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रूस-यूक्रेन युद्ध: बच्चों को खाने के लाले, परिजनों की अटकीं सांसें, कैथल के करीब 100 विद्यार्थी फंसे
Sat, 26 Feb 2022 03:57 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 26 Feb 2022 03:57 PM IST
सार
यूक्रेन से पहले ऑफलाइन कक्षाओं के कारण छात्र नहीं आ सके। फिर महंगे टिकट तो बाद में फ्लाइट न होने के कारण छात्र वहां फंसे हैं।
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यूक्रेन में एक एयरपोर्ट।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
यूक्रेन में फंसे विद्यार्थी पहले ऑनलाइन कक्षाओं के फेर में और अब टिकट महंगे और फ्लाइट न मिलने के कारण परेशान हो रहे हैं। हरियाणा के कैथल से करीब 100 से अधिक विद्यार्थी यूक्रेन में थे, जिसमें से मुश्किल से 30 से 35 विद्यार्थी वापस पहुंचे हैं, जबकि अन्य विद्यार्थियों के अभिभावकों की सांसें अटकी हुई हैं। बच्चों के पास खाने का सामान खत्म होने की जानकारी मिलने से भी परिजनों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
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अभिभावकों ने बताया कि युद्ध की आशंकाओं के बाद भी पहले बच्चों को विश्वविद्यालयों में ही बुलाकर कक्षाएं लगाने के लिए कहा गया। मांगों के बावजूद विश्वविद्यालयों की ओर से ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति नहीं दी गई। बढ़ते दबाव के कारण पिछले सप्ताह जब ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति दी गई, तब तक सामान्य फ्लाइट्स के टिकट तीन गुने तक महंगे हो गए।
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कंसल्टेंट गुरदेव सैनी चीका ने कहा कि काफी बच्चों ने निकलने का प्रयास किया, लेकिन कइयों को टिकट नहीं मिल पाई। अब महंगी टिकट मिल रही है। विश्वविद्यालय ऑनलाइन की अनुमति दे देते तो बच्चे पहले निकल आते। अभी जिले से गए हुए बच्चों में से 70 प्रतिशत बच्चे यूक्रेन में हैं। ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बच्चों के परिजनों की चिंता स्वाभाविक है।
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खारकीव, कीव और उझोर्ड में फंसे विद्यार्थी
अभिभावकों ने बताया कि जिले के अधिकतर युवा रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण खारकीव, कीव और उझोर्ड जैसे शहरों में फंसे हुए हैं। कुछ युवाओं की 24 फरवरी की फ्लाइट थी, इसके लिए वे कीव के लिए बसों में चल पड़े थे। कुछ बच्चे अभी रास्ते में हैं और कुछ कीव पहुंच चुके हैं। कुछ की फ्लाइट 26 की है।
जनकपुरी कॉलोनी निवासी बलजीत मोर ने बताया कि उनकी बेटी इनायत मोर खारकीव विश्वविद्यालय में एमबीबीएस के पांचवें वर्ष में शिक्षा ग्रहण कर रही है। फोन पर हुई बातचीत में इनायत ने बताया है कि उनके पास राशन पानी खत्म हो चुका है। सबसे ज्यादा विद्यार्थी खारकीव में फंसे हुए हैं। स्टोरों पर युवाओं की लाइनें लगी हैं। नेट कभी भी बंद हो सकता है और वहां स्थिति काफी खराब है।
सेक्टर 20 निवासी दलबीर सिंह ने बताया कि उसकी बेटी शिवानी चौथे वर्ष में एमबीबीएस की शिक्षा ग्रहण कर रही है। 24 फरवरी को उसकी वतन वापसी के लिए फ्लाइट थी। शिवानी ने फोन करके बताया है कि सुबह ही वे खारकीव से कीव के लिए चली थी। रास्ते में पता चला कि एयरपोर्ट बंद हो गया है। खारकीव में रूस की सेना आ चुकी है। इस समय वह अन्य युवाओं के साथ सड़क पर है। वहां के राजदूत ने भी ये कहा है कि या तो वापस अपने संस्थानों में चले जाएं या फिर किसी सुरक्षित जगह आश्रय ले लें।
सेरधा निवासी अमरजीत ने बताया कि उसका बेटा अजय उझोर्ड विश्वविद्यालय में एमबीबीएस पांचवें वर्ष का छात्र है। अजय ने फोन करके बताया है कि वहां स्थिति काफी गंभीर है। सारी दुकानें बंद पड़ी हैं। उनके पास पैसे भी खत्म हो चुके हैं। अमरजीत ने बताया कि उसने अजय के खाते में पैसे डलवाए। वहां एटीएम खुले तो हैं, लेकिन उनमें नकदी नहीं बची है।
सेक्टर-19 निवासी कुलदीप पूनिया ने बताया कि उनका बेटा अनुराग पूनिया चौथे वर्ष की पढ़ाई खारकीव में कर रहा है। उसने फोन करके बताया है कि वह अन्य विद्यार्थियों के साथ सुबह से दूतावास के बाहर खड़ा है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। खाने तक के लाले हैं। अब उनके पास कुछ नहीं बचा है। अगर स्थिति यही रही तो दिक्कतें और ज्यादा बढ़ जाएंगी।
एयरपोर्ट सुनसान
कंसल्टेंट गुरदेव सैनी ने कहा कि बच्चों ने जानकारी दी है कि एयरपोर्ट सुनसान हैं। रूस की सेना ने कई एयरपोर्ट पर बमबारी की है, जो उनके एरिया के निकट हैं। जिस कारण फ्लाइट्स को रद्द कर दिया गया है। विशेष फ्लाइट भेजकर भारत सरकार बच्चों को ला रही है।
अभिभावकों ने डीसी से लगाई गुहार
यूक्रेन में फंसे हुए जिले के युवाओं को सकुशल भारत वापस लाने की मांग को लेकर युवाओं के परिजनों ने गुरुवार को डीसी से मुलाकात की। साथ ही ज्ञापन सौंपकर बच्चों को सकुशल वापस लाने की गुहार लगाई।
डीसी को सरकार के नाम ज्ञापन देने पहुंचे बलजीत मोर, बीरबल, शीशपाल, शमशेर सिंह, मनोज कुमार, राजकुमार, घन श्याम व अमरजीत सिंह ने बताया कि उनके बेटे व बेटियां यूक्रेन के खारकीव व उझोर्ड विश्वविद्यालय में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए हुए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की सुरक्षा सनिश्चित कर वापस लाने की मांग की है।
डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि भारत सरकार ने कुछ इमरजेंसी नंबर जारी किए हैं। उन पर अभिभावक संपर्क कर सकते हैं। कुछ अभिभावक यहां मिले हैं। उनकी बात भी सरकार तक पहुंचा दी गई है। ये नंबर हैं प्लस-380997300483, 380997300428, 38093980327, 380635917881, 380395046170...