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Kaithal News: पीडल में नहर का 30 फीट से अधिक हिस्सा बहा
Thu, 06 Feb 2025 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 06 Feb 2025 01:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। पीडल गांव के पास से गुजरने वाली उरलाना माइनर को नहरी विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर बजरी व सीमेंट से पक्का किया था। इसमें मंगलवार को पहली बार पानी छोड़ा गया था लेकिन नहर पहले उसका दबाव भी नहीं झेल सकी। नतीजा, पीडल व थेह नेवल के बीच में नहर का 30 फीट से अधिक हिस्सा पानी में बह गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, नहर का पानी खेतों में घुसने से लगभग 100 में खड़ी गेहूं की फसल, पशुओं का चारा व सब्जियां बर्बाद हो गई है।
बुधवार सुबह जब ग्रामीण खेतों में गए तो उन्हें नहर के टूटे होने का पता चला। नहर के टूटने की सूचना मिलते ही दर्जनों ग्रामीण मौके पर पहुंचे और नहरी विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। काफी देर तक जब नहरी विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे तो ग्रामीण अपने स्तर पर नहर के टूटे हुए हिस्से का पाटने में जुट गए।
सूचना मिलते ही नहर को पक्का करने के काम में लगे कुछ मजदूर भी मौके पर पहुंच गए ग्रामीणों के साथ मिलकर लगभग आठ घंटे की मशक्कत के नहर के टूटे हुए हिस्से का पाटा।
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ग्रामीण अलबाद सिंह, भरथू, धीरा, रोहताश, अनुज, पाली, प्रेम, सिंगारा आदी ने बताया कि विभाग ने नहर को पक्का करने पर लाखों खर्च किए लेकिन सब व्यर्थ रहा। आरोप लगाते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि नहर के निर्माण में घटिया स्तर का सीमेंट व निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि नहर का पानी खेतों में घुसने से लगभग 100 में खड़ी गेहूं की फसल, पशुओं का चारा व सब्जियां बर्बाद हो गई है। ग्रामीणों ने सरकार से पानी से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा देने व नहर के निर्माण में बरती गई सामग्री की जांच करवाने की मांग उठाई है।
पिछले काफी समय से नहर का सीसी से पक्का करने का काम चल रहा था। इस दौरान चूहों ने नहर में बिल बना दिए होंगे जिसके चलते नहर टूट गई। विभाग के जेई व अन्य कर्मचारियों को तुरंत मौके पर पहुंचने के आदेश दिए गए हैं। - अजमेर सिंह, एसडीओ नहरी विभाग गुहला-चीका।
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गुहला-चीका। पीडल गांव के पास से गुजरने वाली उरलाना माइनर को नहरी विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर बजरी व सीमेंट से पक्का किया था। इसमें मंगलवार को पहली बार पानी छोड़ा गया था लेकिन नहर पहले उसका दबाव भी नहीं झेल सकी। नतीजा, पीडल व थेह नेवल के बीच में नहर का 30 फीट से अधिक हिस्सा पानी में बह गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, नहर का पानी खेतों में घुसने से लगभग 100 में खड़ी गेहूं की फसल, पशुओं का चारा व सब्जियां बर्बाद हो गई है।
बुधवार सुबह जब ग्रामीण खेतों में गए तो उन्हें नहर के टूटे होने का पता चला। नहर के टूटने की सूचना मिलते ही दर्जनों ग्रामीण मौके पर पहुंचे और नहरी विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। काफी देर तक जब नहरी विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे तो ग्रामीण अपने स्तर पर नहर के टूटे हुए हिस्से का पाटने में जुट गए।
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सूचना मिलते ही नहर को पक्का करने के काम में लगे कुछ मजदूर भी मौके पर पहुंच गए ग्रामीणों के साथ मिलकर लगभग आठ घंटे की मशक्कत के नहर के टूटे हुए हिस्से का पाटा।
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ग्रामीण अलबाद सिंह, भरथू, धीरा, रोहताश, अनुज, पाली, प्रेम, सिंगारा आदी ने बताया कि विभाग ने नहर को पक्का करने पर लाखों खर्च किए लेकिन सब व्यर्थ रहा। आरोप लगाते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि नहर के निर्माण में घटिया स्तर का सीमेंट व निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि नहर का पानी खेतों में घुसने से लगभग 100 में खड़ी गेहूं की फसल, पशुओं का चारा व सब्जियां बर्बाद हो गई है। ग्रामीणों ने सरकार से पानी से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा देने व नहर के निर्माण में बरती गई सामग्री की जांच करवाने की मांग उठाई है।
पिछले काफी समय से नहर का सीसी से पक्का करने का काम चल रहा था। इस दौरान चूहों ने नहर में बिल बना दिए होंगे जिसके चलते नहर टूट गई। विभाग के जेई व अन्य कर्मचारियों को तुरंत मौके पर पहुंचने के आदेश दिए गए हैं। - अजमेर सिंह, एसडीओ नहरी विभाग गुहला-चीका।