैसला लिया है।
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बाल संरक्षण समिति के चेयरमैन राणा बंसल एडवोकेट व सदस्य रीतू सिंगला ने बताया कि पिछले सप्ताह डोगरा गेट से जो बच्ची मिली थी, उसे शनिवार को जिला अस्पताल में दाखिल करवाया गया है। उसकी हालत में पहले से सुधार है।
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इसके अलावा ढांड रोड पर स्थित शिव मंदिर के निकट कांवड़ियों की सेवा के लिए शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें तीन दिनों से 10 साल का बच्चा बैठा था। प्रदीप नामक युवक ने इस बच्चे को पुलिस को सौंप दिया। पुलिस उसे लेकर उसके सीवन गेट स्थित घर पर पहुंची। जहां कोई ना मिलने पर बच्चे को बाल संरक्षण समिति को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि इस बच्चे से मिली जानकारी के बाद पता चला कि उसके पास बैग में उसका आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र सहित तमाम कागजात मिले हैं। जिससे संभावना है कि बच्चे को एक योजना के तहत बैग लेकर छोड़ा गया है। जानकारी जुटाने पर पता चला कि उसकी मां कमलेश देवी ने कोई ऑपरेशन करवाया हुआ है। वह सेगा में अपने किसी परिजन के यहां 9 साल के छोटे बेटे के साथ रह रही है। उसके पिता उमेद सिंह किसी कैमिस्ट की दुकान पर नौकरी करते थे। झगड़ा होने के बाद दोनों बाजू टूटने के कारण जिला अस्पताल में दाखिल है। उसके पिता ने अपने साले को शिविर में मिले 10 साल के मनप्रीत सिंह को लेने के लिए भेजा है। लेकिन बाल संरक्षण समिति ने फैसला लिया है कि जब तक पूरी बात का खुलासा नहीं हो जाता और उसके माता-पिता उसे लेकर नहीं जाते, तब तक मनप्रीत सिंह बाल आश्रम में रहेगा। समिति सदस्यों ने बताया कि बच्चे के पिता ने उसे गुजरात में उसकी बुआ के पास छोड़ने का प्रयास किया था। लेकिन उसकी बुआ ने रखने ने इंकार कर दिया। इसके बाद जिला अस्पताल से उसे एक ऑटो में बैठाकर सीवन गेट अकेले ही भेज दिया। जहां जाकर बच्चा अपना घर भूल गया और किसी तरह यहां कांवड़ियों के लिए लगाए गए शिविर में पहुंचा। तीन दिनों से वह इसी शिविर में रह रहा था।
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