{"_id":"6c7c55ca54b190613bf48474270df706","slug":"mphw-arrested-for-asking-bribe","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन हजार रिश्वत लेते एमपीएचडब्यू गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन हजार रिश्वत लेते एमपीएचडब्यू गिरफ्तार
कैथल
Updated Wed, 07 May 2014 11:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गांव करोड़ा स्थित प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में कार्यरत मल्टीपर्पस हेल्थ वर्कर (एमपीएचडब्यू ) को एक व्यक्ति से जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में तीन हजार रुपये की रिश्वत मांगना महंगा पढ़ गया।
विजिलेंस की टीम ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
जानकारी के अनुसार, गांव सेरहधा निवासी मनोज कुमार को गांव करोड़ा के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र से जन्म प्रमाण पत्र लेना था। इसके लिए वह इस केंद्र में कार्यरत एमपीएचडब्ल्यू प्रदीप कुमार से मिला।
उसने जन्म प्रमाण पत्र के लिए कई चक्कर लगवाए। लेकिन उसे यह पत्र नहीं मिल पाया। बाद में इस कर्मचारी ने इस कार्य के लिए उससे तीन हजार रुपये की की मांग की। उसके पास इतने पैसे नहीं थे। जिस कारण उसने तंग आकर मामले की शिकायत विजिलेंस को कर दी। जिसके बाद योजना के तहत वह पीएचसी गया और आरोपी प्रदीप को रिश्वत की राशि सौंप दी। इस दौरान विजिलेंस की टीम ने आरोपी को दबोच लिया।
विज्ञापन
मामले में विजिलेंस के आग्रह पर नायब तहसीलदार रामचंद्र को बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। इंस्पेक्टर प्रेमचंद ने बताया कि आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। विजिलेंस टीम में इंस्पेक्टर प्रेमचंद्र, एएसआई चांदी राम और हेड कांस्टेबल मलकीत सिंह शामिल थे।
विज्ञापन
विजिलेंस की टीम ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
जानकारी के अनुसार, गांव सेरहधा निवासी मनोज कुमार को गांव करोड़ा के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र से जन्म प्रमाण पत्र लेना था। इसके लिए वह इस केंद्र में कार्यरत एमपीएचडब्ल्यू प्रदीप कुमार से मिला।
विज्ञापन
उसने जन्म प्रमाण पत्र के लिए कई चक्कर लगवाए। लेकिन उसे यह पत्र नहीं मिल पाया। बाद में इस कर्मचारी ने इस कार्य के लिए उससे तीन हजार रुपये की की मांग की। उसके पास इतने पैसे नहीं थे। जिस कारण उसने तंग आकर मामले की शिकायत विजिलेंस को कर दी। जिसके बाद योजना के तहत वह पीएचसी गया और आरोपी प्रदीप को रिश्वत की राशि सौंप दी। इस दौरान विजिलेंस की टीम ने आरोपी को दबोच लिया।
विज्ञापन
मामले में विजिलेंस के आग्रह पर नायब तहसीलदार रामचंद्र को बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। इंस्पेक्टर प्रेमचंद ने बताया कि आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। विजिलेंस टीम में इंस्पेक्टर प्रेमचंद्र, एएसआई चांदी राम और हेड कांस्टेबल मलकीत सिंह शामिल थे।