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Kaithal News: कार मरम्मत में खर्च 1.59 लाख का करें भुगतान
Tue, 23 Jun 2026 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 23 Jun 2026 12:30 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कार दुर्घटना के बाद बीमा क्लेम रोकना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग कैथल ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 1.59 लाख रुपये की क्लेम राशि देने के आदेश दिए है। कंपनी की ओर से 10 हजार रुपये मुआवजा व मुकदमा खर्च भी अदा करना होगा।
आयोग ने भुगतान 45 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की अध्यक्ष नीलम कश्यप तथा सदस्य सुनील मोहन त्रिखा और हरीशा मेहता की पीठ ने फैसला सुनाया है।
शिकायतकर्ता शिवम ने आयोग में दायर याचिका में बताया कि उनकी फोर्ड फिगो एस्पायर कार का बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था। फरवरी 2023 में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिससे वाहन को गंभीर क्षति पहुंची। दुर्घटना के बाद वाहन को क्रेन की सहायता से वर्कशॉप ले जाया गया और सर्वेयर की सहमति के बाद उसकी मरम्मत करवाई गई।
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वाहन की मरम्मत पर 1 लाख 59 हजार 143 रुपये खर्च हुए, लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम का भुगतान करने से इन्कार कर दिया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना के समय चालक शराब के नशे में था और वाहन का उपयोग टैक्सी के रूप में किया जा रहा था, जो बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। कंपनी ने दुर्घटना की सूचना देने और एफआईआर दर्ज कराने में देरी का मुद्दा भी उठाया।
आरोपों को साबित नहीं कर सकी बीमा कंपनी
आयोग ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद पाया कि बीमा कंपनी अपने आरोपों को साबित नहीं कर सकी। आयोग ने कहा कि चालक के नशे में होने संबंधी कोई रक्त या अन्य रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकेंगी।
इसी प्रकार वाहन के व्यावसायिक उपयोग का भी कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण नहीं दिया गया। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल एफआईआर दर्ज कराने या बीमा कंपनी को सूचना देने में देरी के आधार पर वास्तविक बीमा दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।
बीमा कंपनी ने सर्वेयर रिपोर्ट के आधार पर अपनी देनदारी 64,952 रुपये बताई थी, लेकिन आयोग ने कहा कि सर्वेयर की रिपोर्ट अंतिम और बाध्यकारी नहीं होती। उपलब्ध बिलों और अन्य दस्तावेजों से यह सिद्ध हुआ कि शिकायतकर्ता ने वाहन की मरम्मत पर 1.59 लाख रुपये से अधिक खर्च किए थे।
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कैथल। कार दुर्घटना के बाद बीमा क्लेम रोकना बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग कैथल ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 1.59 लाख रुपये की क्लेम राशि देने के आदेश दिए है। कंपनी की ओर से 10 हजार रुपये मुआवजा व मुकदमा खर्च भी अदा करना होगा।
आयोग ने भुगतान 45 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की अध्यक्ष नीलम कश्यप तथा सदस्य सुनील मोहन त्रिखा और हरीशा मेहता की पीठ ने फैसला सुनाया है।
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शिकायतकर्ता शिवम ने आयोग में दायर याचिका में बताया कि उनकी फोर्ड फिगो एस्पायर कार का बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था। फरवरी 2023 में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिससे वाहन को गंभीर क्षति पहुंची। दुर्घटना के बाद वाहन को क्रेन की सहायता से वर्कशॉप ले जाया गया और सर्वेयर की सहमति के बाद उसकी मरम्मत करवाई गई।
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वाहन की मरम्मत पर 1 लाख 59 हजार 143 रुपये खर्च हुए, लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम का भुगतान करने से इन्कार कर दिया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना के समय चालक शराब के नशे में था और वाहन का उपयोग टैक्सी के रूप में किया जा रहा था, जो बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। कंपनी ने दुर्घटना की सूचना देने और एफआईआर दर्ज कराने में देरी का मुद्दा भी उठाया।
आरोपों को साबित नहीं कर सकी बीमा कंपनी
आयोग ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद पाया कि बीमा कंपनी अपने आरोपों को साबित नहीं कर सकी। आयोग ने कहा कि चालक के नशे में होने संबंधी कोई रक्त या अन्य रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकेंगी।
इसी प्रकार वाहन के व्यावसायिक उपयोग का भी कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण नहीं दिया गया। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल एफआईआर दर्ज कराने या बीमा कंपनी को सूचना देने में देरी के आधार पर वास्तविक बीमा दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।
बीमा कंपनी ने सर्वेयर रिपोर्ट के आधार पर अपनी देनदारी 64,952 रुपये बताई थी, लेकिन आयोग ने कहा कि सर्वेयर की रिपोर्ट अंतिम और बाध्यकारी नहीं होती। उपलब्ध बिलों और अन्य दस्तावेजों से यह सिद्ध हुआ कि शिकायतकर्ता ने वाहन की मरम्मत पर 1.59 लाख रुपये से अधिक खर्च किए थे।