फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Mother Kothali, please make it sweet.

Kaithal News: मीठी तो कर दे री मां कोथली...

Wed, 24 Jul 2024 03:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 24 Jul 2024 03:41 AM IST
विज्ञापन
Mother Kothali, please make it sweet.
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल/राजौंद। म्हारे हरियाणा में खास तरीके से तीज का पर्व मनाया जाता है। यहां तीज की कोथली देने की परंपरा है। इस दौरान किसी भी विवाहित स्त्री के मायके की तरफ से सावन के महीने में उसकी कोथली भेजी जाती है। इस कोथली में महिला के साथ साथ उसके ससुराल के लोगों के लिए कपड़े तथा फल तथा कुछ विशेष तरह के मिठाई भेजी जाती है।

कोथली की मिष्ठान्न में विशेष तौर पर घेवर, फिरनी, आटे के बिस्कुट, बताशे, मठरी (मट्ठी) और मीठा सामान भेजा जाता है। वहीं शादी की पहली तीज नई -नवेली दुल्हन अपने मायके में मनाती है और ससुराल से उसका सिंधारा (मिठाई, कपड़े और शृंगार) आता है।
विज्ञापन


सावन का मास शुरू होते ही हर किसी महिला को सबसे ज्यादा इंतजार अपने पीहर से आने वाले कोथली का होता है। प्राचीन काल से चली आ रही मान्यता के अनुसार शादी के बाद लड़की का पहला सावन अपने मायके पक्ष में बिताना आवश्यक होता है। पहले सावन में लड़की की कोथली भी ससुराल पक्ष द्वारा भेजी जाती है। उसके बाद महिला चाहे कितनी भी आयु की क्यों न हो सावन के शुरू होते ही उसे अपने पीहर से आने वाली कोथली का बेसब्री से इंतजार रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सावन में चाहे बस हो या मैक्सी कैब हर वाहन में कोथली वालों का बोल-बाला होता है। सावन शुरू होते ही धीरे-धीरे शुरू हुई कोथली परम्परा, तीज उत्सव के समीप आते-आते पूरे यौवन पर पहुंच जाती है। वैसे तो यह सिलसिला पूरा सावन मास चलता रहता है। परंतु तीज उत्सव के बाद यह रस्म ज्यादातर वृद्ध महिलाओं के परिजनों द्वारा ही पूरी की जाती है।


नव-यौवना व अन्य महिलाएं कोथली को तीज से पहले ही पसंद करती है। इस बारे महिलाओं ने बताया कि उनके जमाने में कोथली में दिए जाने वाले अधिकतर पकवान घर पर ही पूरी शुद्धि के साथ तैयार किए जाते थे परंतु आजकल तो कोथली के पकवान के नाम पर बाजार में ज्यादातर घटिया पकवान बनाए जाते है। उन्होंने बताया कि पहले सावन की कोथली को लेकर घर में कई दिन पूर्व तैयारी शुरू कर दी जाती थी लेकिन आजकल तो चाहे घटिया हो या बढ़िया सारा कुछ बाजार में उपलब्ध है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed