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Kaithal News: मोदी जी, सार्वजनिक परिवहन में कैसे चलें लंबे रूटों पर नहीं चल रहीं रोडवेज की बसें
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कैथल के बस अड्डे पर बसों का इंतजार करते यात्री। संवाद
- फोटो : Archive
कैथल। प्रधानमंत्री ने लोगों से जितना हो सके सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की अपील की है लेकिन रोडवेज के बेड़े में बसों का टोटा है। ग्रामीण से लेकर लंबे रूट पर बसें नदारद हैं। जिले के 60 गांव तो ऐसे हैं, जहां दिन में बसों के फेरे नहीं हैं। केवल सुबह-शाम ही बसें मिलती हैं। बीकानेर, हिसार, दिल्ली, चंडीगढ़ के लिए शाम को बसें नहीं मिलती। ऐसे में लोग मजबूरी में निजी वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य हैं।
लोग चाहकर भी पीएम की अपील का पालन नहीं कर पा रहे, क्योंकि धरातल पर विभाग के पास सार्वजनिक साधन ही उपलब्ध नहीं हैं। सुचारू संचालन के लिए डिपो को करीब 250 से अधिक बसों की आवश्यकता है लेकिन वर्तमान में डिपो के पास केवल 156 बसें ही उपलब्ध हैं। 94 बसों की डिपो को अभी जरूरत है। इनमें भी लगभग 90 बसें बीएस तीन काफी पुरानी हो चुकी हैं, जो बीच रास्ते खराब हो रही हैं।
25 बसें नई मिली, 65 जर्जर हो गई : पिछले एक वर्ष के दौरान विभाग को करीब 25 नई बसें मिलीं लेकिन इसी अवधि में 65 बसें जर्जर होकर बेड़े से बाहर हो गईं। इसका सीधा असर यात्रियों की सुविधा पर पड़ रहा है। इससे लोगों में रोष है। सबसे अधिक असर मुख्य मार्गों से दूर स्थित गांवों में देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों में सुबह और शाम के समय ही बसें पहुंच रही हैं, जबकि दोपहर के समय बस सेवा लगभग बंद है। मजबूरी में ग्रामीणों को निजी वाहन ऑटो, गाड़ी व अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। निजी वाहन चालक भी स्थिति का फायदा उठाकर यात्रियों से मनमानी किराया वसूल रहे हैं। कई बार दो- दो घंटे तक निजी वाहन भी नहीं मिल पाते हैं।
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लोग चाहकर भी पीएम की अपील का पालन नहीं कर पा रहे, क्योंकि धरातल पर विभाग के पास सार्वजनिक साधन ही उपलब्ध नहीं हैं। सुचारू संचालन के लिए डिपो को करीब 250 से अधिक बसों की आवश्यकता है लेकिन वर्तमान में डिपो के पास केवल 156 बसें ही उपलब्ध हैं। 94 बसों की डिपो को अभी जरूरत है। इनमें भी लगभग 90 बसें बीएस तीन काफी पुरानी हो चुकी हैं, जो बीच रास्ते खराब हो रही हैं।
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25 बसें नई मिली, 65 जर्जर हो गई : पिछले एक वर्ष के दौरान विभाग को करीब 25 नई बसें मिलीं लेकिन इसी अवधि में 65 बसें जर्जर होकर बेड़े से बाहर हो गईं। इसका सीधा असर यात्रियों की सुविधा पर पड़ रहा है। इससे लोगों में रोष है। सबसे अधिक असर मुख्य मार्गों से दूर स्थित गांवों में देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों में सुबह और शाम के समय ही बसें पहुंच रही हैं, जबकि दोपहर के समय बस सेवा लगभग बंद है। मजबूरी में ग्रामीणों को निजी वाहन ऑटो, गाड़ी व अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। निजी वाहन चालक भी स्थिति का फायदा उठाकर यात्रियों से मनमानी किराया वसूल रहे हैं। कई बार दो- दो घंटे तक निजी वाहन भी नहीं मिल पाते हैं।

कैथल के बस अड्डे पर बसों का इंतजार करते यात्री। संवाद- फोटो : Archive
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