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Kaithal News: पांच शताब्दी से ज्यादा पुराना श्री कोठी देवी माता मंदिर
Tue, 08 Oct 2024 04:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 08 Oct 2024 04:56 AM IST
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राजिंद्र तंवर
कैथल। शहर के पार्क रोड पर भाई उदय सिंह किला के समीप स्थित श्री छोटी देवी माता मंदिर का इतिहास पांच शताबदी से अधिक वर्ष पुराना है। मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत कालीन है।
मंदिर में नवरात्र पर्व पर यहां पर पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। शारदीय नवरात्र पर यहां पर सात दिवसीय यज्ञ आयोजित करवाया जा रहा है। अष्टमी के दिन यहां पर हजारों लोग पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं।
यह हैं मंदिर का इतिहास ः मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विनायक भारद्वाज ने बताया कि ऐतिहासिक कथा अनुसार भाई उदय सिंह के शासन में इस मंदिर की स्थापना भाई उदय सिंह ने स्वयं करवाई थी। इस मंदिर से किले व महल तक का रास्ता गुफाओं से होकर जाता था, आज भी वे रास्ते ऐसे ही खुले हैं। राजे-महाराजे मंदिरों में गुफाओं के माध्यम से पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में पहुंचते थे। बताया जाता है कि मां ने स्वयं भाई उदय सिंह को उनके सपने में आकर दर्शन दिए थे। उस समय यह मंदिर नहीं था।
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मां सपने में आने के बाद भाई उदय सिंह ने अपने महल से 200 मीटर की दूरी पर स्थित मैदान में खोदाई करवाई तो मां की प्रतिमा यहां से मिली और मंदिर की स्थापना हुई। इस मंदिर में मां को राजेश्वरी के नाम से जाना जाता था। उस समय राजे महाराजाओं की देवी इसे कह जाता था। सप्तमी के दिन जो मेला लगता है, उसकी शुुरुआत भी तभी से हुई थी।
सभी मनोकामनाएं होती पूर्ण ः श्री छोटी देवी माता मंदिर के पुजारी विनायक भारद्वाज ने बताया कि इस समय शारदीय नवरात्र पर्व चल रहे हैं। पर्व को लेकर लोगों में विशेष उत्साह है। नवरात्र पर्व पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जो भी भक्त यहां माता टेककर मन्नतें मांगता है, उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। नवरात्र पर सप्तमी व अष्टमी के दिन यहां मेला लगता है। संवाद
वर्तमान में यह है स्थिति
यह मंदिर छोटी ईंटों से बनाया गया है। लेंटर से 51 फीट तक मंदिर ऊपर उठाया गया है। मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। इसके साथ ही मंदिर में भगवान श्री राम, शिव मंदिर, मां काली और भगवान हनुमान की प्रतिमा भी स्थापित हैं। मंदिर में स्थापित मां के दरबार के पीछे एक हाल भी स्थापित किया हैं, जहां पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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कैथल। शहर के पार्क रोड पर भाई उदय सिंह किला के समीप स्थित श्री छोटी देवी माता मंदिर का इतिहास पांच शताबदी से अधिक वर्ष पुराना है। मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत कालीन है।
मंदिर में नवरात्र पर्व पर यहां पर पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। शारदीय नवरात्र पर यहां पर सात दिवसीय यज्ञ आयोजित करवाया जा रहा है। अष्टमी के दिन यहां पर हजारों लोग पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं।
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यह हैं मंदिर का इतिहास ः मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विनायक भारद्वाज ने बताया कि ऐतिहासिक कथा अनुसार भाई उदय सिंह के शासन में इस मंदिर की स्थापना भाई उदय सिंह ने स्वयं करवाई थी। इस मंदिर से किले व महल तक का रास्ता गुफाओं से होकर जाता था, आज भी वे रास्ते ऐसे ही खुले हैं। राजे-महाराजे मंदिरों में गुफाओं के माध्यम से पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में पहुंचते थे। बताया जाता है कि मां ने स्वयं भाई उदय सिंह को उनके सपने में आकर दर्शन दिए थे। उस समय यह मंदिर नहीं था।
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मां सपने में आने के बाद भाई उदय सिंह ने अपने महल से 200 मीटर की दूरी पर स्थित मैदान में खोदाई करवाई तो मां की प्रतिमा यहां से मिली और मंदिर की स्थापना हुई। इस मंदिर में मां को राजेश्वरी के नाम से जाना जाता था। उस समय राजे महाराजाओं की देवी इसे कह जाता था। सप्तमी के दिन जो मेला लगता है, उसकी शुुरुआत भी तभी से हुई थी।
सभी मनोकामनाएं होती पूर्ण ः श्री छोटी देवी माता मंदिर के पुजारी विनायक भारद्वाज ने बताया कि इस समय शारदीय नवरात्र पर्व चल रहे हैं। पर्व को लेकर लोगों में विशेष उत्साह है। नवरात्र पर्व पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जो भी भक्त यहां माता टेककर मन्नतें मांगता है, उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। नवरात्र पर सप्तमी व अष्टमी के दिन यहां मेला लगता है। संवाद
वर्तमान में यह है स्थिति
यह मंदिर छोटी ईंटों से बनाया गया है। लेंटर से 51 फीट तक मंदिर ऊपर उठाया गया है। मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। इसके साथ ही मंदिर में भगवान श्री राम, शिव मंदिर, मां काली और भगवान हनुमान की प्रतिमा भी स्थापित हैं। मंदिर में स्थापित मां के दरबार के पीछे एक हाल भी स्थापित किया हैं, जहां पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।