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मातृभाषा हमारी पहचान, करें गर्व : डॉ. जगमोहनो
Sun, 22 Feb 2026 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 22 Feb 2026 01:51 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। डीएवी कॉलेज चीका के पंजाबी विभाग की ओर से अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि सरकारी कॉलेज बेरिया के पंजाबी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जगमोहन सिंह ने संबोधन में कहा कि मातृभाषा हमारी पहचान, इस पर गर्व करना चाहिए।
कार्यक्रम का उद्देश्य मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करना और विद्यार्थियों में अपनी भाषा व संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना जागृत करना था। पंजाबी विभागाध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि आयोजन विद्यार्थियों में मातृभाषा के प्रति गर्व और आत्मीयता की भावना को मजबूत करने वाला रहा।
संबोधन में मुख्य अतिथि डॉ. जगमोहन सिंह ने कहा कि मातृभाषा मनुष्य की आत्मा की आवाज होती है। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और इतिहास की धरोहर है। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में विदेशी भाषाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे में अपनी मातृभाषा को सहेजना और आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी भाषा में लेखन, शोध और रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। प्राचार्य डॉ. जसबीर सिंह ने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति के बौद्धिक विकास का मूल आधार है और इसके संरक्षण से ही सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सकती है।मातृभाषा हमारी पहचान, करें गर्व : डॉ. जगमोहन
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गुहला-चीका। डीएवी कॉलेज चीका के पंजाबी विभाग की ओर से अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि सरकारी कॉलेज बेरिया के पंजाबी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जगमोहन सिंह ने संबोधन में कहा कि मातृभाषा हमारी पहचान, इस पर गर्व करना चाहिए।
कार्यक्रम का उद्देश्य मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करना और विद्यार्थियों में अपनी भाषा व संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना जागृत करना था। पंजाबी विभागाध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि आयोजन विद्यार्थियों में मातृभाषा के प्रति गर्व और आत्मीयता की भावना को मजबूत करने वाला रहा।
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संबोधन में मुख्य अतिथि डॉ. जगमोहन सिंह ने कहा कि मातृभाषा मनुष्य की आत्मा की आवाज होती है। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और इतिहास की धरोहर है। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में विदेशी भाषाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे में अपनी मातृभाषा को सहेजना और आगे बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी भाषा में लेखन, शोध और रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। प्राचार्य डॉ. जसबीर सिंह ने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति के बौद्धिक विकास का मूल आधार है और इसके संरक्षण से ही सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सकती है।मातृभाषा हमारी पहचान, करें गर्व : डॉ. जगमोहन
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