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Kaithal News: प्राकृतिक खेती करने को बताया भविष्य की पूंजी
Fri, 10 Jan 2025 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 10 Jan 2025 01:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। राजौंद में वीरवार को खंड स्तरीय प्राकृतिक खेती जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर जसबीर सिंह ने बताया कि प्राकृतिक खेती भविष्य की पूंजी और शहर की खेती है, जिसे अपनाकर हम अपने परिवार समाज और देश को स्वच्छ व जहर मुक्त भोजन उपलब्ध करवा
सकते हैं।
उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से रसायन मनुष्य की भोजन श्रृंखला में पहुंच गए हैं।जिससे समाज को कैंसर जैसे भयंकर रोगों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वह सबसे पहले अपने खेत में हर रोज प्रयोग होने वाली सब्जियां तथा चारे की फसलों को प्राकृतिक खेती प्रणाली से उगाकर इन्हें जहर मुक्त करके अपना व अपने परिवार की खान-पान की आदतों में सुधार करें।
उन्होंने कहा कि रसायन मुक्त खेती आज समय की मांग है तथा किसानों के पास खुद की जमीन है इसलिए वह सौभाग्यशाली है कि वह अपना शुद्ध अनाज व सब्जियां पैदा करके खा सकते हैं। केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉक्टर दीपक कुमार ने किसानों को मिट्टी व पानी की जांच करवाने का आह्वान किया।
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उन्होंेने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हम खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती में रासायनिक खादों व कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होता,बल्कि प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए उत्पादों जैसे जीवामृत घनजीवामृत नीमास्त्र व दशपर्णी अर्क इत्यादि का उपयोग किया जाता है।
केंद्र के सब्जी वैज्ञानिक डॉक्टर प्रशांत कौशिक ने किसानों को इस मौसम में कास्त की जाने वाली सब्जियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस किसान जागरूकता शिविर में आसपास के गांव के 105 किसानों ने भाग लिया।
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राजौंद। राजौंद में वीरवार को खंड स्तरीय प्राकृतिक खेती जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर जसबीर सिंह ने बताया कि प्राकृतिक खेती भविष्य की पूंजी और शहर की खेती है, जिसे अपनाकर हम अपने परिवार समाज और देश को स्वच्छ व जहर मुक्त भोजन उपलब्ध करवा
सकते हैं।
उन्होंने कहा कि खेती में रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से रसायन मनुष्य की भोजन श्रृंखला में पहुंच गए हैं।जिससे समाज को कैंसर जैसे भयंकर रोगों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वह सबसे पहले अपने खेत में हर रोज प्रयोग होने वाली सब्जियां तथा चारे की फसलों को प्राकृतिक खेती प्रणाली से उगाकर इन्हें जहर मुक्त करके अपना व अपने परिवार की खान-पान की आदतों में सुधार करें।
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उन्होंने कहा कि रसायन मुक्त खेती आज समय की मांग है तथा किसानों के पास खुद की जमीन है इसलिए वह सौभाग्यशाली है कि वह अपना शुद्ध अनाज व सब्जियां पैदा करके खा सकते हैं। केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉक्टर दीपक कुमार ने किसानों को मिट्टी व पानी की जांच करवाने का आह्वान किया।
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उन्होंेने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हम खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती में रासायनिक खादों व कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होता,बल्कि प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए उत्पादों जैसे जीवामृत घनजीवामृत नीमास्त्र व दशपर्णी अर्क इत्यादि का उपयोग किया जाता है।
केंद्र के सब्जी वैज्ञानिक डॉक्टर प्रशांत कौशिक ने किसानों को इस मौसम में कास्त की जाने वाली सब्जियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस किसान जागरूकता शिविर में आसपास के गांव के 105 किसानों ने भाग लिया।