फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Management of stubble is being done by ex situ and in situ techniques

एक्स सीटू और इन सीटू तकनीक से किया जा रहा है पराली का प्रबंध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 11:18 PM IST
विज्ञापन
Management of stubble is being done by ex situ and in situ techniques
Management of stubble is being done by ex situ and in situ techniques - फोटो : Kaithal
फसल अवशेष प्रबंधन में अब चुनौतियां काफी कम रह गई है। कई विकल्पों के साथ फसल अवशेष प्रबंधन से समाधान कर कमाई भी की जा सकती है। पिछले कई सालों से फसल अवशेष खासकर धान की पराली, प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों के लिए चुनौती समझी जाती थी। लेकिन अब किसान पराली से मुनाफा कमा रहे हैं।
विज्ञापन

डीसी प्रदीप दहिया ने फसल अवशेष प्रबंधन की चुनौतियों और समाधान को लेकर बताया कि अवशेष प्रबंधन की चुनौती को दूर करने के लिए कैथल में व्यापक जिला कार्य योजना बनाई गई है। योजना के तहत 9.60 लाख टन पराली का प्रबंधन किया जाएगा। इसके लिए एक्स सीटू और इन सीटू खरीफ के दौरान जिला में लगभग 3 लाख 87 हजार 500 एकड़ में धान की रोपाई की गई है और इसकी कटाई से 2.5 टन प्रति एकड़ के हिसाब से कुल 9.60 लाख टन अवशेष बचने की संभावना है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि जिला कार्य योजना के अनुसार 2 तकनीकों के माध्यम से इस पराली का प्रबंधन एवं समाधान करने की योजना है। पहली तकनीक के माध्यम से लगभग 4 लाख 41 हजार 800 टन पराली का प्रबंधन किया जाना है। इस तकनीक के तहत जिला में उपलब्ध 200 बेलर मशीनों के माध्यम से पराली की गांठें बनाई जाएंगी और इन गांठों को कांगथली सुखबीर एग्रो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, पिहोवा सेंसंज पेपर मिल प्राइवेट लिमिटड सहित 15 चारा बनाने वाली यूनिटों और अन्य पराली खरीदने वाली इकाईयों को उपलब्ध करवाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

दूसरे विकल्प के तौर पर कस्टम हायरिंग सेंटर की मदद से पराली प्रबंधन किया जाएगा। जिला में 586 कस्टम हायरिंग सेंटर कार्य कर रहे हैं, जिनमें 6 हजार से भी अधिक मशीनें लगाई गई हैं। मशीनों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी भी उपलब्ध करवाई गई है। इस विकल्प के तहत प्रशासन की 5 लाख 19 हजार 200 टन फसल अवशेष के प्रबंधन की योजना है।

कृषि एवं किसान विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि बेलर से पराली की गांठे बनवाकर फसल अवशेष प्रबंधन करवाने के इच्छुक किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ सहायता राशि बैंक खातों में दी जा रही हैं। पराली प्रबंधन के लिए पूसा के डि-कंपोजर का प्रयोग करने वाले किसानों की भी सहायता की जा रही है। इसके लिए कंपनी के माध्यम से निशुल्क डि-कंपोजर उपलब्ध करवाया जाएगा। अभी तक लगभग 62 हजार किसानों ने इसके लिए पंजीकरण करवा लिया है। जिले में वर्ष 2016 में 1748, 2017 में 1513, 2018 में 1292, 2019 में 1258 और 2020 में 868 पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। पिछले वर्ष 2020 में वर्ष 2019 की तुलना में 32 प्रतिशत आग के मामलों में कमी आई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed