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दिन भर चलती रही माजरा के भाजपा में जाने की चर्चा
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पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा के दिन भर भारतीय जनता पार्टी में ज्वाइन किए जाने की चर्चाएं चलती रहीं। उनके समर्थक भी दिन भर इस बात की पुष्टि करने का प्रयास करते नजर आए। लेकिन पूर्व मुख्य संसदीय सचिव से किसी का संपर्क नहीं हो पाया। मंगलवार रात को मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद दिन भर ये कयास लगाए जाते रहे।
ताऊ देवीलाल के जमाने से ही लोकदल परिवार से जुड़े पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा तीन बार विधायक व एक बार मुख्य संसदीय सचिव रहे। वे पुराने पाई हल्का से वर्ष 1996 में अपने राजनीतिक गुरु पूर्व मंत्री स्व. नर सिंह ढांडा को पराजित किया था। इसके बाद वर्ष 2000 में पूर्व मंत्री स्व. तेजेंद्रपाल माजरा को पराजित किया। इसके बाद वर्ष 2009 में पाई हल्का खत्म करके कलायत हल्का बनाया गया। जहां से रामपाल माजरा ने पूर्व मंत्री तेजेंद्रपाल मान को पराजित किया था। इसके बाद भी पूर्व मुख्य संसदीय सचिव ने वर्ष 2014 में भी इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ा था और दूसरे नंबर पर रहे थे। इनेलो के कद्दावर नेताओं में शुमार माजरा चौटाला परिवार में काफी नजदीकी रखते थे। लेकिन अजय चौटाला व उनके पुत्रों से रामपाल माजरा की नहीं पटी। जिस कारण कैथल में हुई रैली के बाद से माजरा व दुष्यंत-दिग्विजय का विवाद जगजाहिर हो गया। इसके बाद तलखी बढ़ती गई। दुष्यंत द्वारा अलग पार्टी बनाए जाने के बाद माजरा व अशोक अरोड़ा इनेलो में अहम स्थान रखते हैं। अब इनके भाजपा में जाने की चर्चाओं से राजनीतिक बाजार दिन भर गर्म रहा। इसके लिए माजरा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल लगातार बंद आता रहा।
दूसरी ओर कलायत में भाजपा की टिकट की तैयारी कर रहे भाजपा नेता भी दिन भर इस राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे रहे। लोग इस बात की पुष्टि करने का प्रयास करते रहे कि क्या वाकई पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा व अशोक अरोड़ा की मंगलवार रात को सीएम से करीब 45 मिनट की मुलाकात हुई है या नहीं।
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ताऊ देवीलाल के जमाने से ही लोकदल परिवार से जुड़े पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा तीन बार विधायक व एक बार मुख्य संसदीय सचिव रहे। वे पुराने पाई हल्का से वर्ष 1996 में अपने राजनीतिक गुरु पूर्व मंत्री स्व. नर सिंह ढांडा को पराजित किया था। इसके बाद वर्ष 2000 में पूर्व मंत्री स्व. तेजेंद्रपाल माजरा को पराजित किया। इसके बाद वर्ष 2009 में पाई हल्का खत्म करके कलायत हल्का बनाया गया। जहां से रामपाल माजरा ने पूर्व मंत्री तेजेंद्रपाल मान को पराजित किया था। इसके बाद भी पूर्व मुख्य संसदीय सचिव ने वर्ष 2014 में भी इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ा था और दूसरे नंबर पर रहे थे। इनेलो के कद्दावर नेताओं में शुमार माजरा चौटाला परिवार में काफी नजदीकी रखते थे। लेकिन अजय चौटाला व उनके पुत्रों से रामपाल माजरा की नहीं पटी। जिस कारण कैथल में हुई रैली के बाद से माजरा व दुष्यंत-दिग्विजय का विवाद जगजाहिर हो गया। इसके बाद तलखी बढ़ती गई। दुष्यंत द्वारा अलग पार्टी बनाए जाने के बाद माजरा व अशोक अरोड़ा इनेलो में अहम स्थान रखते हैं। अब इनके भाजपा में जाने की चर्चाओं से राजनीतिक बाजार दिन भर गर्म रहा। इसके लिए माजरा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल लगातार बंद आता रहा।
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दूसरी ओर कलायत में भाजपा की टिकट की तैयारी कर रहे भाजपा नेता भी दिन भर इस राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे रहे। लोग इस बात की पुष्टि करने का प्रयास करते रहे कि क्या वाकई पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा व अशोक अरोड़ा की मंगलवार रात को सीएम से करीब 45 मिनट की मुलाकात हुई है या नहीं।
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